जिहादियों ने चर्च और ईसाइयों को बनाया निशाना, तालिबान के सत्तारूढ़ होने से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर बढ़ा खतरा

    दिनांक 13-सितंबर-2021
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मीम अलिफ हाशमी
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्तारूढ़ होने की कीमत पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को किस कदर चुकानी होगी, यह तो भविष्य ही बताएगा। पर इसमें दो राय नहीं कि पड़ोसी देश में आए सियासी बदलाव से पाकिस्तान में जिहादी मानसिकता रखने वालों के हौसले बुलंद हैं।
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अफगानिस्तान में तालिबान के सत्तारूढ़ होने की कीमत पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को किस कदर चुकानी होगी, यह तो भविष्य ही बताएगा। पर इसमें दो राय नहीं कि पड़ोसी देश में आए सियासी बदलाव से पाकिस्तान में जिहादी मानसिकता रखने वालों के हौसले बुलंद हैं।पाकिस्तान अल्पसंख्यक अधिकार आयोग के पदाधिकारी इमरान खान सरकार पर उंगली उठाते हुए कहते हैं कि पिछले तीन वर्ष में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घटनाओं और दुर्व्यवहार में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन्हीं चिंताओं के बीच खबर है कि गत रविवार को लाहौर जिले के शेरकोट सिथत न्यू होप चर्च पर और इसके आसपास रहने वालों पर हमला किया गया। गोली-बारी की गई। घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस दौरान चर्च में प्रार्थना और सेवा करने आए लोगों को भी नहीं छोड़ा गया। उनकी इतनी बुरी तरह पिटाई की गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
पंजाब के शेरकोट इलाके में ईसाई अल्पसंख्यकों की संख्या खासी है। उनका कहना है कि इलाके के बहुसंख्यक मुसलमान उन्हें पसंद नहीं करते। चर्च जाने से रोकते हैं। उनका मजाक उड़ाते हैं। मिलान की एक वेबसाइट ‘एशियान्यूज.इट’ के अनुसार, शेरकोट के ईसाइयों को इस्लाम कबूलने को धमकी दी जाती हैं। उनके तमाम विरोध के बावजूद मसीहियों ने चर्च जाना बंद नहीं किया तो पिछले रविवार को उन पर और चर्च पर हमला किया गया। चर्च के आसपास ईसाइयों के कई घर हैं।
उनका आरोप है कि मुसलमानों का एक समूह दोपहर करीब ढाई बजे वहां पहुंचा और गोली-बारी शुरू कर दी। इसमें कई महिला, पुरुष घायल हो गए। बताते हैं कि पीड़ितों में एक गर्भवती महिला भी है। उसे गंभीर चोट आई हैं। रूखसाना बीबी नामक एक महिला ने बताया, ‘‘मैं चर्च के एक कमरे की सफाई कर रही थी, तभी अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई पड़ी। वह इतनी भयभीत हो गई कि कुछ देर के लिए वहीं बेहोश होकर गिर गई। होश आने पर उसे याद आया कि उसका तीन साल का बच्चा चर्च के आंगन में खेल रहा है। भाग कर बाहर आई। बेटे को लेकर जब कमरे में भागने लगी तो खिड़की का शीशा तोड़ते हुए एक पत्थर उसे लगा जिससे वह घायल हो गई।
प्रत्यक्षदर्शी ईसाइयों का कहना है कि पिछले कई दिनों से उन्हें निशाना बनाने का प्रयास चल रहा था। घटना के दिन स्थिति बदतर हो गई। चर्च के साथ-साथ ईसाइयों के घरों पर भी हमले और तोड़-फोड़ की गई। ईसाई समुदाय से संबंध रखने वाले पत्रकार साइमन अलीम की बातों पर विश्वास किया जाए तो हमलावरों के पास सैन्य शैली के हथियार थे। उन्होंने आते ही घरों और चर्च पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस गोलीबारी में न्यू होप चर्च के पादरी रेव आसिफ नवाब मसीह सहित कई लोग घायल हो गए।
पाकिस्तान अल्पसंख्यक अधिकार आयोग के महासचिव रोहील जफर शाही ने घटना की पुष्टि की है। हालांकि वह इमरान खान की कमियां छिपाने के प्रयासों के बावजूद यह स्वीकार कर गए,‘‘
सरकार अल्पसंख्यक पूजा स्थलों और हमारी सुरक्षा के लिए काफी प्रयास कर रही है। मगर दुर्भाग्य से पिछले तीन वर्ष में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घटनाओं और दुर्व्यवहार में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक मजहबी कट्टरपंथी ने महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा तोड़ डाली थी और एक गणेश मंदिर को तहस-नहस कर दिया गया था। कई एजेंसियों ने अपनी जांच रिपोर्ट में चिंता प्रकट की है कि पाकिस्तान में प्रत्येक वर्ष केवल एक हजार से अधिक हिंदू लड़कियां अपहरण, बलात्कार और कन्वर्जन की शिकार हो रही हैं। तालिबानियों के सत्ता में आने के बाद निश्चित ही पाकिस्तान के कट्टरपंथियों के हौसले और बुलंद होंगे और उन्हें निशाना बनाने का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि आज भी लाखों की संख्या में तालिबानी पाकिस्तान में शरणार्थी बनकर रह रहे हैं। उन पर आरोप है कि अफगानिस्तान पर कब्जे के दौरान पाकिस्तान में रह रहे तालिबानियों और उनसे जुड़े आतंकवादी संगठनों ने तालिबानी आतंकियों का भरपूर साथ दिया था।