फर्जीवाड़े में लिप्त 5 हज़ार से ज्यादा मदरसे बन्द, हर वर्ष सौ करोड़ की हुई सरकार की बचत

    दिनांक 14-सितंबर-2021
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पश्चिम उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में मदरसों के जरिये सरकार से मदद लेने वाले 5 हज़ार से ज्यादा फ़र्ज़ी संस्थानों पर ताला पड़ गया है। योगी सरकार और केंद्र की पारदर्शी नीति के चलते सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की सालाना बचत हुई है।
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उत्तर प्रदेश
में मदरसों के जरिये सरकार से मदद लेने वाले 5 हज़ार से ज्यादा फ़र्ज़ी संस्थानों पर ताला पड़ गया है। योगी सरकार और केंद्र की पारदर्शी नीति के चलते सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की सालाना बचत हुई है।

अल्पसंख्यक आयोग उत्तर प्रदेश से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य में पांच हज़ार से ज्यादा मदरसों ने सरकार द्वारा बनाए गए एप पर अपने आप को अपलोड नहीं किया। करते भी कैसे ?क्योंकि उनके पास कोई दस्तावेज ही नहीं थे। कागजी काम करते ही उनकी पोल खुल जाती। ज्यादातर फर्जी मदरसे पश्चिम उत्तर प्रदेश में थे, जो कि अब गायब हो गए हैं।

मदरसा शिक्षा एप में हर मदरसे को अपने दस्तावेज जैसे—मदरसा सोसाइटी के लोगों के आधार कार्ड और उसमें पढ़ने वाले बच्चे के आधार कार्ड को अपलोड करना होता है। एप में अपलोड करते ही पता लग जाता कि अमुख व्यक्ति या छात्र का कहीं और तो पंजीकरण नहीं है ? यूपी में 18 अगस्त, 2017 को मदरसों के लिए एप के आते ही राज्य के 5 हज़ार से ज्यादा मदरसे गायब हो गए। उस वक्त तक यूपी में 19123 मदरसे थे, जो कि अब घटकर करीब 14 हज़ार रह गए हैं।

अल्पसंख्यक आयोग यूपी के सदस्य सुरेश जैन ऋतुराज कहते हैं कि मदरसा शिक्षा एप के जरिये फर्जी मदरसों की पहचान हो गयी और करीब सौ करोड़ की बचत सरकार की हुई है। उन्होंने बताया कि मदरसों को केंद्र और राज्य सरकार अनुदान देती है, जिसे लेकर कई सालों से हजारों मदरसे फ़र्ज़ी दस्तावेजों के जरिये सरकार को चूना लगा रहे थे। अब चोरी पकड़ी गई तो मुंह छुपा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानकों के विपरीत चल रहे मदरसे बन्द होंगे।

श्री जैन ने बताया कि जो वास्तविक मदरसे हैं सरकार उसमें पढ़ाई एवं अत्याधुनिक कोर्स करवाएगी। उन्होंने बताया कि वक्फ बोर्ड की सम्पत्तियों में भी कब्जे हैं, ऐसे दस रसूखवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।