ट्विटर पर रिपब्लिकन भड़के, तालिबानी ट्विटर पर पोस्ट डाल सकते हैं, तो ट्रंप के खाते पर प्रतिबंध क्यों! किसके पाले में ये टेक कंपनियां?

    दिनांक 15-सितंबर-2021   
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फेसबुक पहले ही तालिबान को आतंकी संगठन बता चुका है, इसलिए वह उसके या उसके समर्थकों के खाते बंद करेगा, लेकिन ट्विटर ने तालिबान नेताओं पर ऐसी कोई रोक नहीं लगाई है
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पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप (प्रकोष्ठ में) का बंद पड़ा ट्विटर खाता

अमेरिका
में रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से ट्विटर के 'कायदों' पर एक बड़ा गंभीर प्रश्न उठाया गया है। उसी ट्विटर पर जिसने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर खाता बंद किया हुआ है। अमेरिकी नेताओं की ट्विटर को लेकर 14 सितम्बर को दर्ज कराए गए विरोध के बाद यह विषय एक बार पुन: चर्चा में उभरा है। रिपब्लिकन नेता ने प्रश्न किया कि, आखिर क्या वजह है तालिबान का प्रवक्ता तो ट्विटर पर पोस्ट डाल रहा है, लेकिन अमेरिका का पूर्व राष्ट्रपति को ऐसा करने की सुविधा नहीं है!

उल्लेखनीय है कि तालिबानी नेता लगभग रोज अपने ट्विटर खातों से पोस्ट कर रहे हैं। अफगानिस्तान पर बंदूक के दम पर कब्जा करने के बाद से खुद को 'बदले तालिबान' दिखाने के लिए खुद को 'टेक सेवी' दिखाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। वे ट्विटर पर कुछ ज्यादा ही सक्रिय दिख रहे हैं। विशेषज्ञ इसे उनका अपनी छवि बदलने का हथकंडा मानते हैं। तालिबान के ऐसे ऐसे नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं जो कट्टर जिहादी और हत्यारे माने जाते हैं। वे सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर में अपनी मजहबी उन्मादी मानसिकता का खुलेआम प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अपने मन की बात ट्विटर के जरिए नहीं रख सकते हैं, उन पर इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने पाबंदी लगाई हुई है। यही वजह है कि अमेरिका की तरफ ट्विटर और वैसी ही कई अन्य टेक कंपनियों पर सवाल खड़े किए गए हैं। अमेरिका में ट्विटर से सवाल किया गया है कि अगर तालिबान जैसे आतंकी संगठन के नेता ट्विटर पर सक्रिय हो सकते हैं, तो फिर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति का खाता अभी तक बंद कैसे है! रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेता मेडिसन ने यह उल्लेख करते हुए सवाल खड़ा किया है कि ये टेक कंपनियां बताएं कि आखिर वे किसके पाले में हैं। कई अन्य नेताओं ने भी ठीक यही सवाल उठाया है।

ट्विटर ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का खाता यह आरोप लगाते हुए प्रतिबंधित किया हुआ है कि 'भाषण भड़काऊ था। उससे हिंसा फैल सकती थी'। ट्विटर ने दावा किया था कि उनके भाषण से दुनिया पर असर पड़ता है, अत: उनके उस भड़काऊ भाषण को और बढ़ावा देना गलत है। ट्रंप का ट्विटर खाता इस साल के शुरू में हिंसा होने के बाद रोक दिया गया था।

यहां दिलचस्प बात यह है कि फेसबुक पहले ही तालिबान को आतंकी संगठन बता चुका है, इसलिए वह उसके या उसके समर्थकों के खाते बंद करेगा, लेकिन ट्विटर ने तालिबान नेताओं पर ऐसी कोई रोक नहीं लगाई है। दुनिया भर में लोग ट्विटर के इस दोगले रवैया से हैरान हैं। वे पूछ रहे हैं कि अगर ट्रंप के भाषण उकसावे वाले हैं तो तालिबान की बातें क्या दुनिया में प्रेम और सौहार्द का प्रसार कर रही हैं?




इंट्रो
अमेरिका में ट्विटर से सवाल किया गया है कि अगर तालिबान जैसे आतंकी संगठन के नेता ट्विटर पर सक्रिय हो सकते हैं, तो फिर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति का खाता अभी तक बंद कैसे है! रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेता मेडिसन ने यह उल्लेख करते हुए सवाल खड़ा किया है कि ये टेक कंपनियां बताएं कि आखिर वे किसके पाले में हैं। कई अन्य नेताओं ने भी ठीक यही सवाल उठाया है।