9/11 हमलों में क्या सऊदी अरब था शामिल? आतंकी हमले पर महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किया अमेरिका ने

    दिनांक 13-सितंबर-2021   
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'डिक्लासिफाइड डॉक्यूमेंट' में 11 सितंबर 2001 के अमेरिका पर आतंकी हमलों में दो सऊदी अपहरणकर्ताओं का जिक्र है। दस्तावेज के अनुसार, इनके अमेरिका में मौजूद सऊदी अरब के सहयोगियों के साथ तार जुड़े थे
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वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर आतंकी हमले का दृश्य (फाइल चित्र) 
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि आतंकी 9 सितम्बर के आतंकी हमले से जुड़े गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे। उस क्रम में 11 सितम्बर को अमेरिका की ओर से जारी 16 पृष्ठ के दस्तावेज में कई महत्वपूर्ण बातें उजागर हुई हैं। इससे सवाल खड़ा हुआ है कि क्या 9/11 हमलों में सच में सऊदी अरब की भूमिका थी?
अमेरिका के इस 16 पृष्ठ के 'डिक्लासिफाइड डॉक्यूमेंट' में 11 सितंबर 2001 के अमेरिका पर आतंकी हमलों में दो सऊदी अपहरणकर्ताओं का जिक्र है। दस्तावेज के अनुसार, इनके अमेरिका में मौजूद सऊदी अरब के सहयोगियों के साथ तार जुड़े थे। हालांकि इस बात कोई सबूत नहीं मिला कि सऊदी अरब सरकार की इस हमले में कोई सीधी भूमिका थी।
अमेरिकी गुप्तचर संस्था एफबीआई ने 9/11 हमले की 20वीं बरसी पर यह दस्तावेज जारी किया है। राष्ट्रपति बाइडेन के ऐसे दस्तावेज को जारी किए जाने का आदेश देने के बाद यह पहला दस्तावेज सार्वजनिक किया गया है। इसे अनेक साल तक लोगों की नजरों से दूर रखा गया था। बताते हैं, इसे सार्वजनिक करने को लेकर बाइडेन पर पीड़ितों के परिजनों का जबरदस्त दबाव था। उनसे मांग की गई थी कि उन हमलों से जुड़े तमाम दस्तावेज जारी किये जाएं जिससे असलियत सबके सामने तो आए। पीड़ितों के परिवार वालों ने न्यूयॉर्क में मुकदमा भी दायर किया है, जिसमें आरोप था उन हमलों में सऊदी अरब के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का हाथ था।
सऊदी सरकार पिछले लंबे वक्त से उन हमलों में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इंकार करती रही है। वाशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास ने कहा है कि राजशाही के विरुद्ध लगे बेबुनियाद आरोपों को हमेशा के लिए दफन करने की दिशा में वह इस तरह के सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का समर्थन करता है।
उल्लेखनीय है कि सऊदी सरकार पिछले लंबे वक्त से उन हमलों में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इंकार करती रही है। वाशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास ने कहा है कि राजशाही के विरुद्ध लगे बेबुनियाद आरोपों को हमेशा के लिए दफन करने की दिशा में वह इस तरह के सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का समर्थन करता है। दूतावास की तरफ से कहा गया है कि सऊदी अरब पर मिलीभगत का आरोप एकदम झूठा है।
वाशिंगटन और रियाद के कभी बड़े मीठे रिश्ते हुआ करते थे। दोनों के बीच लंबे समय तक आतंकवाद के विषयों को लेकर एक रणनीतिक रिश्ता रहा है। असल में उस आतंकी हमले में सऊदी अरब पर शक इसलिए किया जाता है क्योंकि हमले के बाद पता यह चला था कि इसमें शामिल 19 में से 15 हमलावर सऊदी अरब के नागरिक थे।