लड़कियों को पढ़ाएं सिर्फ औरतें या बूढ़े, कॉलेजों-विश्वविद्यालयों के लिए तालिबान का नया फरमान

    दिनांक 07-सितंबर-2021   
Total Views |
तालिबान के नए जारी हुए फरमान के अनुसार, लड़कियों को लड़कों से अलग कमरे में पढ़ाया जाए, उन्हें महिला शिक्षिकाएं ही पढ़ाएं और अगर ऐसा न हो सके तो कोई वृद्ध पुरुष शिक्षक पढ़ाए
tio1_1  H x W:  
काबुल के एक विश्वविद्यालय में कक्षा के बीच डले पर्दे के आप-पार बैठे छात्र और छात्राएं 
काबुल विश्वविद्यालय में कक्षाओं में बीच में पर्दे पड़ गए हैं जिसके एक तरफ बैठते हैं छात्र तो दूसरी तरफ छात्राएं। तालिबान के राज में अब कालेजों में पढ़ाई इसी ढर्रे पर चलेगी। विश्वविद्यालय की सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर में यह स्थिति साफ दिखाई देती है। लड़कियों के लिए भी अब पूरी तरह नकाब और बुर्के में ढका रहना जरूरी कर दिया गया है।
तालिबान के नए जारी हुए फरमान हैं कि, लड़कियों को लड़कों से अलग कमरे में पढ़ाया जाए, उन्हें महिला शिक्षिकाएं ही पढ़ाएं और अगर ऐसा न हो सके तो कोई वृद्ध पुरुष शिक्षक पढ़ाए। अगर लड़कों और लड़कियों को अलग कमरों में बैठाना संभव न हो तो एक ही कमरे में बैठाया जा सकता है, बशर्ते बीच में पर्दा पड़ा हो।
इसी की एक फोटो सोशल मीडिया पर खूब साझा हो रही है। इसमें लड़के और लड़कियों के बीच पर्दा पड़ा दिख रहा है। तालिबान लड़के-लड़कियों को अलग-अलग बैठाकर पढ़ाने के नित नए फरमान जारी कर रहे हैं। काबुल विश्वविद्यालय की उस तस्वीर को देखकर दुनिया भर की कालेज जाने वाली छात्राएं हैरान हैं। वे इसकी कल्पना तक करके दुखी हो रही हैं कि अफगानिस्तान में कालेजों में ऐसे कैसे पढ़ाई हो सकेगी और छात्र खुले मन से कैसे पढ़ सकेंगे! नाम न बताने की शर्त पर काबुल की एक छात्रा ने बताया कि "पर्दे लगना गले नहीं उतर रहा है। कक्षा में इसे देखकर बहुत खराब लग रहा है। हालांकि देश में तालिबान के कब्जे को तीन हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं। आम जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। कालेज और विश्वविद्यालय तो खुल गए हैं लेकिन वहां का माहौल पढ़ाई जैसा नहीं लग रहा है।
अफगानिस्तान के मुख्य शहरों जैसे काबुल, हेरात और कंधार के विश्वविद्यालयों में छात्राओं के कमरे अलग किए जा रहे हैं। उन्हें अलग पढ़ाया जा रहा है। बहुत सी जगह तो उन्हें परिसर से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है। लड़कियों के लिए हिजाब पहनना जरूरी है तो उनके जाने के लिए रास्ते भी अलग होने जरूरी कर दिए गए हैं। कुछ समाचार एजेंसियों की मानें तो विदेशों की अनेक संस्थाएं अफगानिस्तान में तालिबान राज में शिक्षा के ऐसे हालात पर नजर रखे हुए हैं। उनके अनुसार, महिला अधिकारों को लेकर वे चिंतित हैं। पिछले राज में भी तालिबान ने महिलाओं के पढ़ने और नौकरी करने पर कड़ी पाबंदियां लगा दी थीं।
रायटर्स के अनुसार, अफगानिस्तान के मुख्य शहरों जैसे काबुल, हेरात और कंधार के विश्वविद्यालयों में छात्राओं के कमरे अलग किए जा रहे हैं। उन्हें अलग पढ़ाया जा रहा है। बहुत सी जगह तो उन्हें परिसर से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है। लड़कियों के लिए हिजाब पहनना जरूरी है तो उनके जाने के लिए रास्ते भी अलग होने जरूरी कर दिए गए हैं। इन सब कदमों के बारे में विश्वविद्यालय का कोई अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
कई कालेजों में अजीब सी स्थिति बनी है। एक घंटे की कक्षा को बांटकर आधे घंटे लड़कों को तो आधे घंटे लड़कियों को पढ़ाया जा रहा है। हेरात विश्वविद्यालय में भी ऐसे ही हाल हैं। हालांकि पढ़ने आने वाले छात्रों की संख्या बहुत ही कम है। एक चौथाई छात्र-छात्राएं भी कक्षाओं के लिए नहीं आ रहे हैं।