ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सीमाई गांवों को लेकर विवाद जारी

    दिनांक 13-सितंबर-2021   
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असम और मिजोरम के बीच अभी सीमा विवाद थमा भी नहीं कि ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सीमा विवाद शुरू हो गया है। दोनों राज्‍यों के बीच सीमा पर स्थित 21 गांवों को लेकर विवाद सर्वोच्‍च न्‍यायालय तक पहुंच चुका है। अगस्‍त में शीर्ष अदालत ने दोनों ओडिशा और आंध्र प्रदेश को आपसी बातचीत से 6 हफ्ते में विवाद का निपटारा करने का निर्देश दिया था। लेकिन शीर्ष अदालत द्वारा दोनों राज्‍यों को दी गई मियाद समाप्‍त होने के बावजूद सीमा विवाद जारी है।
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कोरोपुट जिले के कोटिया पंचायत स्थित 21 गांवों पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश अपना-अपना दावा जताते हैं। 
यह है मामला
दरअसल, वर्ष 1960 के बाद से ही ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सीमा विवाद चल रहा है। इसमें कोटिया ग्राम पंचायत के 21 से अधिक गांवों पर दोनों राज्‍य अपना दावा जताते हैं। दोनों राज्‍यों के बीच सीमा विवाद को हवा उस समय मिली, जब इस साल आंध्र प्रदेश ने कोटिया पंचायत के 6 गांवों में पंचायत चुनाव की घोषणा की। 1 अप्रैल, 1936 को ओडिशा को बंगाल-बिहार से अलग किया गया था। ओडिशा के 30 जिलों में से 14 जिले आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और झारखंड के साथ सीमाएं साझा करते हैं। लेकिन मुख्‍य विवाद आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे कोरापुट जिले के कोटिया पंचायत के गांवों को लेकर है। ओडिशा, बिहार और मध्‍य प्रदेश के एक संयुक्त सर्वेक्षण में पोट्टांगी ब्लॉक में आने वाले कोटिया ग्राम पंचायत के सात गांवों को ओडिशा के राजस्व गांवों के रूप में दर्ज किया गया था। लेकिन सर्वेक्षण के समय 21 गांवों को छोड़ दिया गया था। 1955 में जब आंध्र प्रदेश अलग राज्‍य बना तब भी इन गांवों का सर्वेक्षण नहीं किया गया। लिहाजा दोनों राज्य इस क्षेत्र पर अपना दावा जताते रहे।
आंध्र प्रदेश द्वारा कोटिया पंचायत के गांवों में पंचायत चुनाव की घोषणा करने के बाद ओडिशा ने सर्वोच्‍च न्‍यायालय का दरवाजा खटखटाया। ओडिशा ने शीर्ष अदालत में अवमानना का मामला दायर किया था। इस पर 31 अगस्‍त, 2021 को शीर्ष अदालत ने दोनों राज्‍यों को आपसी बातचीत से सीमा विवाद हल करने की सलाह दी। न्‍यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्‍यायमूर्ति संजीव खन्‍ना की पीठ ने विवाद सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को 6 हफ्ते की मोहलत दी। लेकिन इन 6 हफ्तों के दौरान जमीन स्‍तर पर कुछ खास बदलाव नहीं दिखा। अलबत्‍ता दोनों राज्‍यों ने विवादित गांवों में अपनी-अपनी योजनाओं के माध्‍यम से अपना दखल बढ़ा दिया।
दो राज्‍यों की लड़ाई में ग्रामीणोंका फायदा
कोटिया पंचायत के लोगों को ओडिशा के कोरापुट जिले के पोट्टंगी ब्लॉक और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के सालुर ब्लॉक, दोनों जगहों से लाभ मिलता है। यहां के लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए दोनों ब्लॉकों पर निर्भर हैं। एक पखवाड़ा पहले आंध्र प्रदेश की एक टीम ने सीमाई गांवों में एक आंगनबाड़ी, एक आरोग्‍य केंद्र, एक किसान हॉल और एक पंचायत कार्यालय के लिए भूमि पूजन करने के साथ वृक्षारोपण अभियान भी चलाया। ओडिशा को जब इसकी भनक लगी तो अगले दिन राज्‍य सरकार ने अधिकारियों की एक टीम को इन इलाकों में भेजा। विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखने के अलावा आंध्र सरकार नागरिक निवारण और पशु चिकित्सा शिविर भी आयोजित करने के साथ भूमि के पट्टे बांट रही है और कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार कर रही है। कोरापुट जिला प्रशासन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बैरिकेडिंग लगा रखी है और ‘अनुचित प्रवेश’ को प्रतिबंधित करने के लिए पुलिस अधिकारियों को तैनात किया है।
कोटिया ग्राम पंचायत का फट्टूसेनेरी गांव उन विवादित 21 गांवों में से एक है। यहां के प्राथमिक विद्यालय की दीवार पर ओडिशा का नक्शा टंगा हुआ है। कोरोना महामारी के कारण स्‍कूल सप्‍ताह में अभी दो दिन ही खुलता है। पास ही एक अस्‍थायी तेलुगु-माध्यम मंडल परिषद प्राथमिक विद्यालय है, जिसका निर्माण पांच माह पहले किया गया है। यहां आंध्र प्रदेश सरकार की योजनाओं की घोषणा करने वाले बैनर और पोस्टर लगे हैं। स्‍कूल के शिक्षक ए. गणेश कहते हैं, “इस स्कूल में कक्षा 1 में सात छात्र पढ़ते हैं। यही छात्र ओडिया-माध्यम स्कूल में भी नामांकित हैं।” यही नहीं, फट्टूसेनेरी में बिजली आपूर्ति आंध्र प्रदेश द्वारा की जाती है, जबकि पेयजल दोनों सरकारें उपलब्‍ध कराती हैं। इसका प्रचार करने के लिए पानी की टंकियों पर विज्ञापन वाले बैनर और होर्डिंग भी लगे हुए हैं। फट्टूसेनेरी से करीब 5 किमी. दूर स्थित दो गांवों, ओडिया में उपरा (ऊपरी) सेम्बी और ताला (निचला) सेम्बी और तेलुगु में येगुवा (ऊपरी) सेम्बी और ताक्कुवा (निचला) सेम्बी में कुछ लोगों के पास ओडिशा और कुछ के पास आंध्रप्रदेश के आधार कार्ड हैं।
एक ही गांव, आधार पर राज्‍य अलग
उपरा सेम्‍बी के 27 वर्षीय पिलकू तडिंगी उडि़या में बताते हैं, “दोनों राज्य इस क्षेत्र पर अपना दावा जताते हैं। इनके आपसी झगड़े के कारण कई बार विकास कार्य ठप हो जाते हैं। पिलकू के पास ओडिशा का आधार कार्ड है। इसमें उनके जिले का नाम कोरापुट अंकित है। लेकिन इसी गांव में महज तीन घर दूर रहने वाले 26 वर्षीय तदंकी श्रीराम का आधार कार्ड आंध्र प्रदेश का है। इसमें उनके गांव का नाम येगुवा सेम्‍बी और जिला विजयनगरम अंकित है। आंध्र सरकार ने 2018 में यहां के लोगों के आधार कार्ड बनवाए थे। यही नहीं, यहां से करीब 12 किमी दूर मड़कर गांव में हर पीढ़ी अलग-अलग भाषा बोलती है। यहां कुछ लोग उडि़या, कुछ कुई (कोंध जनजाति की भाषा) और कुछ तेलुगु बोलते हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के लिए लाभार्थियों की पहचान करते समय भी मुश्किलें आती हैं। जैसे- राणा और डोरा समुदायों को आंध्र प्रदेश में वनवासी का दर्जा प्राप्त है, जबकि ओडिशा में वे ओबीसी श्रेणी में हैं। 2018 में आंध्र सरकार ने क्षेत्र में सड़कों का निर्माण कराया तो ओडिशा ने 150 करोड़ रुपये के विकास पैकेज की घोषणा की। 2019 के मध्य में पहली बार विवादित क्षेत्र के सभी गांव सड़क जुड़ गए। अब इस साल जनवरी में ओडिशा सरकार ने इस क्षेत्र में द्वारा पहली बार मोबाइल टावर स्थापित कराया और उसने कोटिया को मॉडल पंचायत के रूप में विकसित करने की घोषणा भी की है।
इन राज्‍यों के साथ भी विवाद
पश्चिम बंगाल: ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच बालासोर ज़िले में 27 भूखंडों और ओडिशा के मयूरभंज जिले में कुछ क्षेत्रों को लेकर विवाद है। मयूरभंज जिला लौह अयस्क भंडार और छऊ नृत्य के लिए विख्‍यात है।
झारखंड: ओडिशा और झारखंड के बीच सीमा विवाद वैतरणी नदी के रास्‍ता बदलने के कारण उत्पन्न हुआ है। बैतरणी नदी ओडिशा के क्योंझर जिले की पहाड़ी श्रृंखला से निकलती है। यह पूर्व की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में मिलती है। इस नदी के जलग्रहण क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा ओडिशा तथा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का एक छोटा हिस्सा झारखंड में आता है।
छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा के नबरंगपुर और झारसुगुड़ा जिलों के गांवों को लेकर विवाद है।