हेरात में सड़क पर उतरीं अफगान महिलाएं, अधिकार और सरकार में भागीदारी देने की मांग

    दिनांक 03-सितंबर-2021   
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रैली की आयोजक फिब्रा ने मांग की कि 'लोया जिरगा' और मंत्रिपरिषद में अफगान महिलाओं की भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज अफगान महिलाएं जहां भी पहुंची हैं, उसे पाने के लिए उन्होंने गत 20 साल में कितनी ही कुर्बानियां दी हैं
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हेरात में प्रदर्शन करतीं महिलाएं

बर्बर तालिबान लड़ाकों के आक्रोश से निडर रहते हुए 2 सितम्बरी को अफगानिस्तान के हेरात शहर में करीब 50 महिलाओं ने सड़क पर जबरदस्त प्रदर्शन किया। उन्होंने तालिबान के राज में महिलाओं की सुरक्षा और हकों की मांग उठाई। पश्चिमी हेरात प्रांत के गवर्नर दफ्तर के बाहर इकट्ठी हुईं इन महिलाओं ने मांग की कि नई सरकार अफगानिस्तान में बड़े संघर्ष के बाद हासिल हुए महिला अधिकारों को बचाने की चिंता करे। इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था फ्रिबा कबरजानी ने। फिब्रा ने कहा कि वहां की 'लोया जिरगा' और मंत्रिपरिषद में अफगान महिलाओं की भागीदारी होनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि आज अफगान महिलाएं जहां भी पहुंची हैं, उसे पाने के लिए उन्होंने गत 20 साल में कितनी ही कुर्बानियां दी हैं। हम चाहते हैं कि दुनिया हमारी बात सुने। अफगान महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जाए।


प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का यह भी कहना था कि वे फिर से बुर्का पहनने को तैयार हैं, लेकिन शर्त यह है कि उनकी बेटियों को तालिबान स्कूल जाने दें। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सुरक्षा और अधिकारों की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। 

वहीं दुनिया जानती है कि तालिबान लड़ाकों ने 15 से 45 साल की महिलाओं के लिए क्या फरमान जारी किया था। उनके द्वारा कम उम्र की लड़कियों को निकाह के लिए जबरन घरों से उठा ले जाने की खबरें भी सोशल मीडिया पर आम हैं। इसलिए इस मानसिकता के बर्बर लड़ाकों के राज में अफगान महिलाओं को अपनी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा की चिंता सताना स्वाभाविक ही है। हेरात के विरोध प्रदर्शन के पीछे दरअसल वही चिंता झलकी थी। प्रदर्शन में शामिल मरियम एब्राम का कहना था कि टेलीविजन पर तो तालिबान नेता खूब बड़ी बड़ी बातें बोल रहे थे, लेकिन असल में तो वे अपने राज में मनमानी ही कर रहे हैं। वे सरेआम महिलाओं को पीटते देखे गए हैं। '

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का यह भी कहना था कि वे फिर से बुर्का पहनने को तैयार हैं, लेकिन शर्त यह है कि उनकी बेटियों को तालिबान स्कूल जाने दें। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सुरक्षा और अधिकारों की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की।

उल्लेखनीय है तालिबान ने पिछली बार की सरकार में महिलाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के दरवाजे बंद कर दिए थे। लेकिन अब उसने फिर से अपने कब्जे वाले इलाकों में पुराने नियम लागू करने शुरू कर दिए हैं। महिलाओं के लिए बुर्का पहनना जरूरी कर दिया गया है। वे बिना किसी पुरुष साथी के घर से बाहर नहीं निकल सकती हैं।

पिछले 20 साल के दौरान आजादी और लोकतंत्र को देख चुकीं इन महिलाओं ने यह प्रदर्शन प्राचीन सिल्क रोड सिटी में किया था, जो ईरान की सीमा से सटी है।