उत्तराखंड: माओवादी भास्कर को एसटीएफ ने पकड़ा, 2022 चुनाव को लक्षित कर रच रहा था बड़ी साजिश

    दिनांक 14-सितंबर-2021   
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उत्तराखंड पुलिस ने 2017 से फरार चल रहे माओवादी भास्कर पांडेय को रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि भास्कर पांडेय पर 20 हज़ार का इनाम था। पिछले एक साल से वह किसान आंदोलन में सक्रिय था।dman_1  H x W:

उत्तराखंड
पुलिस ने 2017 से फरार चल रहे माओवादी भास्कर पांडेय को रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि भास्कर पांडेय पर 20 हज़ार का इनाम था। पिछले एक साल से वह किसान आंदोलन में सक्रिय था। पिछले दिनों उत्तराखंड में जब अपने घर आया तो सर्विलांस के जरिए पुलिस की निगरानी में आ गया।

उत्तराखंड में नेपाल सीमा से लेकर कुमाऊं के अल्मोड़ा जिले में माओवादी अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। ऐसी सूचनाओं पर खुफिया एजेंसियों ने शासन को रिपोर्ट दी हुई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अल्मोड़ा जिले के भिकयासेंण इलाके में माओवादी कैम्प होने की खबरें आ रही थी। जानकारी के मुताबिक नक्सली ईस्टर्न कमांड का सदस्य भास्कर पांडेय यहां के कुछ युवकों के साथ अपने अभियान में लगा हुआ था, जिसका मकसद अगले विधान सभा चुनाव 2022 में व्यवधान पैदा करना था।

भास्कर, 2017 से पहले से ही योगेश भट्ट, खिम सिंह बोरा, देवेन्द्र चमवाल, गोपाल भट्ट, हेम पाण्डेय समेत कई माओवादियों के साथ रह कर उत्तराखंड में अपने गैंग को विस्तार देता रहा था। 2017 में वह राज्य की तीन बड़ी वारदातों में लिप्त पाया गया और छिपता रहा। यूपी में एसटीएफ की 2019 में खिम बोरा की गिरफ्तारी के बाद वह यहां से फरार हो गया और पंजाब, झारखंड में सक्रिय रहा। बिहार और झारखंड चुनाव में भास्कर ने वहां के माओवादियों के साथ मिलकर सरकार विरोधी अभियान में हिस्सा लिया। फरार घोषित होने की वजह से पुलिस ने भास्कर पर इनाम रखा।

भास्कर पांडेय 2012 में पकड़े गए माओवादी प्रशांत सांगलेकर जिसे प्रशांत राही के नाम से भी जाना जाता था, के संपर्क में रहा। नानकमत्ता के जंगलों में 2012 में हथियारों के जखीरे क़े साथ पुलिस ने माओवादी कैम्प का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में प्रशांत राही और उसके साथी राजद्रोह के आरोप में जेल गए थे। उत्तराखंड के हेम मिश्रा को हार्डकोर माओवादी माना जाता था। भास्कर उसके संपर्क में निरंतर रहा। हेम को नक्सलियों की मदद के आरोप में जेल हुई थी।

जानकारी के मुताबिक भास्कर और उसके साथी जंगलों के अलावा ऐसे स्थानों पर रहते थे, जहां पुलिस का एरिया नहीं होता। उत्तराखंड के गांवों में सिविल पुलिस का नहीं पटवारी यानी राजस्व पुलिस का राज चलता है। जिसका फायदा माओवादी तत्व उठाते रहते हैं।

गिरफ्तार माओवादी भास्कर उत्तराखंड में अपना नाम बदल कर गतिविधियों का संचालन करता था। भुवन, तरुण, मनीष पाण्डे उसके छदम नाम थे। अल्मोड़ा के आरतोला गांव निवासी भास्कर 2014, 2015 और 2017 में सरकार विरोधी पोस्टर लगाने, दीवारों पर स्लोगन लिखने, चुनावों का बहिष्कार करने जैसे मामलो में भी लिप्त रहा था।

पुलिस के डीआईजी का बयान

पुलिस उप महानिरीक्षक नीलेश आनन्द भरणे ने भास्कर पांडेय की गिरफ्तारी के बाद बताया कि भास्कर पांडेय 2017 में अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में लोक संपति विरूपण अधिनियम और विधि विरुद्ध क्रियाकलाप अधिनियम के तहत तीन—तीन मामले दर्ज थे।

भास्कर पांडेय अल्मोड़ा से हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से कहीं भाग जाने की फिराख में था और उसे हल्द्वानी में किसी राजेश नाम के युवक से पेन ड्राइव और कुछ लिखित सामग्री लेनी थी। बता दें कि उसे 2019 में यूपी में एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार माओवादी खिम सिंह बोरा का सबसे करीबी माना जाता है। ज्यादातर वह भूमिगत रहकर अपनी गतिविधियों का संचालन करता रहा है। पुलिस ने पिछले दिनों इस पर ईनामी राशि 50 हज़ार किए जाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा हुआ था।

डीआइजी भरणे ने बताया कि भास्कर उत्तराखंड की नेपाल सीमा से लगे जंगलों एवं पहाड़ के कई स्थानों पर अपनी मूवमेंट रखता था। पिछले दिनों दिल्ली में किसान आंदोलन में इसकी मौजूदगी की खबर खुफिया एजेंसियों को मिली थी। उसके बाद से इस पर नजर रखी जा रही थी। भास्कर के अन्य साथियों पर भी पुलिस की नज़र है, जो 2022 के विधानसभा चुनावों को अपना टारगेट बनाये हुए थे। पुलिस इसके और साथियों की तलाश कर रही है।