म्यांमार में कट्टर मजहबी तत्वों के विरुद्ध बौद्ध एकजुटता के प्रतीक बौद्ध भिक्षु आशिन विराथु हुए रिहा

    दिनांक 07-सितंबर-2021   
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विराथु पर तत्कालीन नागरिक सरकार के विरुद्ध ‘घृणा या अवमानना’ और ‘असंतोष भड़काने’ के आरोप लगे थे। कल म्यांमार सेना के प्रवक्ता, मेजर जनरल ज़ॉ मिन टुन ने बताया कि उन्हें रिहा कर दिया गया है
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बौद्ध भिक्षु आशिन विराथु (प्रकोष्ठ में) के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए म्यांमार के बौद्ध भिक्षु (फाइल चित्र) 
बौद्ध भिक्षु आशिन विराथु म्यांमार ही नहीं, दुनियाभर के मजहबी उन्मादियों में खौफ पैदा करने वाला नाम है। ये वही बौद्ध भिक्षु हैं जिन्होंने कट्टर इस्लामी तत्वों के विरुद्ध लोगों से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया था। आशिन विराथु को वहां की सम्मानित नेता आंग सान सू की के विरुद्ध कथित अपमानजनक बात कहने के बाद, उन पर देशद्रोह के आरोप लगे थे। उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया था। गत 6 सितम्बर को बर्मा के सैन्य तंत्र ने उन्हें जेल से रिहा कर दिया।
महीनों गायब रहे भिक्षु ने आखिरकार गत वर्ष नवंबर में खुद को कानून के हवाले कर दिया था। विराथु पर तत्कालीन नागरिक सरकार के विरुद्ध ‘घृणा या अवमानना’ और ‘असंतोष भड़काने’ के आरोप लगे थे। कल म्यांमार सेना के प्रवक्ता, मेजर जनरल ज़ॉ मिन टुन ने कहा कि मामला बंद कर देने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया है। हालांकि रिहाई के बाद विराथु एक सैन्य अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किए गए हैं, लेकिन रोग के बारे में खुलासा नहीं किया गया है।
2013 में टाइम पत्रिका ने विराथु के लिए अपने आवरण पर 'बौद्ध आतंक का चेहरा' शीर्षक दिया था। तब पत्रिका ने भिक्षु को उद्धृत करते हुए छापा था, “(मुस्लिम) बहुत तेजी से संख्या बढ़ा रहे हैं, वे हमारी महिलाओं को जाल में फंसा कर गायब कर रहे हैं, उनका बलात्कार कर रहे हैं। वे हमारे देश पर कब्जा करना चाहते हैं, लेकिन मैंने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। हमें म्यांमार को बौद्ध ही रखना होगा।”
2013 में टाइम पत्रिका ने विराथु के लिए अपने आवरण पर 'बौद्ध आतंक का चेहरा' शीर्षक दिया था। तब पत्रिका ने भिक्षु को उद्धृत करते हुए छापा था, “(मुस्लिम) बहुत तेजी से संख्या बढ़ा रहे हैं, वे हमारी महिलाओं को जाल में फंसा कर गायब कर रहे हैं, उनका बलात्कार कर रहे हैं। वे हमारे देश पर कब्जा करना चाहते हैं, लेकिन मैंने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। हमें म्यांमार को बौद्ध ही रखना होगा।” विराथु ने तब टाइम पत्रिका पर ‘गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन’ का आरोप लगाया था। 2013 में ही एक दूसरे साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, “मुस्लिम तेजी से प्रजनन करते हैं, वे बहुत हिंसक हैं। वे भले ही म्यांमार में अल्पसंख्यक हैं, लेकिन उनके द्वारा डाला जा रहा बोझ हमें भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने अपने यहां मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार के लिए आवाज उठाई थी। बौद्ध महिलाओं और मुस्लिम पुरुषों के बीच शादी पर रोक लगाने की मांग की थी।
आशिन विराथु को उनके वक्तव्यों के कारण साल 2003 में भी गिरफ्तार किया गया था। तब उन्हें 9 साल जेल में बिताने पड़े थे। इसके बावजूद, देश में उनकी अपनी साख बनी रही थी। यह बात भी सही है कि म्यांमार में बौद्धों में लोग नेताओं से ज्यादा भरोसा करते हैं। सेना के जनरल भी कट्टरपंथी रोहिंग्या मुसलमानों के आतंक के विरुद्ध उठ खड़े होने वाले बौद्ध भिक्षु विराथु का समर्थन करने लगे थे।