अफगानिस्तान में महिलाओं ने निकाले दो मोर्चे, एक में हुई अधिकारों की मांग तो दूसरे में तालिबान का गुणगान

    दिनांक 07-सितंबर-2021   
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कुछ पत्रकारों ने जब महिला अधिकार रैली के चित्र लेने की कोशिश की और वे महिलाओं की टिप्पणी लेने के लिए आगे बढ़े तो बंदूकधारी तालिबान ने बदूंक दिखाकर उन्हें घुड़का दिया और दूर कर दिया698_1  H x W: 0 
मजार-ए-शरीफ की रैली में शामिल महिलाओं ने हाथों में नारे लिखे पोस्टर लिए हुए थे 
6 सितम्बर को अफगानिस्तान में दो अलग अलग जगहों पर महिलाओं ने दो रैलियां निकालींं। एक रैली मजार-ए-शरीफ में निकली जिसमें शामिल दो दर्जन के करीब महिलाओं ने नई सरकार के तहत महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित रखने की मांग की, उन्होंने शिक्षा और रोजगार के साथ ही मौलिक अधिकारों की भी गारंटी देने की मांग उठाई। वे अपने हकों के लिए आवाज बुलंद करते हुए मुख्य मार्ग से गुजरीं। दिलचस्प बात यह है कि रैली को सड़क पर खड़े कई लोगों ने देखा लेकिन आसपास मंडराते बंदूकधारी तालिबान के डर से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उनके प्रति अपना समर्थन जता सके। कुछ पत्रकारों ने जब रैली के चित्र लेने की कोशिश की और वे महिलाओं की टिप्पणी लेने के लिए आगे बढ़े तो बंदूकधारी तालिबान ने बदूंक दिखाकर उन्हें घुड़का दिया और दूर कर दिया। तालिबान नहीं चाहते थे कि अधिकारों की मांग करती उन महिलाओं की बात मीडिया कहीं छापे यानी एक तरह से पाबंदी लगा दी गई। यह कृत्य उन्हीं तालिबान द्वारा किया जा रहा है जो प्रेस कांफ्रेंस में महिलाओं को सरकार में बराबरी का हक देने की बात करते रहे हैं, जिनके कसीदे काढ़ने में भारत में मुनव्वर राणा, जावेद अख्तर, आरिफा खानम और साईमा जैसे सेकुलर अघा नहीं रहे हैं। और तो और, तालिबान की हिमाकत ऐसी कि उन 45—50 महिलाओं को भी तितर—बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। लेकिन सोशल मीडिया पर इस रैली की तस्वीरें वायरल हुईं, वीडियो में तालिबानी लड़ाका मीडिया वालों को रैली से दूर धकियाता साफ दिखता है।
दो दर्जन के करीब महिलाओं ने नई सरकार के तहत महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित रखने की मांग की, उन्होंने शिक्षा और रोजगार के साथ ही मौलिक अधिकारों की भी गारंटी देने की मांग उठाई। दिलचस्प बात यह है कि रैली को सड़क पर खड़े कई लोगों ने देखा, लेकिन आसपास मंडराते बंदूकधारी तालिबान के डर से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उनके प्रति अपना समर्थन जता सके। 6981_1  H x W:  
रैली की जानकारी देता एक पत्रकार नसीब खान का ट्वीट 
कल ही इसके प्रतिरोध में अफगानिस्तान में एक रैली और निकली। ये रैली कुछ कट्टरपंथी तालिबानी सोच का समर्थन करने वाली महिलाओं की थी। वे नारे लगा रही थीं 'अल्लाहु-अकबर, नारा-ए-तकबीर'। इतना ही नहीं, वे अमेरीका वालों और उनके नौकरों को मारने की मांग कर रही थीं। ये तालिबान राज की कट्टरपंथी खातूनें थीं। सब की सब बुर्का पहने। साफ था कि उन्हें मजार—ए—शरीफ में अधिकारों की मांग करने वाली रैली के प्रतिरोध में सड़क पर उतारा गया था। इन महिलाओं ने खुलकर तालिबान के समर्थन में नारेबाजी की। नारेबाजी कर रही थीं और तेज-तेज अल्लाह-हू-अकबर, नारा-ए-तकबीर चिल्ला रही थीं। इनकी मांग थी कि अमेरिका और उनके नौकरों को मौत की सजा दी जाए।
उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से महिलाओं पर कट्टरपंथी सख्ती बढ़ गई है। कुछ ही दिन हुए जब 8 महीने की गर्भवती एक महिला पुलिसकर्मी को उसके पति और बच्चों के सामने उसके घर में घुस कर गोली मारी गई थी। दी गई, वो भी उसके शौहर और बच्चों के सामने।