नेपाल ने पहली बार माना, चीन कब्जा रहा उसके इलाके, होगी उच्च स्तरीय जांच

    दिनांक 03-सितंबर-2021   
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कैबिनेट बैठक में हिमालयी जिले हुमला को लेकर चीन के साथ सीमा पर विवाद की गहराई से जांच करने का फैसला लिया गया। इस के साथ ही इस काम के लिए एक समिति का गठन किया गया है
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नेपाल के सीमांत क्षेत्रों में चीन के जबरन कब्जे के विरुद्ध काठामांडू में प्रदर्शन करते हुए छात्र। प्रकोष्ठ में प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा (फाइल चित्र)
 
आखिरकार नेपाल को यह स्वीकार करना ही पड़ा कि उसका चीन के साथ है सीमा विवाद है। चीन ने उसके कई सीमांत इलाके कब्जाए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने चीनी कब्जे की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने की घोषणा की है।
हाल ही में प्रधानमंत्री देउबा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में हिमालयी जिले हुमला को लेकर चीन के साथ सीमा पर विवाद की गहराई से जांच करने का फैसला लिया गया। इस के साथ ही इस काम के लिए एक समिति का गठन किया गया है। बैठक में हुमला जिले के नामखा गांव की नगर पालिका में लिमी लपचा से हिल्ला तक के इलाके को लेकर ड्रैगन के दावे पर गहन जांच की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि पड़ोसी देश चीन पिछले कुछ सालों से नेपाल के कई सीमांत गांवों में अवैध ढांचे खड़े करके और सीमा पिलर की जगह बदलकर गुपचुप जमीनी हिस्सा कब्जाता आ रहा है। इसके बारे में कई तथ्यात्मक रपट प्रकाशित होती रही हैं, नेपाल में उग्र प्रदर्शन भी हुए, लेकिन यह पहली बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने यह माना है कि चीन के साथ उनका सीमा विवाद है।
सरकार के ताजा निर्णय की जानकारी देते हुए कानून मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की का कहना है कि हुमला जिले के सीमांत इलाके में आ रही दिक्कतों का अध्ययन करने के लिए गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव की देखरेख में सर्वेक्षण विभाग, नेपाल की पुलिस, सशस्त्र पुलिस और सीमा मामलों के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने पिछले साल नेपाली भूमि पर अतिक्रमण किया था। उसने हुमला में नौ इमारतें खड़ी की थीं।
चीन पिछले कुछ सालों से नेपाल के कई सीमांत गांवों में अवैध ढांचे खड़े करके और सीमा पिलर की जगह बदलकर गुपचुप जमीनी हिस्सा कब्जाता आ रहा है। इसके बारे में कई तथ्यात्मक रपट प्रकाशित होती रही हैं, नेपाल में उग्र प्रदर्शन भी हुए, लेकिन यह पहली बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने यह माना है कि चीन के साथ उनका सीमा विवाद है। 
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चीन ने सीमा पर कोई अतिक्रमण नहीं किया है। जबकि कई पुष्ट खबरों के बाद विपक्ष ने भी इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया था। चीन की बनाई अवैध इमारतों और सीमा पिलर की फोटो तक प्रकाशित की गई थीं। इस अतिक्रमण के विरोध में काठमांडू में चीन के दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
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