साक्षात्कार

आई.एन. बसवे गौडा : ‘किसान बिचौलिया संस्कृति के विरुद्ध’

देश के कृषि परिदृश्य, किसानों की समस्याओं, कृषि संशोधन कानून जैसे विषयों पर भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आई.एन. बसवे गौडा ने पाञ्चजन्य से खुल कर बातचीत की। श्री बसवे गौडा कहते हैं कि बिचौलियों के हटने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी, इसलिए किसान बिचौलियों को हटाने के लिए आने वाले किसी भी कानून के समर्थन में रहेंगे।..

‘किसान हमारे लिए देवतुल्य, उनके हित में होगा काम’

बड़ी पुरानी उक्ति है कि भारत गांवों में बसता है, उन गांवों में जहां मुख्य आजीविका है खेती। हमारे देश की अर्थव्यवस्था का आधार भी खेती-किसानी ही है। लेकिन इसके बावजूद, आजादी के इतने वर्ष बाद तक न खेतों की किसी ने सुध ली थी, न किसानों की। 2014 में केन्द्र में बनी राजग सरकार ने एक के बाद एक, अनेक योजनाएं शुरू कीं जिनका सीधा लाभ किसानों को मिलने लगा। हालात धीरे-धीरे ही सही, पर बदलने लगे। वे योजनाएं क्या हैं, किसानों को इनका लाभ किन मायनों में मिल रहा है, कृषि क्षेत्र के लिए भविष्य की क्या योजनाएं हैं, नए ..

राम मंदिर से रामराज्य की ओर

मोहनराव भागवतहिन्दी मासिक पत्रिका ‘विवेक’ ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का साक्षात्कार प्रकाशित किया।  इसमें उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन की समाप्ति के बाद के कार्य, काशी विश्वनाथ और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति से लेकर व्यक्ति निर्माण, धर्माचार्यों की भूमिका, बंधुत्व भाव, हिंदू मन, आत्मनिर्भर भारत से लेकर भारत के विश्व गुरु बनने तक की संभावनाओं जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। बातचीत में उन्होंने  कहा कि श्रीरामजन्भूमि आंदोलन भले ही ..

‘खारिज करने की वामपंथी संस्कृति को भारत में घुसने नहीं देना है’

देश में बीते कुछ वर्षों से अभिव्यक्ति की आजादी और असहिष्णुता को लेकर विमर्श तेज हुआ है। ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि सरकार की ओर से खतरा है, लेकिन सच्चाई बिल्कुल इसके उलट है। दरअसल, अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में कुछ लोग मनमानी करना चाहते हैं, इसलिए इसके सूत्रधारों ने परदे के पीछे रहते हुए इस विमर्श को खड़ा किया। कुछ माह पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली में जो दंगे हुए, उसकी जांच में यह खुलासा हुआ कि इसके पीछे भी एक सुनियोजित और गहरी साजिश थी। दिल्ली दंगों पर लिखी गई एक किताब के प्रकाशक ‘ब्लूम्सबरी’ ..

‘पश्चिमी जीवन में खालीपन है, पर भारत में आध्यात्मिक उत्थान के मार्ग खुले हैं’

मारिया विर्थजर्मनी में पली-बढ़ी मारिया विर्थ 38 साल पहले हैम्बर्ग विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई पूरी करने के बाद आस्ट्रेलिया जाते समय भारत में कुछ दिन ठहरी थीं। और फिर भारत के अलौकिक आध्यात्मिक दर्शन और संस्कृति से ऐसी प्रभावित हुईं कि उन्होंने भारत को ही अपना घर बना लिया। वह प्राचीन भारतीय पंरपरा और वैज्ञानिक जीवनशैली का समर्पित भाव से पालन करती आई हैं। उनका कहना है कि जहां ईसाइयत और इस्लाम एक गॉड या एक खुदा के प्रसारक है, वहीं सनातन धर्म में अपने विश्वास का मार्ग खुद तलाश करने का सूत्र दिया ..

‘हम यह सोच कर न बैठ जाएं कि काम पूरा हो गया’

श्रीराम हमारी संस्कृति के आधार स्तंभ हैं। उनका जीवन और कर्म हमें बहुत कुछ सिखाता है। उनका व्यक्तित्व हमारे लिए प्ररेणास्रोत है, हमारे लिए एक आदर्श है। अयोध्या में रामजन्मभूमि पर श्रीराम मंदिर के निर्माण की नींव वास्तव में हमारे सांस्कृतिक पुनर्जागरण की स्थापना की शुरुआत है। अब यहां से हमें अपनी पौराणिक सांस्कृतिक विरासत को आगे ले जाना होगा। आने वाली पीढ़ी को अपनी पुरातन सभ्यता और संस्कृति से ही नहीं, 1,000 साल के संघर्ष काल के महानायकों की शौर्यगाथा से परिचित कराना होगा, जो अपनी मातृभूमि, अपनी सभ्यता ..

‘‘वह बिंदु आ सकता है जब हमें सरकार का समर्थन वापस लेना पड़े’’

लालकृष्ण आडवाणी  1990 में अयोध्या आंदोलन को गति देने के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथयात्रा शुरू की थी। उसी यात्रा के दौरान 27 सितंबर, 1990 को पाञ्चजन्य के तत्कालीन संपादक तरुण विजय ने उनसे बातचीत की। वह बातचीत 7 अक्तूबर, 1990 के अंक में प्रकाशित हुई थी, उसे यहां पुन: प्रकाशित किया जा रहा है- 1990 में राम रथयात्रा के दौरान लोगों का अभिवादन स्वीकार करते श्री लालकृष्ण आडवाणी क्या आपको रथयात्रा में इतने विशाल जनसहयोग की कल्पना थी?आपको याद होगा कुछ ..

‘‘श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से प्रकट हुआ हिन्दू समाज का शौर्य’’

अशोक सिंहल 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने श्रीराम जन्मभूमि पर फैसला सुनाया था। इसके कुछ समय बाद पाञ्चजन्य ने अयोध्या आंदोलन के शिल्पकार रहे श्री अशोक सिंहल से बातचीत की थी, जो 7 नवंबर, 2010 के अंक में प्रकाशित हुई थी। उस बातचीत के संपादित अंशों को पुन: यहां प्रकाशित किया जा रहा है  भारत के लिए श्रीराम और श्रीराम जन्मभूमि का क्या महत्व है?भगवान राम देश के कण-कण में विद्यमान हैं। गुरुग्रंथ साहिब में राम के बारे में स्पष्ट लिखा हुआ है, ‘‘एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट-घट ..

‘‘राम जन्मभूमि हिन्दुओं की है उसे हम लेकर रहेंगे’’

परमहंस महंत रामचंद्रदास अयोध्या आंदोलन के शिल्पकारों में से एक परमहंस महंत रामचंद्रदास से लगभग 30 साल पहले पाञ्चजन्य ने बातचीत की थी, जो 7 अक्तूबर, 1990 के अंक में प्रकाशित हुई थी। उसी बातचीत को यहां पुन: प्रकाशित किया जा रहा है हाल ही में आप कांची के शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी से राम जन्मभूमि के संबंध में उनके प्रस्ताव के विषय में बातचीत करके आए हैं। क्या आप उनका रुख बताएंगे?शंकराचार्य जी को भ्रामक स्थिति में रखा गया था। कुछ लोग चाहते थे कि वे अपना वक्तव्य देकर यह सिद्ध करें कि बाबरी ..

मोरोपंत पिंगले : ‘‘हमारे साथ धोखा हुआ’’

प्रसिद्ध इतिहासविद् और अयोध्या आंदोलन के शिल्पकार रहे स्व. मोरोपंत पिंगले को 14 दिसम्बर, 1992 को गिरफ्तार कर लिया गया था। प्रतिबंध कानून की धारा 13 के तहत उन्हें अधिक समय तक जेल में रखने की योजना थी, लेकिन अंतत: अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को अनुचित बताया और उन्हें जमानत दे दी। जमानत पर छूटने के बाद पाञ्चजन्य ने उनसे बातचीत, जिसके प्रमुख अंश 3 जनवरी, 1993 के अंक में प्रकाशित हुए थे। यहां उसी बातचीत को पुन: प्रकाशित किया जा रहा है- 6 दिसम्बर को अयोध्या में जो कुछ हुआ, उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?6 दिसम्बर ..

हो.वे. शेषाद्रि : ‘‘अब हिन्दू अन्याय नहीं सहेगा’’

बाबरी ढांचे के ढहने के लगभग एक माह बाद पाञ्चजन्य ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरकार्यवाह श्री हो.वे.शेषाद्रि से बातचीत की, जिसके प्रमुख अंश 24 जनवरी, 1993 के अंक में प्रकाशित हुए थे। उसी बातचीत को यहां पुन: प्रकाशित किया जा रहा है-  6 दिसम्बर की घटना के बारे में क्या आकलन है?6 दिसम्बर की घटना और कुछ नहीं, राष्ट्र की अपनी नियति में प्रखर श्रद्धा की जोरदार अभिव्यक्ति थी। भीड़ के गुस्से के बाहरी प्रदर्शन के बावजूद, सभी प्रकार की संवैधानिक और कानूनी भलमनसाहत को हवा में उड़ा देने के बावजूद, ..

प्रो. राजेन्द्र सिंह : ‘‘हर राम विरोधी को सत्ता से हटना पड़ा है’’

अयोध्या में 6 दिसम्बर, 1992 को बाबरी ढांचा टूटा। इसके बाद 10 दिसम्बर को रा.स्व.संघ, विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल पर केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। इस प्रतिबंध और उस समय की परिस्थितियों पर 11 दिसम्बर, 1992 को दिल्ली स्थित संघ कार्यालय ‘केशव कुंज’ में संघ के तत्कालीन सह-सरकार्यवाह श्री रज्जू भैया से पाञ्चजन्य ने बातचीत की। उनका यह साक्षात्कार पाञ्चजन्य (20 दिसम्बर, 1992) में प्रकाशित हुआ था। उसी को पुन: यहां प्रकाशित किया जा रहा है- कश्मीर में 55 मंदिर टूटे, कितने लोगों ने कितनी बार ..

‘आपदाकाल में सरकार के साथ खड़ा है भारत का समाज’

आज पूरा विश्व कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहा है। भारत में इस संकट से लड़ने में समाज की एक बड़ी भूमिका रही है। आपदा की कसौटी पर सरकार और समाज से जुड़े अलग-अलग पक्षों को समझने के लिए इंडिया फाउंडेशन द्वारा समाज व सरकार में विभिन्न स्तरों पर काम करने वाले लोगों से चर्चा की एक श्रृंखला आयोजित की जा रही है। ध्यान देने योग्य है कि आपदाकाल में सहयोग, समन्वय और समाधान का बड़ा उदाहरण प्रस्तुत कर हुए, भारतीय समाज की एकता, चेतना व शक्ति का प्रतीक रूप में नेतृत्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने किया। चर्चा के क्रम ..

‘‘चीन की कथनी-करनी में अंतर है’’

वेबिनार में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेट जनरल संजय कुलकर्णी से अनेक सवाल पूछे गए। प्रस्तुत हैं मुख्य प्रश्न और उनके उत्तर- इस समय भारत के पास एस-400 मिसाइल सिस्टम नहीं है और चीन के पास है। यदि कुछ होता है तो इससे हमारी सुरक्षा पर कोई असर पड़ सकता है क्या?    एस-400 की जो क्षमता है, उसे देखते हुए कह सकते हैं कि उसकी कमी हमें खलेगी, लेकिन कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है। हमारे पास बहुत-सी ऐसी मिसाइलें हैं, जो चीन को चुनौती अच्छी तरह दे सकती हैं।  ऐसी खबरें आ रही हैं कि चीन ने फिंगर-8 से ..

विकसित करनी होगी तकनीकी क्षमता

वेबिनार के अंतिम सत्र में एस. गुरुमूर्ति ने अनेक प्रश्नों के उत्तर दिए। इस सत्र का संचालन पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने किया। प्रस्तुत हैं कुछ चुनिंदा प्रश्नोत्तर-   ‘मेक इंन इंडिया’ कितना सफल रहा है? इसे बेहतर बनाने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए? ‘मेक इन इंडिया’ तभी सफल होगा, जब इसके तहत उत्पादन में हमारे स्थानीय उद्योगों की भागीदारी ज्यादा होगी। कर में वृद्धि करके हम मोबाइल फोन उत्पादन बढ़ाने और दुनिया का आॅटोमोबाइल हब बनने में सफल रहे। हमें वैश्विक आपूर्ति ..

साक्षात्कार : अगर कुछ लोग गैर-जिम्मेदाराना रवैया नहीं दिखाते तो आज भारत इस जंग में जीत के और करीब होता

पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी की चपेट में है। भारत भी इस संकट से जूझ रहा है। देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का मानना है कि अन्य देशों के मुकाबले भारत की स्थिति संतोषजनक है। अगर कुछ लोग गैर-जिम्मेदाराना रवैया नहीं दिखाते तो आज भारत इस जंग में जीत के और करीब होता। कोरोना के खिलाफ जंग में अब तक के प्रयासों और परिणाम के बारे में डॉ. हर्षवर्धन ने पाञ्चजन्य से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं साक्षात्कार के संपादित अंश:—   कोरोना संक्रमण को रोकने में लॉकडाउन अब तक कितना कारगर साबित ..

" कुछ समय के लिए अब जीवन जीने को मिला"

अपने स्वरों से समां बांधने वाली ख्याति प्राप्ति लोक गायिका मालिनी अवस्थी कहती हैं कि ‘हमारे जैसे व्यस्त लोगों को तो समय ही नहीं मिला जिंदगी की तमाम चीजों के लिए। मैं तो इस पूरे लॉकडाउन के पूरे समय को इस रूप में देख रही हूं कि जैसे कुछ समय के लिए अब जीवन जीने को मिला है। लाॅकडाउन को केंद्र में रखते हुए अजय विद्युत ने उनसे खास बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश..

"प्रधानमंत्री ने संकट में बदला व्यक्ति और देश का मनोविज्ञान"

विश्वव्यापी महामारी कोरोना ने स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों में अग्रणी अमेरिका, इटली, स्पेन जैसे देशों को घुटनों पर ला दिया है। वहीं सीमित संसाधनों और बड़ी जनसंख्या के बावजूद भारत इस चुनौती का दृढ़ता व एकजुटता से मुकाबला कर रहा है। 21 दिन का लॉकडाउन की स्थिति पहली बार अनुभव में आई है। घरों में बंद लोगों में थोड़ी बेचैनी स्वाभाविक है। लोग अपने मानसिक स्वास्थ्य को कैसे बेहतर रख सकते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशवासियों को प्रोत्साहित व उत्साहित करने वाले उपाय कितने कारगर हैं, इस पर देश के जाने ..