फिर ड्रेगन ने बदला तिब्बत-लद्दाख का कमांडर, राष्ट्रपति जिनपिंग की मंशा में खोट के संकेत!

    दिनांक 08-सितंबर-2021   
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पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की पश्चिमी थियेटर कमान का मुख्यालय है चीन द्वारा 1959 में कब्जाए तिब्बत में। चीनी सेना की इसी कमान के तहत भारत का लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक का इलाका आता है
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चीन की पीएलए के जवान। (प्रकोष्ठ में) जनरल वांग हेज्यांग  (फाइल चित्र)

चीन के राष्ट्रपति ने फिर से एक पैंतरा चला है पश्चिमी कमान में। उन्होंने फिर से वहां अपनी सेना की कमान नए कमांडर के हाथ सौंपी है। और ऐसा पिछले साल जून में गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों से चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प में चीनियों के मुंह की खाने के बाद से पहली या दूसरी बार नहीं, बल्कि  चौथी बार किया गया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की पश्चिमी कमान का मुख्यालय है चीन द्वारा 1959 में कब्जाए तिब्बत में। चीनी की सेना की इसी कमान के तहत भारत का लद्दाख क्षेत्र से अरुणाचल प्रदेश तक का इलाका आता है जो पूरा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित है। अब चीन की यहां तैनात सेना टुकड़ी के कमांडर बनाए गए हैं जनरल वांग हेज्यांग।

सर्वविदित है कि लद्दाख स्थित भारत-चीन वास्तवकि नियंत्रण रेखा पर चीन दशकों से घुसपैठ के प्रयास करता रहा है, साल के सैकड़ों बार वहां वह सीमा का अतिक्रमण करता रहा है। जून 2020 में भी चीनियों ने ऐसा ही एक प्रयास किया था, लेकिन 'नए भारत' की सेना ने न सिर्फ उसकी वह साजिश विफल की थी, बल्कि चीन की तरह से की गई हिंसा के भारत की तरफ से दिए गए जवाब में अनेक चीनी सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।  

उसके बाद, चीनी सैनिकों ने हालांकि कदम वापस खींचे तो थे लेकिन घुसपैठ और अतिक्रमण की बाद में भी अनेक कोशिशें उनकी ओर से की गई हैं और हर बार भारत की तरफ से कड़े जवाब का सामना करना पड़ा है। इसके बाद पिछले करीब 15 माह में ड्रेगन उस पश्चिमी कमान के तीन कमांडर बदल चुका है। जनरल वांग चौथे कमांडर हैं जो यह कमान संभालने आए हैं। और यह बदलाव ऐसे वक्त किया गया है जब भारत और चीन के बीच तनाव अपने चरम पर है। 

कमांडर बदलने के पीछे एक विचार यह है कि शी जिनपिंग वहां वांग जैसा अनुभवी सैन्य कमांडर इसलिए लाए हैं जिससे चीनी सेना की यह सबसे बड़ी कमान तिब्बत में काम कर चुके अधिकारी के अनुभव से लाभान्वित हो सके।

 चीन के इस कदम को लेकर रक्षा विशेषज्ञों की अलग अलग राय है। एक तरफ यह माना जा रहा है कि चीन उस संवेदनशील क्षेत्र में नए कमांडरों को आजमा कर देख रहा है, जबकि एक विचार यह भी है कि शी जिनपिंग वहां वांग जैसा अनुभवी सैन्य कमांडर इसलिए लाए हैं जिससे चीनी सेना की यह सबसे बड़ी कमान तिब्बत में काम कर चुके अधिकारी के अनुभव से लाभान्वित हो सके। वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक ले. जनरल संजय कुलकर्णी कहते हैं कि करीब 59 साल के जनरल वांग को संभवत: राष्ट्रपति शी बहुत सोच—समझकर ही तिब्बत में मुख्यालय वाली लद्दाख से अरुणाचल तक फैली सबसे बड़ी पश्चिमी कमान के कमांडर के तौर पर लाए हैं। जनरल वांग तिब्बत में काम कर चुके हैं, उन्हें वहां का अनुभव है, वे वहां के लोगों को जानते हैं।
            
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति शी ने गत जुलाई में ही जनरल श्यू क्विल्यांग पश्चिमी कमान का कमांडर बनाया था। अब उनकी नई भूमिका क्या होगी, इस बारे में चर्चाएं उड़नी शुरू हुई हैं कि वे चूंकि राजनीतिक झुकाव वाले रहे हैं तो बहुत संभव है उन्हें पार्टी के पोलित ब्यूरो में जिम्मेदारी दे दी जाए। उनसे पहले इस पद पर दिसंबर 2020 में ही जनरल झांग जुदांग को बैठाया गया था।

चीन की एक समाचार एजेंसी के अनुसार, वहां के केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा सेना के पांच वरिष्ठ अधिकारियों को जनरल के पद पर प्रोन्नत किया गया था। इनमें पश्चिमी कमान के कमांडर वांग हेज्यांग भी शामिल थे।


तिब्बत का अनुभव है जनरल वांग को

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ले. जनरल सेनि संजय कुलकर्णी, वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक
करीब 59 साल के जनरल वांग को संभवत: राष्ट्रपति शी बहुत सोच-समझकर ही तिब्बत में मुख्यालय वाली लद्दाख से अरुणाचल तक फैली सबसे बड़ी पश्चिमी कमान के कमांडर के तौर पर लाए हैं। जनरल वांग तिब्बत में काम कर चुके हैं, उन्हें वहां का अनुभव है, वे वहां के लोगों को जानते हैं।              
राष्ट्रपति शी जिनपिंग कुछ दिन पहले तिब्बत के दौरे पर गए थे। वहां उन्हें पता चला कि तिब्बती चीनी सैन्य अधिकारियों से नाराज हैं। कुछ बड़े अधिकारियों की वहां कथित हत्या भी की गई थी। शी जानते हैं कि जनरल वांग विएतनाम युद्ध के दौरान सेना में जुड़े थे और उन्हें उस युद्ध का खासा अनुभव है। भारत लद्दाख को लेकर नई रणनीति के साथ तैयार दिखता है। इसलिए उन्हें यह भी अंदेशा होगा कि कहीं भारत की ओर से वहां अचानक कोई सैन्य कदम उठाया गया तो उस सूरत में चीनी सेना की कमान एक अनुभवी के हाथों में रहे तो अच्छा रहेगा। वहां चीनी फौज को जोश दिलाने वाला कमांडर होगा। जनरल वांग चीनी सेना पीएलए की इलीट यूनिट में रहे हैं इसलिए कमांडो टुकड़ी के संचालन का भी उन्हें अनुभव है।

यहां इस तथ्य पर भी गौर करना जरूरी है कि जून 2020 में गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों की वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति सामान्य करने को लेकर 12 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कुछ खास नतीजा नहीं निकला है। हॉट स्प्रिंग और देप्सांग क्षेत्रों में तनाव पूर्ववत बना हुआ है।