कैप्‍टन के लिए भस्‍मासुर बना किसान आंदोलन

    दिनांक 14-सितंबर-2021   
Total Views |
 घर लगी आग को कुछ लोग आग और दूसरों के घर लगे तो उसे बसन्तरदेव (अग्निदेव) कहते हैं। पंजाब के मुख्यमन्त्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी इन्हीं लोगों में हैं। पंजाब में आन्दोलन से तंग आकर उन्होंने किसानों से कहा है कि वे पंजाब की बजाय हरियाणा व दिल्ली की सीमा पर ही धरने दें। उनके अनुसार इस आन्दोलन से पंजाब को बड़ा नुकसान हो रहा है। हरियाणा सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कैप्टन अमरिन्दर पर निशाना साधा है।
punjab_1  H x W


हरियाणा
के कृषि मन्त्री जेपी दलाल और गृहमन्त्री अनिल विज ने कैप्टन पर तीखा हमला बोला है। विज ने कैप्टन के बयान को बेहद गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। कृषि मन्त्री जेपी दलाल ने कहा कि कैप्टन के बयान से साफ हो गया है कि यह पूरा आन्दोलन कांग्रेस और पंजाब प्रायोजित है। कैप्टन को पंजाब के साथ हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की भी चिन्ता करनी चाहिए। उनको किसान संगठनों को समझाना चाहिए। पूर्व केन्द्रीय मन्त्री व अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने इस बयान पर कहा कि कैप्टन अपने आलीशान महल में आराम करते हैं, जबकि हमारे किसान पिछले 10 महीने से खराब मौसम में दिल्ली की सडक़ों पर मर रहे हैं। यही कैप्टन की योजना थी।

 

होशियारपुर में एक सरकारी कार्यक्रम में कैप्टन अमरिन्दर ने किसानों से अपील की कि वे पंजाब में 113 जगहों पर चल रहे धरनों को खत्‍म कर दें, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और पंजाब का आर्थिक विकास प्रभावित न हो। कहीं न कहीं ये धरने पंजाब के लिए गम्भीर साबित हो रहे हैं। राज्य की आर्थिक हालात पहले ही ठीक नहीं है और अगर किसान अपने ही राज्य में धरने देंगे तो इससे स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने राज्य की उन्नति में सहयोग देना चाहिए न कि बाधा पैदा करनी चाहिए। अगर हम नहीं समझे और हालात इसी तरह रहे तो पंजाब के लिए आर्थिक संकट पैदा हो जाएगा।

 

यहां यह बताना जरूरी है कि कथित किसान आन्दोलन के चलते राज्य की आम जनता तो परेशान है ही, इससे राज्य की आर्थिक गतिविधियां भी पंगु हो चुकी हैं। राज्य में अडाणी समूह द्वारा लुधियाना के पास लॉजिस्टिक पार्क, फिरोजपुर व मोगा के पास साइलो प्लाण्ट बन्द किए जा चुके हैं। इनके बन्द होने से सैकड़ों वैसे नौजवान नौकरियों से हाथ धो बैठे जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और किसान परिवार के हैं। इतना ही नहीं रिलायंस कम्पनी राज्य में कई स्थानों पर अपने पेट्रोल पम्प व खुदरा विक्रय केन्द्र बन्द कर चुकी है और कई स्थानों पर कर्मचारियों को नौकरी खोजने को कहा जा चुका है। कथित किसानों के धरने के चलते बठिण्डा में हाल ही में एक बड़ी कम्पनी ने अपना मार्ट बन्द कर दिया है।

 

आन्दोलनकारी इससे पहले राज्य में करीब 1500-1600 से अधिक मोबाइल टावर तोड़ चुके हैं। इन आन्दोलनों से राज्य के उद्योगपतियों में भय व्याप्त है। खुद मुख्यमन्त्री यह बता चुके हैं कि राज्य में 69,000 करोड़ रुपये के निवेश के आवेदन मिले थे, परन्तु कथित किसान आन्दोलन के चलते अभी तक किसी ने भी एक कौड़ी भी नहीं लगाई है। उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल को देखते हुए पंजाब के बहुत से उद्योगपति इन राज्‍यों में निवेश की योजना बना रहे हैं। यह किसी से छिपा नहीं है कि केन्द्र सरकार के तीन कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ तिल का ताड़ बनाने में कांग्रेस विशेषकर पंजाब कांग्रेस और मुख्यमन्त्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की महती भूमिका रही है। वे चाहते तो किसानों को पंजाब में ही रोका जा सकता था, परन्तु उन्होंने अपनी पार्टी के साथ-साथ पूरी सरकार का जोर लगाकर किसानों को भटकाना व गुमराह करना जारी रखा और आन्दोलन को हर तरह से मदद करते रहे।

 

अब वही भटके हुए किसान इस मार्ग पर इतना आगे बढ़ चुके हैं कि किसी की बात सुनने को तैयार दिखाई नहीं दे रहे। पंजाब में यही किसान 113 विभिन्न स्थानों पर धरने दे रहे हैं जिससे आम लोग, व्यापारी, उद्योगपति, नौजवान अदि सभी वर्गों के लोग परेशान हो चुके हैं और लोगों में राज्य सरकार के खिलाफ गुस्सा पनप रहा है। इसी से घबरा कर कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने किसानों से पंजाब में से धरना उठाने को कहा है। इस कथित आन्दोलन से हरियाणा व दिल्ली के उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं, क्या कैप्टन नहीं जानते कि पड़ोसी राज्यों पर पडऩे वाला बुरा असर पंजाब को प्रभावित नहीं करेगा? पंजाब, हरियाणा व दिल्ली के उद्योग परस्पर जुड़े और परस्पर निर्भर हैं, एक राज्य का उद्योग प्रभावित होता है तो असर दूसरों पर पड़ना भी स्वभाविक है। कैप्टन के लिए श्रेष्ठ तो यह होता कि वह आन्दोलनकारी किसानों को समझाते, उन्हें बातचीत व धरना उठाने के लिए मनाते। लोकतन्त्र में चाहे हर नागरिक को विरोध करने का अधिकार है, परन्तु सर्वोच्च न्यायालय भी बार-बार कह चुका है कि अपने अधिकार के लिए हम नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते। कैप्टन की इस अपील से अब उन किसानों को भी समझ आ जानी चाहिए कि देश के राजनीतिक दल उनके कन्धों पर बन्दूक चला कर अपने निशाने साध रहे हैं।