अब दूध के नाम पर नहीं बिक सकेंगे वानस्पतिक

    दिनांक 04-सितंबर-2021   
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पशु दूध के विकल्प के रूप में वानस्पतिक दूध का बाजार बनाने के लिए भारतीय दूध कंपनियों के विरुद्ध षड्यंत्र रचने में जुटी वैदेशिक संस्थाओं का मंसूबा विफल हो गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने साफ कहा है कि वानस्पतिक पेय उत्पाद अपने नाम में दूध या डेयरी क्षेत्र में प्रचलित अन्य शब्दों को नहीं जोड़ सकते। इसके लिए ई-कॉमर्स कंपनियों को ऐसे उत्पादों को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने को कहा गया है।
भारत के खाद्य नियंत्रक, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने पश्चिमी देशों की कंपनियों और पेटा के षड्यंत्र को पलीता लगा दिया है। प्राधिकरण ने वानस्पतिक पेय को दुग्ध वर्ग में रखे जाने के विरोध में निर्णय दिया है। एफएसएसएआई ने अपने ताजा आदेश में स्पष्ट कहा है कि वानस्पतिक पेय उत्पाद स्वयं को दूध नहीं कह सकते।
पेटा ने बनाया था अमूल पर दबाव
विदेशी पेय उत्पादों के समर्थन में पशु अधिकार संरक्षण के प्रत्यक्ष उद्देश्य के अंतरराष्ट्रीय एनजीओ पेटा ने भारतीय दुग्ध सहकारी संगठन अमूल को पत्र लिख कर पशु आधारित दूध के स्थान पर वानस्पतिक ‘दुग्ध’ पेय के क्षेत्र में उतरने की सलाह दी थी। पेटा उससे पहले से अमूल के विरुद्ध विभिन्न कार्रवाइयां करती आ रही थी जिसका विरोध अमूल दमदारी से कर रही थी।
दरअसल दुग्ध उत्पादन में भारत दुनिया में शीर्ष स्थान पर है। ऐसे में दूध के विकल्प के तौर पर पश्चिमी देशों की कंपनियों ने संयंत्रों के जरिए वानस्पतिक पेय का निर्माण करना प्रारंभ किया। इस तकनीक में विदेशी कंपनियां आगे हैं। परंतु भारत में दूध उत्पादन पर्याप्त मात्रा में होने से उनका बाजार नहीं बन पा रहा था। ऐसे में पेटा ने गायों से दूध निकालने की भारतीय परंपरा को पशुओं पर अत्याचार से जोड़ कर पश्चिमी कंपनियों का हित साधना प्रारंभ किया।
षड्यंत्र हुआ विफल
परंतु एपएसएसएआई के ताजा आदेश से पेटा का यह षड्यंत्र विफल हो गया है। इस आदेश के बाद सोया मिल्क, बादाम मिल्क या ओट मिल्क बेचने वाले ब्रांड्स को अपने उत्पादों से मिल्क शब्दहटाना पड़ेगा। साथ ही ई-कॉमर्स कंपनियों से कहा गया है कि वे तत्काल प्रभाव से ऐसे उत्पादों को अपने पोर्टल से हटा लें जो वानस्पतिक होने के बावजूद अपने नाम के साथ मिल्क या डेयरी के अन्य शब्दों का उपयोग करते हैं।
यह मिस ब्रांडिंग है
आदेश के अनुसार मिल्क या डेयरी के अन्य उत्पादों के नाम का उपयोग केवल उन उत्पादों के लिए होगा, जो पशुओं से आते हों। अगर वनस्पतियों से आने वाले उत्पादों के लिए मिल्क या दूध शब्द का उपयोग होने लगे तो ये मिस ब्रांडिंग का मामला होगा। ई-कॉमर्स कंपनियों को आदेश दिए गए हैं कि मिल्क लेबल के साथ वानस्पतिक उत्पादों को न बेचा जाए। प्राधिकरण ने राज्यों के खाद्य आयुक्तों, खाद्य व्यवसाय संचालकों और ई-कॉमर्स कंपनियों को ऐसे उत्पादों की लेबलिंग की जांच करने का निर्देश दिया है। ई-कॉमर्स कंपनियों से कहा गया है कि वे भविष्य में भी मिल्क या दूध लेबल के साथ वानस्पतिक उत्पादों को अपने प्लेटफॉर्म से न बेचें।