पाकिस्तानियों ने सर्वे में कहा, तालिबान के राज में बढ़ेगा आतंकवाद, नशे और हथियारों की तस्करी होगी आसमान पर

    दिनांक 09-सितंबर-2021   
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इमरान खान के तालिबान को सुहाते बयानों से उलट, आम पाकिस्तानी नहीं मानते कि तालिबान उनके देश के लिए खुशियों की सौगात बरपा देगा
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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में तालिबानी सरगना अब्दुल गनी बरादर व अन्य के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और आईएसआई प्रमुख ले.जन.फैज हमीद। (प्रकोष्ठ में) प्रधानमंत्री इमरान खान    (फाइल चित्र)

प्रधानमंत्री इमरान खान
भले कितना ही अपने बढ़ाए तालिबान की शान में लफ्फाजी कर रहे हों, लेकिन एक ताजा सर्वे के नतीजे हैरान करने वाली कहानी बयां करते हैं। सर्वे में आधे पाकिस्तानी लोगों ने तालिबान को आफत के परकाले बताया है। उन्होंने कहा है कि बहुत से पाकिस्तानी अफगानिस्तान में तालिबान के चढ़ बैठने से नाराज हैं, जिससे उनके देश को खतरे के आसार बन गए हैं।

इमरान खान के तालिबान को सुहाते बयानों से उलट, आम पाकिस्तानी नहीं मानते कि तालिबान उनके देश के लिए खुशियों की सौगात बरपा देगा। उधर तालिबान के लड़ाके भी पाकिस्तान और चीन को गोद में बिठाए हुए हैं और बीआरसी सहित कई विषयों पर उनको समर्थन देने का फिलहाल लॉलीपॉप थमाए है। कारण? वह जानता है कि उसके काबुल पर चढ़ बैठने में पाकिस्तान की आईएसआई के दिमाग, उसके आतंकी और हथियारों की मदद मिली है। चीन ने कथित पैसा बहाया है।
  
लेकिन पाकिस्तानियों को यह प्रकरण इतनी आसानी से हजम नहीं हो रहा है। उनके मन में अनेक सवाल हैं कि पाकिस्तान के लाख अपना दामन साफ दिखाने के बावजूद आईएसआई के मुखिया का गत दिनों काबुल दौरा क्या संकेत करता है? क्योंकि आईएसआई प्रमुख के दौरे के सिर्फ तीन दिन के अंदर ही अफगानिस्तान में लड़ाकों ने 'कार्यवाहक सरकार' की घोषणा कर दी थी।

सर्वे में शामिल लगभग 50 फीसदी पाकिस्तानियों ने अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने को उचित नहीं माना है। वे कहते हैं कि लड़ाकों की हुकूमत आतंकवाद को हवा देगी। इतना ही नहीं, यह पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था को पलीता लगाएगी, नशे और हथियारों की तस्करी की चांदी कराएगी।

फ्रांस की एक कंपनी 'इप्सोस' ने 26 अगस्त से 2 सितम्बर के बीच पाकिस्तान में एक सर्वे किया तो असलियत सामने आई। उसके नतीजों से पता चला है कि सर्वे में शामिल लगभग 50 फीसदी पाकिस्तानियों ने अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने को उचित नहीं माना है। वे कहते हैं कि लड़ाकों की हुकूमत आतंकवाद को हवा देगी। इतना ही नहीं, यह पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था को पलीता लगाएगी, नशे और हथियारों की तस्करी की चांदी कराएगी। इस सर्वे में यह देखा गया है कि आम पाकिस्तानी तालिबान लड़ाकों के राज के लिए कैसा नजरिया रखते हैं। इस सर्वे में करीब एक हजार लोगों से सवाल किए गए थे। इन्होंने जो जवाब दिए उससे तैयार नतीजा परसों यानी 7 सितंबर को सार्वजनिक किया गया था। सर्वे में हिस्सा लेने वालों में 68 प्रतिशत पुरुष थे और 32 प्रतिशत महिलाएं। इनमें से 15 प्रतिशत की आयु 18-25 के बीच थी, तो 19 प्रतिशत की 26-30 साल, 40 प्रतिशत की 31-40, 18 प्रतिशत की 41-50 साल तथा 7 प्रतिशत की आयु 51-65 साल के बीच है। इनमें से ज्यादातर लगभग 77 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों से थे और सिर्फ 23 प्रतिशत देहाती क्षेत्रों से।

हालांकि इस सर्वे में 21 फीसदी लोग ऐसे भी देखे गए हैं जिनका कहना है कि तालिबान के आने से दोनों मुल्कों में कारोबार बढ़ेगा। 19 प्रतिशत का मानना है कि अफगान से आने वाले शरणार्थियों की इतनी तादाद से पाकिस्तान के लिए मुसीबत खड़ी होगी। वहीं 16 प्रतिशत मानते हैं कि अब अफगानिस्तान से पाकिस्तान में नशे की तस्करी बढ़ेगी। 12 प्रतिशत लोगों का कहना है कि अफगानिस्तान की तालिबानी हुकूमत पाकिस्तान में भी इस्लामवाद को बढ़ावा देने का प्रयास करेगी।