9/11 पर नहीं होगा तालिबान का 'शपथ ग्रहण', रूस सहित कई देशों के दबाव पर बदला फैसला

    दिनांक 11-सितंबर-2021   
Total Views |
तालिबान ने घोषणा की है कि शनिवार, 11 सितम्बर को होने वाला उसकी सरकार का उद्घाटन कार्यक्रम आगे के लिए टाल दिया गया है। रूसी समाचार एजेंसी 'तास' के अनुसार, तालिबान ने यह फैसला सहयोगियों के दबाव की वजह से लिया है
t_1  H x W: 0 x 
काबुल में एक तालिबान लड़ाका (फाइल चित्र) 
ताजा समाचार है कि तालिबान ने 9/11 की बरसी पर पूर्व घोषित अपना 'शपथ ग्रहण' समारोह फिलहाल टाल दिया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस निर्णय के पीछे 'समर्थक देशों' का जबरदस्त दबाव खास वजह है। तालिबान के सूत्रों के अनुसार, अफगानिस्तान में हाल में घोषित उसकी नई सरकार को यह भी लगा था कि ऐसा किया तो दुनिया के अन्य देशों से कहीं कोई मान्यता मिलने की उम्मीद होगी तो उसे भी झटका लग सकता है।
तालिबान ने कुछ समय पूर्व ही घोषणा की है कि शनिवार, 11 सितम्बर को होने वाला उसकी सरकार का उद्घाटन कार्यक्रम आगे के लिए टाल दिया गया है। रूसी समाचार एजेंसी 'तास' के अनुसार, तालिबान ने यह फैसला सहयोगियों के दबाव की वजह से लिया है। कल शाम यानी 10 सितम्बर को रूस ने स्पष्ट कहा था कि वह 11 सितम्बर को होने वाले तालिबान सरकार के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा। इसके पीछे यही वजह बताई जा रही थी कि वह नहीं चाहता था कि अमेरिकी जख्मों पर नमक छिड़का जाए। हालांकि कुछ दिन पहले रूस के विदेश विभाग ने कहा था कि उन्हें अफगानिस्तान से न्योता आया है और वे उस समारोह में शामिल होंगे।
ttt_1  H x W: 0 
 ब्रिक्स वर्चुअल बैठक में राष्ट्रपति पुतिन
ब्रिक्स देशों की बैठक में भी रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अफगानिस्तान का मुद्दा उठाते हुए साफ इशारा किया था कि मास्को अफगानिस्तान में 'नई सरकार' को सहयोग देगा। पुतिन ने कहा था कि तालिबान को अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मान्य करना होगा। चीन, ईरान और पाकिस्तान के दूतावासों की तरह ही रूस का दूतावास भी काबुल में कार्यरत है।
अफगान में बैठी तालिबान की अंतरिम सरकार काम कर ही रही है, इसलिए शपथ ग्रहण फिलहाल न होने से उसकी शरिया हुकूमत में कोई अड़चन नहीं आने वाली। इसलिए अफगानिस्तान के सांस्कृतिक आयोग में शामिल इनामुल्ला समांगानी ने ट्वीट करके कहा है, ‘नई अफगान सरकार का उद्घाटन कार्यक्रम कुछ दिन पहले ही रद्द कर दिया था। लोगों को किसी तरह का भ्रम न रहे, इसलिए इस्लामिक अमीरात की अगुआई में कैबिनेट का ऐलान कर दिया गया था जिसने काम करना शुरू कर दिया है।’ उल्लेखनीय है कि तालिबान ने अपने उद्घाटन कार्यक्रम में रूस, ईरान, चीन, तुर्की, कतर और पाकिस्तान को न्योता भेजा है।
रूस ने तालिबान को दी चेतावनी
हालांकि मीडिया में ऐसी भी कुछ रिपोर्ट आई हैं जिनमें कहा गया है कि अमेरिका तथा उसके नाटो सहयोगी कतर की सरकार पर दबाव डाल रहे हैं कि वह तालिबान को उद्घाटन समारोह न करने को राजी करे, क्योंकि उनके अनुसार ऐसा करना अमानवीय माना जाएगा। इससे तालिबान सरकार को दुनिया से मान्यता नहीं मिलेगी।
trigunyat_1  H
''अफगानिस्तान में रूस के राजदूत जामिर काबुलोव एक लंबे समय से काबुल और मास्को के बीच नजदीकी लाने के लिए प्रयासरत हैं इसलिए मास्को ऐसा मौका नहीं गंवाना चाहेगा जिससे उसकी अफगान नीति को कोई झटका लगे। रूस भूराजनीतिक समीकरणों में अपना हित देखते हुए कदम बढ़ा रहा है।''
-अनिल त्रिगुणायत, पूर्व राजदूत एवं पश्चिमी एशिया मामलों के जानकार
 
पांचजन्य से बात करते हुए पश्चिमी एशिया मामलों के जानकार, पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि 10 सितम्बर को ब्रिक्स देशों की बैठक में भी रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अफगानिस्तान का मुद्दा उठाते हुए साफ इशारा किया था कि मास्को अफगानिस्तान में 'नई सरकार' को सहयोग देगा। पुतिन ने कहा था कि तालिबान को अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मान्य करना होगा। चीन, ईरान और पाकिस्तान के दूतावासों की तरह ही रूस का दूतावास भी काबुल में कार्यरत है। कुछ अन्य देशों ने वहां अपने दूतावास बंद नहीं किए हैं, बल्कि स्थानांतरित कर दिए हैं। श्री त्रिगुणायत के अनुसार, अफगानिस्तान में रूस के राजदूत जामिर काबुलोव एक लंबे समय से काबुल और मास्को के बीच नजदीकी लाने के लिए प्रयासरत हैं इसलिए मास्को ऐसा मौका नहीं गंवाना चाहेगा जिससे उसकी अफगान नीति को कोई झटका लगे। पूर्व राजदूत का कहना है कि रूस भूराजनीतिक समीकरणों में अपना हित देखते हुए कदम बढ़ा रहा है।