हरिद्वार में संस्कृत अकादमी और पंडा समाज आमने—सामने, ऑनलाइन अस्थि विसर्जन का कर रहे विरोध

    दिनांक 03-सितंबर-2021   
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पंडा समाज ने संस्कृत अकादमी के सचिव के आदेशों के खिलाफ उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भी नगर मजिस्ट्रेट हरिद्वार के माध्यम से भेजा है। उधर अकादमी का कहना है कि ये सुविधा देश—विदेश से कोरोना काल में यात्रा नहीं कर पाने से पैदा हुई तर्पण विसर्जन की समस्या को देखते हुए दी जा रही है।

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उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा घोषित अस्थि विसर्जन तर्पण योजना का हरिद्वार के पंडा समाज ने भारी विरोध किया है और इस संबंध में राज्यपाल और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी ने अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के अन्य स्रोतों से यह प्रचार किया कि देश—विदेश में हिन्दू समाज के जो लोग रहते हैं। वह अपने परिजनों की मृत्यु होने पर नहीं आ सकते। ऐसे में वह उनकी अस्थियों को डाक द्वारा भेज सकते हैं। अकादमी ऐसी अस्थियों को पूरे विधि—विधान से गंगा में प्रवाहित करेगी और उसकी ऑनलाइन प्रसारण की सुविधा भी देगी।
अकादमी की इस योजना का पंडा समाज ने भारी विरोध किया है। समाज ने ये दलील दी है कि बेशक दुनिया डिजिटल हो गयी है, लेकिन बहुत से संस्कारों को डिजिटल नहीं किया जा सकता। पंडा समाज के प्रतिनिधि आविक्षित रमन कहते हैं कि हिन्दू समाज की अंतिम कर्मकांडों से ही पंडा समाज तीर्थ पुरोहित समाज के घर के चूल्हे जलते हैं। गंगा से उन्हें और उनके पूर्वजों को रोजी—रोटी हासिल होती आई है। सनातन धर्म के प्रत्येक हिन्दू के पूर्वजों के दस्तावेज हम पंडों ने संभाल के रखे हैं। इन सब को संस्कृत अकादमी के सचिव खत्म कर देना चाहते हैं।
पंडा समाज ने संस्कृत अकादमी के सचिव के आदेशों के खिलाफ उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भी नगर मजिस्ट्रेट हरिद्वार के माध्यम से भेजा है। उधर अकादमी का कहना है कि ये सुविधा देश—विदेश से कोरोना काल में यात्रा नहीं कर पाने से पैदा हुई तर्पण विसर्जन की समस्या को देखते हुए दी जा रही है।