कृषि में हरियाणा ने पंजाब को पीछे छोड़ा

    दिनांक 04-सितंबर-2021   
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कृषि क्षेत्र में हरियाणा कभी पंजाब से पिछड़ा हुआ था, लेकिन अब इसने अपने पड़ोसी राज्‍य को काफी पीछे छोड़ दिया है। चाहे वह चीनी मिल का मामला हो, न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य, मंडी व्‍यवस्‍था, फसल विविधता या बीमा, हर मामले में हरियाणा अब पंजाब से आगे निकल गया है।
हरियाणा ने कृषि क्षेत्र में पड़ोसी राज्‍य पंजाब को पीछे छोड़ दिया है। हरियाणा सरकार का दावा है कि हरियाणा के मुकाबले पंजाब का कृषि विकास दर मात्र एक तिहाई है। यानी हरियाणा का कृषि विकास दर 6.3 प्रतिशत है, जबकि पंजाब का 2.1 प्रतिशत ही है। यही नहीं, हरियाणा में मनोहर लाल की अगुवाई वाली भाजपा सरकार ने गन्‍ना किसानों के लिए 11 चीनी मिलें लगाई हैं, जबकि पंजाब में कुल 15 चीनी मिलें हैं। इनमें 9 मिलें ही चालू हैं, जबकि 6 बंद हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में राज्‍य की कृषि नीतियों की तुलना चार्ट में कहा गया है, “हरियाणा अपने किसानों को फसलों का मूल्य देने और उन्‍हें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने के मामले में अपने 'बड़े भाई' पंजाब से बहुत आगे है। हरियाणा में गेहूं, जौ, चना, सूरजमुखी, सरसों, धान, मूंग, मक्का, बाजरा, कपास और मूंगफली सहित 11 फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाती हैं, जबकि पंजाब में केवल तीन फसलें गेहूं, धान और सूरजमुखी ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी गईं।"
हरियाणा का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 44,212 वर्ग किलोमीटर है, जबकि पंजाब 50,362 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसी तरह, हरियाणा में 37.41 लाख हेक्टेयर और पंजाब में 42 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। हरियाणा की ओर से यह भी दावा किया गया है कि हरियाणा में 21 प्रकार के फलों और सब्जियों का मूल्य आरक्षित रखने के लिए शुरू की गई भावांतर भरपाई योजना की चर्चा पूरे देश के किसानों के बीच हो रही है। वहीं, पंजाब में भावांतर भरपाई योजना जैसी कोई व्‍यवस्‍था नहीं है।
हरियाणा सरकार ने राज्य की 81 मंडियों को ई-नाम पोर्टल से जोड़ा है। इससे उन किसानों को फायदा होगा, मांग और अच्छी कीमतों के लिए अंतरराज्यीय स्तर पर अपनी फसल बेचना चाहते हैं। वहीं, पंजाब की केवल 37 मंडियों को ही ई-नाम पोर्टल से जोड़ा गया है। इसी तरह, पिछले कुछ वर्षों के दौरान किसानों में जागरूकता फैलाकर राज्य में 76 जल और मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जबकि पंजाब में ऐसी केवल 61 प्रयोगशालाएं शुरू की गई हैं। हरियाणा संभवत: देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां मंडियों में जाने वाले किसानों और वहां काम करने वाले आढ़तियों को 10-10 लाख रुपये का बीमा दिया जाता है, जबकि पंजाब में ऐसी कोई योजना नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 17 लाख किसानों को फसल बीमा के तौर पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा, 34 लाख से अधिक किसानों को अन्य नुकसान के मुआवजे के एवज में 7,000 करोड़ रुपये की राशि भी दी गई, जबकि पंजाब के किसानों के लिए वहां की सरकार ने कोई फसल-बीमा योजना शुरू नहीं की है।