संस्कृत भाषा में बनी लघु फिल्मों का प्रदर्शन

    दिनांक 04-सितंबर-2021   
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उत्सव में शामिल देशभर के संस्कृत साधक 
गत दिनों नासिक में लघु चित्रपट उत्सव आयोजित हुआ। इसमें संस्कृत भाषा में बनी 10 फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।
संस्कृत भाषा को जन-जन के बीच बोलचाल की भाषा बनाने के लिए संस्कृत भारती के प्रयास अब असर दिखाने लगे हैं। देश के कई गांवों में बड़ी संख्या में लोग संस्कृत को बोलचाल की भाषा बना चुके हैं। वहीं अब संस्कृत पर फिल्में भी बनाई जा रही हैं। हाल ही में संस्कृत भारती द्वारा संस्कृत भाषा सप्ताह का आयोजन किया गया। इस क्रम में देशभर में संस्कृत भाषा के प्रचार—प्रसार के लिए रोचक कार्यक्रम किए गए। इनमें निबंध लेखन, भाषण कला, प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम और संगोष्ठियों में युवाओं ने विशेष दिलचस्पी दिखाई। इसी क्रम में महाराष्ट्र के नासिक में संस्कृत भाषा में बनी लघु फिल्मों को प्रदर्शित भी किया गया। इस लघु चित्रपट उत्सव में दो दर्जन से अधिक फिल्में प्रदर्शित की गईं। संस्कृत भाषा में बनी इन फिल्मों में समाज के अलग-अलग मुद्दों को बड़े ही सुंदर तरीके से दिखाया गया है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध मराठी अभिनेता राहुल सोलापुरकर उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, "संस्कृत भाषा आधुनिक और आकर्षक पद्धति से सभी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। उसके लिए शॉर्ट फिल्म फेस्टिव्हल (लघुचित्रपट उत्सव) जैसे उपक्रम लाभदायक होंगे। देश के विविध भागों से तरुण इस उपक्रम में सहभागी हुए, यह संस्कृत भाषा के भाग्योदय का लक्षण है।" संस्कृत भारती के अ.भा प्रचार प्रमुख श्री शिरीष भेडसगांवकर ने कहा, "संस्कृत आम बोलचाल के साथ मनोरंजन की भाषा दीर्घकाल से है। इसलिए उत्तम नाटक संस्कृत में लिखे गए। आधुनिक संगणक (कम्प्यूटर) युग में नए तंत्रज्ञान का उपयोग करके यह उत्सव दुनिया में सर्वदूर प्रसारित हो रहा है। संस्कृत भाषा को लोकप्रिय करने का यह आहृवान आज के युवकों को स्वीकारना चाहिए।"
घुमन्तू जातियों पर बनी फिल्म
इन सभी लघु चलचित्रों में आज की समस्याएं प्रदर्शित की गई हैं। घुमन्तू जाति की समस्याओं, कोरोना काल में पीड़ित लोगों के प्रश्न, रोजगार विहीन तरुणों के प्रश्न ऐसी विविध समस्याएं इन लघु चलचित्रों में दिखाई गई हैं। फिल्मों में सरल और सुगम संस्कृत भाषा का प्रयोग किया है। अत: कोई भी व्यक्ति सहज ही फिल्म के साथ आगे बढ़ता चला जाता है।
 उत्सव में जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात जैसे 11 राज्यों से 29 लघुपट (शॉर्ट फिल्म) सम्मिलित हुए। इनमें 10 लघुपटों का प्रदर्शन किया गया। कोरोना के नियमों का पालन करते हुए 30 व्यक्तियों की उपस्थिति में यह फिल्म उत्सव सम्पन्न हुआ।