''जनजातियों के साथ जानवर जैसा व्यवहार कर रही है झारखंड सरकार''

    दिनांक 04-सितंबर-2021   
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झारखंड उच्च न्यायालय ने कथित तौर पर भूख से हुई एक मौत के मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर टिप्पणी की है कि वह जनजातियों के साथ जानवर जैसा व्यवहार कर रही है।
झारखंड में इस समय झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल की साझा सरकार है। मुख्यमंत्री हैं झामुमो के वरिष्ठ नेता हेमंत सोरेन। वे खुद जनजाति हैं और वे दावा करते हैं कि उनकी पार्टी ही जनजातियों के हितों को सुरक्षित रख सकती है। इसके बावजूद झारखंड में जनजातियों का यह हाल है कि लोग अन्न के बिना भूखे मर रहे हैं, जबकि ऐसे लोगों के लिए केंद्र सरकार मु्फ्त में अनाज उपलब्ध कराती है। राज्य सरकारों को केवल इनके वितरण की व्यवस्था करनी होती है, लेकिन झारखंड सरकार अनाज का वितरण भी ठीक से नहीं करा पा रही है। इसका नतीजा गरीबों को उठाना पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि 2020 के मार्च महीने में बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के करमा गांव के भूखल घासी की मौत हो गई थी। इसके बाद छह मई को उनके 20 वर्षीय पुत्र नितेश घासी और 2 सितंबर को 12 वर्षीया बेटी राखी कुमारी का निधन हो गया था। छह महीने के अंदर एक ही घर के तीन लोगों की हुई मौत से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया था। उस समय कहा गया था कि इन सभी की मौत भूख से हुई थी। इसके बाद तो यह मामला बहुत गर्म हो गया था। विपक्षी दल भाजपा ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार की कुव्यवस्था से लोगों तक अनाज नहीं पहुंच रहा है और लोग भूख से मर रहे हैं, यह बहुत ही शर्म की बात है। वहीं राज्य सरकार और झामुमो का कहना था कि इन तीनों की मौत भूख से नहीं हुई है। बाद में यह मामला न्यायालय तक पहुंचा।
2 सितंबर की न्यायालय की टिप्पणी के बाद एक बार फिर से भाजपा को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है। कसमार के भाजपा नेता गुणानंद महतो कहते हैं कि यह बहुत ही दु:खद बात है कि जो सरकार अपने को जनजातियों की सरकार कहती है, उसी के राज में जनजाति भूख से मर रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार जनवितरण प्रणाली को ठीक करे, ताकि लोगों को बिना परेशानी अनाज मिल सके और किसी की मौत भूख से न हो।