इमरान ने गिलानी के लिए बहाए 'आंसू'

    दिनांक 03-सितंबर-2021   
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 इमरान और गिलानी (फाइल चित्र)
पाकिस्तान गिलानी का अघोषित आका जैसा माना जाता था, क्योंकि उनके बयान और काम पाकिस्तान की मंशा की पूर्ति करने वाले ही होते थे
पाकिस्तान के नेता अपनी हरकतों से बार-बार अपनी अपरिपक्वता और भारत के विरुद्ध नफरती सोच से खुद ही परदा उठाते रहते हैं। अब भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य में अपनी कट्टर मजहबी सोच के बूते अलगाववाद को जिंदगीभर हवा देते रहे अली शाह गिलानी के मरने पर प्रधानमंत्री इमरान खान का 'दुख' जताना साफ करता है कि गिलानी कितने उनके 'अपने' थे। इमरान ने गिलानी के मरने पर ट्वीट किया, 'सैयद अली गिलानी के मरने के बारे में जानकर बहुत अफसोस हुआ। उन्होंने अपने लोगों और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए जीवन भर संघर्ष किया।'
कश्मीर घाटी में तहरीक-ए-हुर्रियत के संस्थापक सैयद अली शाह गिलानी का 1 सितम्बर को श्रीनगर में 91 वर्ष की आयु में इंतकाल हुआ था। उनका एकमात्र एजेंडा था कश्मीर में भारत विरोधी भावनाएं भड़काए रखना और पत्थरबाजों की फौज को जब—तब उकसाकर घाटी को अस्थिर बनाना। पाकिस्तान उनका अघोषित आका जैसा माना जाता था क्योंकि उनके बयान और काम पाकिस्तान की मंशा की पूर्ति करने वाले ही होते थे। भारत के कई सेकुलर और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने वाले नेताओं ने अफसोस जताया तो उधर पड़ोसी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी 'आंसू' बहाए।
इमरान को इतना 'अफसोस' हुआ कि गिलानी के मरने पर 'शोक' में एक दिन के लिए पाकिस्तान का झंडा आधा झुकाने का फरमान दे दिया। इस मौके पर भारत के विरुद्ध भड़ास निकालते हुए पाकिस्तान फौज की कठपुतली कहे जाने वाले प्रधानमंत्री इमरान ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘हम पाकिस्तान में उनके साहसी संघर्ष को सलाम करते हैं।’ इमरान को इतना 'अफसोस' हुआ कि गिलानी के मरने पर 'शोक' में एक दिन के लिए पाकिस्तान का झंडा आधा झुकाने का फरमान दे दिया। इस मौके पर भारत के विरुद्ध भड़ास निकालते हुए पाकिस्तान फौज की कठपुतली कहे जाने वाले प्रधानमंत्री इमरान ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘हम पाकिस्तान में उनके साहसी संघर्ष को सलाम करते हैं।’
उधर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ट्वीट किया, ‘पाकिस्तान कश्मीर की आजादी के आंदोलन की मशाल को थामने वाले सैयद अली शाह गिलानी के जाने पर शोक व्यक्त करता है। भारतीय कब्जे की नजरबंदी में रहते हुए शाह साहब ने अंत तक कश्मीरियों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी...’।