'चोरी की तो काटेंगे हाथ', तालिबान की काबुल मस्जिद से शरियाई घोषणा

    दिनांक 04-सितंबर-2021   
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 एक महिला को कोड़े मारता एक तालिबानी मुल्ला (फाइल चित्र)
काबुल की मस्जिद से चोरों के हाथ काटे जाने के जिस नए फरमान की मुनादी हुई उससे ज्यादातर जानकारों को इसीलिए कोई बहुत आश्चर्य नहीं हुआ है। इस्लामी शरिया कानून को ही सर्वोपरि रखा जाएगा, इसकी घोषणा तालिबान सरगना पिछले कुछेक दिनों में बहुत बार कर ही चुके हैं
तालिबान अब प्रेस कांफ्रेंस की अपनी 'नरमाई' के खोल से निकलकर असली सूरत में आता जा रहा है। उसने काबुल की मस्जिद से घोषणा की है कि जिसने की चोरी, उसके कटे हाथ। तालिबान ने आमो—खास के बीच मुनादी कर दी है शरिया के हिसाब से बर्ताव करने की। चोरी करने में जो शामिल मिला, उसके हाथ शरीर से अलग कर दिए जाएंगे। स्थानीय लोगों में दबी जबान में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में अभी और बर्बर फरमान किए जा सकते हैं।
30 अगस्त को अमेरिका का आखिरी विमान उड़ने के बाद, बर्बरता के लिए जाने जाने वाले तालिबान सरगनाओं ने अपने असली रूप में आना शुरू कर दिया है। प्रेस कांफ्रेंस में औरतों को अधिकार देने की बात करने वाले तालिबान अब उस बारे में सवाल तक पूछे जाने पर अट्टहास करने लगे हैं। काबुल की मस्जिद से चोरों के हाथ काटे जाने के जिस नए फरमान की मुनादी हुई उससे ज्यादातर जानकारों को इसीलिए कोई बहुत आश्चर्य नहीं हुआ है। इस्लामी शरिया कानून को ही सर्वोपरि रखा जाएगा, इसकी घोषणा तालिबान सरगना पिछले कुछेक दिनों में बहुत बार कर ही चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि 1966 से 2001 के दौरान अपने पूर्व शासनकाल में भी तालिबान हत्यारों को सार्वजनिक रूप से फांसी देते थे, लुटेरों तथा चोरों के हाथ-पैर काटते थे, मिलावट करने वालों को पत्थर और कोड़े मारते थे, किसी औरत के चरित्र पर 'शक' होने पर उसे सबके सामने कोड़े मारते थे।
1966 से 2001 के दौरान अपने पूर्व शासनकाल में भी तालिबान हत्यारों को सार्वजनिक रूप से फांसी देते थे, लुटेरों तथा चोरों के हाथ-पैर काटते थे, मिलावट करने वालों को पत्थर और कोड़े मारते थे, किसी औरत के चरित्र पर 'शक' होने पर उसे सबके सामने कोड़े मारते थे।
जैसा पहले बताया, अफगानिस्तान में तालिबान का आतंक रोज बढ़ता जा रहा है। वे मासूमों को मार रहे हैं, 15 से 45 के बीच की महिलाओं को जबरन उठा रहे हैं, पश्चिमी लिबास पहनने वालों को सरेआम पीट रहे हैं। महिलाओं की साज-सज्जा करने वालों पर भी उनकी तिरछी नजर है। तालिबानी हत्यारे निर्दोष नागरिकों को जबरन घरों से बाहर लाकर मार रहे हैं। महिलाएं फिर से बुर्के में ढक गई हैं। बुर्के बेचने वालों का बाजार आसमान पर है।