घुसपैठियों की पहचान के आदेश पर भड़के ओवैसी

    दिनांक 13-सितंबर-2021   
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गत दिनों पटना उच्च न्यायालय ने बिहार सरकार से कहा कि राज्य में रह रहे घुसपैठियों की पहचान की जाए। इसके बाद एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भड़क गए हैं। वे और उनकी पार्टी के अन्य नेता अपने बयानों से पटना उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना कर रहे हैं। ये लोग खुलेआम बांग्लादेशी घुसपैठियों की मदद करने में लगे हैं।
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भारत में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए। इनके आकाओं ने इनके लिए भारतीय पहचानपत्र भी बनवा दिए हैं। 
इन दिनों बिहार में अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए हैदराबाद वाले असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम के नेता न्यायालय की अवमानना तक कर रहे हैं। खुद ओवैसी भी लोगों को बरगला रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गत दिनों पटना उच्च न्यायालय ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि वह राज्य में रह रहे घुसपैठियों की पहचान करे और जो लोग पकड़े जाएं उन्हें उनके देश भेजने तक हिरासत केंद्र (जहां उन विदेशियों को रखा जाता है, जिनके पास वैध कागजात नहीं होते हैं) में रखे। मुख्य न्यायाधीश संजय करोल एवं न्यायाधीश एस. कुमार की खंडपीठ ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि विदेशियों को पकड़ कर उनके अपने देश में भेजने की प्रणाली तैयार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।
न्यायालय ने यह आदेश मरियम खातून बनाम बिहार सरकार एवं अन्य के मामले में दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद हाजीपुर में बिहार का पहला 'हिरासत केंद्र' खोला गया है। इसके अलावा राज्य के सभी 38 जिलों के जिला प्रशासन द्वारा घुसपैठियों के संबंध में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा नागरिकों से आग्रह किया जा रहा है अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की जानकारी नजदीकी थाना/ओ.पी को दें। विदेशी नागरिकों विशेषकर, बांग्लादेशी नागरिकों के विरुद्ध विधि—सम्मत कार्रवाई में सहयोग की अपील की जा रही है।
सीवान और किशनगंज के जिला प्रशासन ने तो इस संबंध में पत्र भी जारी कर दिए हैं। सीवान के पुलिस अधीक्षक ने एक पत्र जारी कर कहा है कि सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों खासकर बांग्लादेशी नागरिक, यदि आपके आसपास रह रहे हैं या आपको किसी प्रकार की ऐसी सूचना प्राप्त होती है तो आप अपने नजदीकी थाना या ओपी में सूचित करें। वहीं, किशनगंज जिला प्रशासन द्वारा जारी पत्र में लिखा गया है कि जिले के अंतर्गत विभिन्न स्थलों, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास कर रहे संदेहास्पद, अवैध विदेशी व्यक्तियों की पहचान करने में स्थानीय प्रशासन का सहयोग करें।
इन्हीं पत्रों को आधार बनाकर ओवैसी ने आरोप लगाया कि है कि बिहार सरकार चोर दरवाजे से एनआरसी लागू करना चाहती है। उन्होंने यह भी नहीं देखा कि यह सब न्यायालय के आदेश पर हो रहा है। इसके बावजूद ओवैसी ने लिखा है, ''बिहार सरकार चोर दरवाजे से बिहार में एनआरसी लागू कर रही है। अधिकारी आम लोगों से कह रहे हैं कि वे आसपास रहने वाले 'विदेशी नागरिक' की सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें। असम में भी ऐसे ही कानूनी कार्रवाई का दुरुपयोग बड़े पैमाने पर किया गया है।''
इसके साथ ही उनकी पार्टी के एक विधायक ने तो यहां तक कहा कि राज्य सरकार भाजपा के दबाव में जिला प्रशासन से नोटिस जारी करवा रही है।
चाहे ओवैसी हों या उनके विधायक दोनों झूठ बोल रहे हैं। बता दें कि अभी देश में कहीं भी एनआरसी लागू नहीं है, लेकिन ओवैसी को इससे क्या लेना—देना। वे तो भ्रम फैला कर मुसलमानों को भ्रमित कर रहे हैं। वहीं उनकी पार्टी के विधायक भी झूठ बोल रहे हैं कि बिहार में एक भी घुसपैठिया नहीं है, जबकि आएदिन राज्य में घुसपैठिए पकड़े जा रहे हैं। पटना उच्च न्यायालय ने हिरासत केंद्र बनाने का जो निर्देश दिया है, उसके पीछे भी कुछ बांग्लोदशी महिलाएं हैं, जिन्हें पटना में पकड़ा गया था। इसके अलावा बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण किशनगंज, अररिया, पूर्णिया जैसे जिले मुस्लिम—बहुल बनते जा रहे हैं। इसके बावजूद ओवैसी और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं को लगता है कि बिहार में एक भी घुसपैठिया नहीं है। यह एक तरह से न्यायालय की अवमानना ही है।