सागर में तेज होता उफान, दक्षिण चीन सागर में अमेरिका के युद्धपोतों के जवाब में चीन ने उतारे लड़ाकू विमान

    दिनांक 09-सितंबर-2021   
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यूएसएस बेनफोल्ड ने 8 सितम्बर को चीन में नानशा कहे जाने जाने वाले स्प्रैटली द्वीप समूह के निकट वाली 'मिसचीफ रीफ' को लांघ दिया है। इसके पीछे उसने वजह नेविगेशन संचालन की आजादी बताई है। उधर बीजिंग ने बयान दिया है कि अमेरिका शांति को सबसे ज्यादा आघात लगाता है
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दक्षिण चीन सागर में यूएसएस बेनफोल्ड

दक्षिण चीन सागर तनाव का केन्द्र बनता जा रहा है और बहुत संभव है कि तालिबान से फुर्सत मिलते ही यहां अमेरिका और चीन में तनातनी चरम पर पहुंच सकती है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार समंदर में अमेरिका ने अपने दो विमानवाहक युद्धपोत उतारे हैं और साथ ही कई लड़ाकू विमान भी तैनात कर दिए हैं। अमेरिका के इस पैंतरे से बौखलाए चीन ने भी अपने बनाए स्प्रैटली द्वीप समूह पर लड़ाकू जेट भेजकर तापमान बढ़ा दिया है। चीन और अमेरिका के बीच इन जंगी पैंतरों से क्षेत्र में तनाव एकदम से बढ़ गया है।

अमेरिकी नौसेना ने अपने जंगी यूएसएस बेनफोल्ड ने 8 सितम्बर को चीन में नानशा कहे जाने जाने वाले स्प्रैटली द्वीप समूह के निकट वाली 'मिसचीफ रीफ' को लांघ दिया है और इसके पीछे वजह बताई कि वह नेविगेशन के संचालन की आजादी बताई है। चीन को इस बात पर भड़कना ही था। बीजिंग ने बयान दिया है कि अमेरिका शांति को सबसे ज्यादा आघात लगाता है।

लेफ्टिनेंट मार्क लैंगफोर्ड का एक बयान जारी हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि 8 सितंबर को यूएसएस बेनफोल्ड (डीडीजी 65) अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत ही स्प्रैटली द्वीप समूह में नौवहन संचालन की आजादी के आधार पर आगे तक गया है। लेफ्टिनेंट मार्क यूएस के 7वें बेड़े के सार्वजनिक मामलों के अधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान समंदर के अधिकारों, आजादी और वैध इस्तेमाल को बनाए रखा गया है।

लेफ्टिनेंट मार्क का कहना है कि सागरीय कन्वेंशन के तहत मिसचीफ रीफ प्राकृतिक रूप से बनी है। इस पर भूमि में बदलाव की कोशिशें, संस्थान तथा ढांचागत निर्माण अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत इसकी विशेषता में बदलाव नहीं करते हैं। साल 2017 में चीन ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए मिसचीफ रीफ के साथ ही स्प्रैटली द्वीप समूह पर अनेक सैन्य संस्थान बना लिए थे। 

उधर चीन स्प्रैटली द्वीप समूह के साथ ही करीब करीब संपूर्ण दक्षिण चीन सागर को अपना बताता है, उस दावा ठोकता आ रहा है। लेकिन दूसरी तरफ, फिलीपींस, विएतनाम, मलेशिया तथा ब्रुनेई सहित चीन के कई समुद्री पड़ोसी देश भी दक्षिण चीन सागर के कई द्वीपों और चट्टानों पर अपने अपने दावे ठोकते रहे हैं। यह 'मिसचीफ रीफ' फिलीपीन्स के तट से करीब 250 किमी दूर मौजूद है। इसी को लेकर अमेरिका और चीन में तलवारें खिंची हुई हैं।

लेफ्टिनेंट मार्क ने आगे कहा कि सागरीय कन्वेंशन के कानून में साफ है कि मिसचीफ रीफ प्राकृतिक रूप से बनी है। इस पर भूमि में बदलाव की कोशिशें, संस्थान तथा ढांचागत निर्माण अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत इसकी विशेषता में बदलाव नहीं करते हैं। साल 2017 में सामने आया था कि चीन ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए मिसचीफ रीफ के साथ ही स्प्रैटली द्वीप समूह पर अनेक सैन्य संस्थान बना लिए हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि चीन अमेरिका के जंगी जहाजों के खतरे की आड़ में दक्षिण चीन सागर का सैन्‍यीकरण कर रहा है। यही वजह है कि वह वूडी द्वीप पर बड़े पैमाने पर लड़ाकू जेट तैनात कर रहा है।

यही वजह है कि अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों के विवादित द्वीपों के पास जाते ही चीन घुड़कियां दिखाने लगता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस 'अपने इलाके में दखल' करार देता है। लेकिन इस बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अफगानिस्तान में उनकी 'कूटनीतिक विजय' से ज्यादा जोश में दिखते हैं। शायद यही वजह है कि बीजिंग ने अमेरिकी युद्धपोतों के इलाके में आने की खबर मिलते ही लड़ाकू जेट तैनात करके उग्रता का प्रदर्शन किया है।