इतिहास

समाज के प्रत्येक क्षेत्र में दिखता है गांधी जी के विचारों का असर

गांधी जी एक काल के नहीं हैं। उनका चिंतन, विचार और व्यवहार 20वीं शताब्दी में हुए, लेकिन उनके नाम से एक पूरा युग जाना जाता है। समाज के प्रत्येक क्षेत्र में गांधी विचार या गांधीवाद का असर देखा जा सकता है। ''संचार के उद्देश्यों की बात की जाए, तो गांधी विश्व के सबसे सफल संचारक थे। अपने इसी गुण के कारण वह देश के अंतिम व्यक्ति तक अपनी बात पहुंचाने में सफल रहे।'' उक्त विचार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने गुरुवार को भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वार

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"हमारे अशोक जी श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन के प्राण थे"

नई दिल्ली स्थित विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) मुख्यालय में श्री अशोक सिंहल जी की जयन्ती के अवसर पर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए विहिप के केन्द्रीय कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार ने कहा है कि हमारे अशोक जी श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन के प्राण थे। उन्होंने सम्पूर्ण हिन्दू समाज को झकझोर कर जगाया, संगठित किया तथा एक मजबूत संघर्ष का नेतृत्व किया।गत 27 सितम्बर को नई दिल्ली स्थित विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) मुख्यालय में श्री अशोक सिंहल जी की जयन्ती के अवसर पर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए विहिप के केन्द्रीय

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पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती (25 सितम्बर) पर विशेष : दीनों पर दया करने वाले दीनदयाल

समाज के अंतिम छोर पर खड़ा व्यक्ति भी एक दिन सुखी और संपन्न जीवन बिताए, इसकी कल्पना दीनदयाल जी ने की थी। यह अच्छी बात है कि आज उनकी इस कल्पना को पूरा करने के लिए कई सरकारें काम कर रही हैं।राष्ट्र का अस्तित्व उसके नागरिकों के जीवन का ध्येयभूत आधार है। जब एक मानव-समुदाय के समक्ष एक व्रत, विचार या आदर्श रहता है एवं वह समुदाय किसी भूमि विशेष को मातृभाव से देखता है तो राष्ट्र कहलाता है। इनमें से एक का भी अभाव रहा तो राष्ट्र नहीं बनेगा।—पं.दीनदयाल उपाध्यायसहृदयता, बुद्धिमता, सक्रियता एवं अध्यवसायी वृत्ति वाले

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बागपत के परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में मौजूद अनोखा शिवलिंग

नितिन निचौड़ियारामजन्मभूमि स्थान अयोध्या में खुदाई में मिला शिवलिंग भी पुरा महादेव मंदिर के शिवलिंग के समान ही है। इससे साफ हो जाता है कि पुरा महोदव मंदिर, उत्तराखंड का महाभारतकालीन शिवलिंग और अयोध्या में निकला शिवलिंग एक ही सभ्यता की देन हैपश्चिमी उत्तर प्रदेश की धरती अपने भीतर कई महत्वपूर्ण रामायण, महाभारत समेत कई सभ्यताओं के अवशेष समाए हुए हैं। बागपत जनपद के सिनौली गांव में सिंधु घाटी सभ्यता के अद्भुत पुरावशेष मिल चुके हैं तो पुरा गांव स्थित परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थित है। इस सिद्

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