दिशाबोध

पुण्यतिथि विशेष: ग्रामोदय और अंत्योदय के विचारों से बनेगा वैभवशाली भारत

नानाजी देशमुख 27 फरवरी 2010 को अपनी काया छोड़कर चले गए। वे इतने महान् थे कि उन्होंने दधीचि की तरह अपना प्रत्येक अंग दान कर दिया था ..

स्व. मा. गो.(बाबूराव) वैद्य : कुटुंबवत्सल, ध्येयनिष्ठ और संघ समर्पित विराट व्यक्तित्व

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, लेखक, विचारक और जाने-माने पत्रकार श्री माधव गोविंद वैद्य, उपाख्य बाबूराव वैद्य का गत 19 दिसंबर,2020 को निधन हुआ था। उनके सुपुत्र एवं रा.स्व.संघ के सहसरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व, दिशादर्शक विचार, आदर्शों एवं जीवन के अनूठे अनुभवों को सहेजते हुए लिखा यह लेख ..

नाल कटी है, नाता नहीं टूटा

समय और परिस्थिति ने भारत को विभाजित जरूर  कर दिया, पर आज भी पड़ोसी देशों से उसके सांस्कृतिक संबंध हैं। इन संबंधों को बनाए रखने के लिए ही आज भी लोग अपने बच्चों और प्रतिष्ठानों के नाम अपने मूल स्थान पर रखते हैं। इस भावना को और धार देने की आवश्यकतामुम्बई स्थित ‘न्यू कराची स्वीट मार्ट’। इसके मालिक विभाजन के समय कराची से भारत आए और यहां भी उसी नाम से दुकान खोलीकुछ दिन पूर्व मुंबई में ‘कराची स्वीट मार्ट’ नामक दुकान के मालिक को एक शिवसैनिक ने दुकान का नाम बदलने के लिए धमकाया। ..

क्यों है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गुरु 'भगवा ध्वज' ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के समय भगवा ध्वज को गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया। इसके पीछे मूल भाव यह था कि व्यक्ति पतित हो सकता है पर विचार और पावन प्रतीक नहीं। विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन गुरु रूप में इसी भगवा ध्वज को नमन करता है..

विजयादशमी उत्सव : ‘स्व’ के मंत्र से संकट का समाधान

पाञ्चजन्य ब्यूरोहर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रा.स्व.संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने नागपुर में रेशिमबाग स्थित संघ मुख्यालय पर गत 25 अक्तूबर को विजयादशमी उत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर शस्त्र पूजन के बाद उपस्थित स्वयंसेवकों और गणमान्यजन को संबोधित करते हुए श्री भागवत ने देश के सामने उपस्थित चुनौतियों की चर्चा की और उनके समाधान का मार्ग सुझाया। उन्होंने कोरोना वायरस से जूझने में संगठित समाज और स्वयंसेवकों के सेवाभाव की सराहना की। कोरोना के जन्मदाता विस्तारवादी चीन के नापाक मंसूबों ..

सेकुलर ‘कुल’ का छद्म पहचान रहा भारत

देश में लंबे अरसे से सेकुलरवाद के नाम पर हिंदू धर्म और जीवन पद्धति को अपनाने वालों को तथाकथित बुद्धिजीवियों ने ‘सांप्रदायिक’ कहने की सेकुलर मुहिम छेड़ी हुई है। वे हिन्दुत्व के मूल्यों को नहीं जानते, इसलिए हिन्दू के अलावा ईसाई, मुस्लिम आदि मतों को ‘सेकुलर’ बताकर सिर्फ उनका पक्ष सामने रखते हैं। अब समाज ऐसे तत्वों को पहचानने लगा हैसनातन आस्था को आत्मसात करता भारत का जन-मनअयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण कार्य का नेत्र दीपक शुभारम्भ करोड़ों भारतीयों और दुनियाभर में ..

सहज स्वभाव, गहन प्रभाव

श्रेष्ठ चिंतक, संगठक और दीर्घद्रष्टा नेता भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी की जन्मशती के अवसर पर याद आते हैं संगठन हेतु उनके दिए सूत्र और देश व समाज को उनका महती योगदानश्री दत्तोपंत ठेंगड़ी जिस समय स्वर्गीय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की, वह साम्यवाद के वैश्विक आकर्षण, वर्चस्व और बोलबाले का समय था। उस परिस्थिति में राष्ट्रीय विचार से प्रेरित शुद्ध भारतीय विचार पर आधारित एक मजदूर आंदोलन की शुरुआत करना तथा अनेक विरोध और अवरोधों के बावजूद उसे लगातार बढ़ाते जाना, यह ..

समानता-समावेश का हिन्दू विचार

हिंदुत्व ऐसी विचारधारा है जो विभिन्न आस्थाओं के बीच अंतर का प्रचार या महिमामंडन करने के बजाय उनका पालन करने वाले विभिन्न भारतीय समुदायों में मौजूद समानताओं का आदर करती है। हमारा लक्ष्य समरूपता नहीं, बल्कि समावेश है। सदियों से भारत में यही भाव बना रहा हैपश्चिम में तेजी से बढ़ रही है हिन्दू धर्म को अपनाने वालों की संख्या       (फाइल चित्र)भारत में धर्म का उद्देश्य किन्हीं खास मत—मतों को बौद्धिक स्वीकृति देना या मानव जाति के बीच समरूपता स्थापित करना नहीं, बल्कि ..

झूठ-वाहक वामपंथी

वामपंथी अपनी विचारधारा को पुष्ट करने के लिए झूठ लिखते हैं, बोलते हैं और उसे प्रचारित भी करते हैं। ये लोग संघ को बदनाम करने के लिए फर्जी खबरें चलाते हैं और संघ की सही बातों को दबाने के लिए किसी भी सीमा तक गिर जाते हैंकोरोना काल में दिल्ली में जरूरतमंदों के बीच भोजन बांटते स्वयंसेवक, लेकिन कभी किसी वामपंथी पत्रकार ने इनके बारे में एक शब्द नहीं लिखा। वामपंथी विचार को मानने वाले बुद्धिजीवी और पत्रकारों की विशेषता है कि वे सत्य की खोज करने का प्रयास नहीं करते। पहले से तय ‘एजेंडा’ के दायरे में ..

प्रकट हो रहा भारत का ‘स्वत्व’

साम्यवादी और विस्तारवादी कितने ही प्रपंच रचें, लेकिन अपने स्वत्व पर अडिग रहते हुए भारत के आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ते कदमों को वे नहीं रोक पाएंगे। समय आ गया है जब राष्ट्रीय भावना में पगे प्रत्येक जन को हर निहित स्वार्थ का त्याग करके सबल, समर्थ भारत के निर्माण में अपना सहयोग देना चाहिए    आज विश्व और स्वयं भारत भी, एक नए भारत का अनुभव कर रहा है, क्योंकि भारत की विदेश नीति, रक्षा नीति तथा अर्थ नीति में मूलभूत परिवर्तन हुए हैं। विदेश और रक्षा नीति में आए परिवर्तनों से भारतीय सेना का बल और ..

विस्तारवाद नहीं, विकासवाद

चीन के विस्तारवादी रवैए और गलवान में उसके सीमा अतिक्रमण के बाद भारत के सैनिकों द्वारा दिखाए शौर्य से पूरा देश गौरवान्वित है। उस मुठभेड़ में घायल भारतीय सैनिकों का हाल-चाल पूछने और सीमा की चौकसी की जानकारी लेने गत 3 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लेह गए थे। वहां उन्होंने 14वीं कोर को संबोधित करते हुए विस्तारवादी चीन को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व भारत के विकासवाद को सराह रहा है। यहां प्रस्तुत हैं प्रधानमंत्री के उसी संबोधन के संपादित अंशलेह में सैनिकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ..

‘वयं राष्ट्रांगभूता’ का दर्शन

महामारी के इस दौर में संघ के स्वयंसेवकों और अन्य कोरोना योद्धाओं ने यह देश हमारा है, यह समाज अपना है, इन सब भावों के साथ जरूरतमंदों की मदद की। इन लोगों ने अपनी चिंता छोड़ दिन-रात पीड़ितों की सेवा करके ‘वयं राष्ट्रांगभूता’ के भाव का ही दर्शन कराया है  ये सेवा भारती, दिल्ली के कार्यकर्ता हैं। इन लोगों ने नाव से यमुना नदी पार कर दूसरे किनारे फंसे श्रमिकों के बीच राशन बांटा।भारत के साथ पूरी दुनिया कोरोना वायरस के कारण निर्मित परिस्थिति से जूझ रही है। भारत की वैविध्यपूर्ण और विशाल जनसंख्या ..

संकट को अवसर बनाकर हम एक नए भारत का उत्थान करें: डॉ. मोहन भागवत

संघ अपनी प्रसिद्धि, स्वार्थ या डंका बजाने के लिए सेवा कार्य नहीं करता. सरसंघचालक ने पालघर में संतों की हत्या पर जताया दुःख. बोले, एकांत में आत्मसाधना - लोकांत में परोपकार, संघ कार्य का यही स्वरूप है..

रामनवमी पर संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी का संदेश

कोरोना महामारी के दौर में 10 लाख परिवारों तक स्वयंसेवक सहायता लेकर पहुंचे हैं। 10 हजार स्थानों पर एक लाख से अधिक स्वयंसेवक सेवा कार्य में सक्रिय हैं ..

वर्ष प्रतिपदा विशेष: सामान्य से असमान्य गढ़ने वाले डॉ. हेडगेवार

आज वर्ष प्रतिपदा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था। हेडगेवार जी ने सम्पूर्ण समाज को राष्ट्रीय दृष्टि से जागृत एवं सक्रिय करते हुए सम्पूर्ण समाज को संगठित करने का कार्य 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' के रूप में शुरू किया। ऐसे में उनके व्यक्तित्व को समझे बिना संघ को समझना सम्भव नहीं ..

जयंती विशेष: हिंन्दू जगेगा, विश्व जगेगा

विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था। आज उनके बताए मार्ग पर करोड़ों स्वयंसेवक चल रहे हैं और समाज-जीवन के प्राय: हर क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं ..

परमेश्वरन जी गुरु, आदर्श, उन्नायक, मार्गदर्शक..सब कुछ थे

परमेश्वरन जी अपनी सादगी और उच्चस्तरीय व्यवहार से वह कितनी जल्दी उन लोगों के मस्तिष्क पर विजय प्राप्त कर लेते थे। संगठनात्मक जीवन में मेरे जैसे लोगों के लिए परमेश्वरनजी गुरु, आदर्श, उन्नायक, मार्गदर्शक...सब कुछ थे ..

भारत की राष्ट्रीयता

मैंने कहा-भारतीय का अर्थ तो हुआ 'सम्पूर्ण भारत व्यापी' और भारत के लिए। फिर राष्ट्रीय का अर्थ क्या हुआ? वे कुछ बोल नहीं पाए।..

संस्कृतानुरागी रज्जू भैया

स्वातंत्र्यपूर्व काल में एक बार आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती खुर्जा आए थे। उनके दर्शन करने मा. रज्जू भैया जी के दादाजी गांव से पैदल चलकर खुर्जा आए थे। तब से मा. रज्जू भैया जी का परिवार आर्यसमाजी बन गया। घर में मांसाहार वर्जित हो गया। वेदों के मंत्र घर में सबको कंठस्थ करा दिए जाते थे। मा. रज्जू भैया जी को भी सभी मंत्र याद थे।..

भारत का स्वभाव 'धर्म' है

भारत अपने हिंदुत्व पर पूर्ण आचरण करते हुए इसका उदाहरण प्रस्तुत करेगा कि वैविध्यपूर्ण व विश्वव्यापी मानव समूह के लिए सौहार्द और सामंजस्य के साथ एकत्र कैसे जी सकते हैंं। यह भारत का कर्तव्य और दुनिया की आवश्यकता भी है। भारत को विश्वगुरु बनना है..

जन्मदिन विशेष: दत्तोपंत ठेंगड़ी दृष्टा और सृष्टा

एक के बाद एक संगठन निर्माण करना, राष्ट्रहित में उन संगठनों और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करना और लक्ष्य प्राप्ति पर पूर्ण विश्वास, भविष्य के बारे में भी निश्चित दिशा बताना, यह सब ठेंगड़ी जी ने किया है। पुर्नजागरण, स्वर्णयुग, विकास के शीर्ष स्थान पर पहुंचकर विश्व का नेतृत्व करने का सपना ठेंगड़ी जी ने देखा था। श्री गुरुजी के प्रति अपार श्रद्धा, विश्वास उनका प्रेरणा केंद्र था ..