दिशाबोध

हिन्दुत्व ही भारत की पहचान

धर्म सबको जोड़ता है। भारत की इस जीवनदृष्टि को दुनिया में 'हिंदू जीवनदृष्टि' के नाम से जाना जाता रहा है। यह भारत के सभी लोगों की पहचान बन गई है। किसी की भाषा, जाति या उपासना पंथ कोई भी हो,सब इस एकात्म जीवनदृष्टि को अपना मानते हैं। इसलिए भारत में रहने वाले सभी जन की पहचान 'हिन्दू' के नाते बनी..

संघ और राजनीति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के समय से ही स्वयं को सम्पूर्ण समाज का संगठन मानता, बताता रहा है। स्वतंत्रता के पश्चात भी संघ की इस भूमिका में कोई अंतर नहीं आया। इसलिए स्वतंत्रता के तुरंत पश्चात 1950 में संघ का जो संविधान बना उस में भी यह स्पष्ट है कि यदि कोई स्वयंसेवक राजनीति में सक्रिय होना चाहता है तो वह किसी भी राजनैतिक दल का सदस्य बन सकता है। यह संविधान भारतीय जनसंघ की स्थापना के पहले बना है।..

संघ की दृष्टि में ऐसे हैं महात्मा गांधी

संघ और गांधीजी के संबंध कैसे थे, इसे तथ्यात्मक रूप से जाने बिना अनेक लोग धारणाएं बना लेते हैं। संघ के बारे में अनेक स्कॉलर कहलाने वाले लोग भी बिना अध्ययन या एक विशिष्ट दृष्टिकोण से लिखे साहित्य के आधार पर विचार व्यक्त करते हैं जिनका 'सत्य' से कोई लेना-देना नहीं होता..

जयंती विशेष: हिंन्दू जगेगा, विश्व जगेगा

विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था। आज उनके बताए मार्ग पर करोड़ों स्वयंसेवक चल रहे हैं और समाज-जीवन के प्राय: हर क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं ..

आजादी के आंदोलन में संघ का बड़ा योगदान था लेकिन संघ को श्रेय लेने की आदत नहीं

एक षड्यंत्र के तहत यह प्रचारित किया जाता है कि आजादी के आंदोलन में संघ का कोई योगदान नहीं है, जबकि इतिहास गवाह है कि डॉ. हेडगेवार सहित अनेक स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ते हुए जेल की यातनाएं सही थीं..

शाखा ने समाज को एक साथ खड़ा करने का काम किया

संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को बचपन से ही लगता था कि अपने देश पर अंग्रेजों का शासन नहीं होना चाहिए। जब वे 9-10 वर्ष के थे और तीसरी कक्षा में थे तब इंग्लैंड की रानी और हिंदुस्तान की महारानी विक्टोरिया के राज्याभिषेक का स्वर्ण महोत्सव मनाया जा रहा था। इस अवसर पर सभी स्कूलों में मिठाइयां बांटी गईं। तीसरी कक्षा के बाकी सभी विद्यार्थियों ने उसे खुशी से खाया लेकिन केशव हेडगेवार ने मिठाई कचरे के डिब्बे में डाल फेंक दी।..

स्वतंत्रता संग्राम के एक अज्ञात सेनापति डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार

चिरसनातन अखण्ड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए कटिबद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे अज्ञात सेनापति थे जिन्होंने अपने तथा अपने संगठन के नाम से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में अपना तन मन सब कुछ भारत माता के चरणों में अर्पित कर दिया था।..

डॉ. हेडगेवार बंदी बनाए गए तो उन्होंने न्यायालय में कहा था पूर्ण स्वराज हमारा ध्येय

1921 में डॉ. हेडगेवार पर राजद्रोहात्मक भाषण देने के अपराध में मुकदमा चलाया गया था। उस समय डॉ. साहब ने न्यायालय में जो उत्तर दिया था, वह हर देशभक्त के लिए स्मरणीय है। उनका वह ऐतिहासिक वक्तव्य सामने रखता यह आलेख पाञ्चजन्य के 20 मार्च, 1961 के अंक में प्रकाशित हुआ था..

अभिव्यक्ति की स्वत़़ंत्रता के पक्षधर वामपंथी दूसरे के विचारों को सुनना भी पाप मानते हैं

अहंकार (arrogance) और अनुदार वृत्ति वामपंथ का स्थाई चरित्र है किन्तु यह लोग अपने आप को उदार, अभिव्यक्ति स्वतंत्रता के रक्षण कर्ता आदि कहते नहीं अघाते। अधिकतर वामपंथी, दूसरों के पक्ष को सुनना भी निषिद्ध मानते हैं, या पाप मानते है।(यदि वे पाप और पुण्य में विश्वास करते हैं तो)।..

सभ्यताओं का टकराव !

क्राइस्टचर्च मस्जिद में हमला हो या नाइजीरिया में मजहबी जिहादियों द्वारा चर्च को जलाना और सैकड़ों ईसाइयों की हत्या, दोनों घटनाओं से यह बात साफ है कि इस आक्रामक कट्टरवादी गोलबंदी का निराकरण मानव को एकता और बंधुता के सूत्र में पिरोने वाली विश्व बंधुत्व की दृष्टि से ही हो सकता है..

भारत के गौरव का प्रतीक है राम मंदिर

आधुनिक भारत के कई राष्ट्र निर्माताओं ने ‘भारत की सामूहिक अंतश्चेतना’ को अपनी वाणी और आचरण से अभिव्यक्त किया है। इस ‘सामूहिक अंतश्चेतना’ की इच्छा, आकांक्षा और संकल्प है अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाकर भारत के गौरव-प्रतीक को प्रतिष्ठित करना..

'ऐसा कतई नहीं है कि हमें मुसलमान नहीं चाहिए, हिंदुत्व तो विश्व कुटुम्बकम की बात करता है'

संघ जिस बंधुभाव को लेकर काम करता है, उस बंधुभाव का एक ही आधार है, विविधता में एकता। परम्परा से चलते आए इस चिंतन को ही दुनिया हिंदुत्व कहती है। इस लिए हम कहते हैं कि हमारा हिन्दू राष्ट्र है। इसका मतलब इसमें मुसलमान नहीं चाहिए , ऐसा बिलकुल नहीं होता है। जिस दिन यह कहा जाएगा कि मुसलमान नहीं चाहिए उस दिन वह हिंदुत्व नहीं रहेगा। हिंदुत्व तो कुटुम्बकम की बात करता है..

'संघ मुसलमानों और ईसाइयों के प्रति घृणा का भाव नहीं रखता'

मेरा जन्म ही संघ परिवार में हुआ है। मेरे पिताजी ने 18 वर्ष की आयु में 1941 में आजीवन संघ कार्य करने की प्रतिज्ञा ली है। वह आज भी उसका पालन कर रहे हैं। बचपन से ही शाखा में जाने का मेरा अनुभव है। मैंने कभी संघ में मुसलमान या ईसाई के प्रति घृणा या तिरस्कार की बात नहीं सुनी। राष्ट्र विरोधी तत्वों का विरोध (घृणा या तिरस्कार नहीं) जम कर होता देखा है..

शाश्वत हिंदू राष्ट्र दरअसल है क्या?

इन दिनों हिंदू और राष्ट्रवाद जैसे शब्दों पर जोरदार विमर्श और बहस सुनने को मिल रही है। हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्रत्व के संबंध में यह उलझाव, उनके अंतर्निहित भारतीय संदर्भ को समझे बिना, उन्हें पश्चिमी मानकों से मापने के कारण हो रहा है..

क्यों है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गुरु 'भगवा ध्वज' ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के समय भगवा ध्वज को गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया। इसके पीछे मूल भाव यह था कि व्यक्ति पतित हो सकता है पर विचार और पावन प्रतीक नहीं। विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन गुरु रूप में इसी भगवा ध्वज को नमन करता है।     पर्वों, त्योहारों और संस्कारों की भारतभूमि पर गुरु का परम महत्व माना गया है। गुरु शिष्य की ऊर्जा को पहचानकर उसके संपूर्ण सामर्थ्य को विकसित करने में सहायक होता है। ..

हम क्यों खोते जा रहे हैं अपने शब्दों को, ऐसे तो विलुप्त हो जाएंगे हमारे शब्द

अपनी भाषा, बोली और अपने शब्दों का उपयोग न करने या उन्हें प्रचलन में न रखने पर वे मृत हो जाते हैं। ‘भाषा किसी भी व्यक्ति एवं समाज की पहचान का एक महत्वपूर्ण घटक तथा उसकी संस्कृति की सजीव संवाहिका होती है।’’ आज विविध भारतीय भाषाओं व बोलियों के चलन तथा उपयोग में आ रही कमी, उनके शब्दों का विलोपन तथा विदेशी भाषाओं के शब्दों से प्रतिस्थापन एक गंभीर चुनौती बन कर उभर रही है। अनेक भाषाएं व बोलियां विलुप्त हो चुकी हैं और कई अन्य का अस्तित्व संकट में है। यह कितना विदारक है ! डॉ. मनमोहन वैद्य ..

शत नमन माधव चरण में ...

संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार ने अपने देहान्त से पूर्व जिनके समर्थ कंधों पर संघ का कार्यभार सौंपा, वह थे श्री माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर, जिन्हें हम सब प्रेम से श्री गुरुजी कहकर पुकारते हैं। ‘परंम् वैभवम नेतुमेतत्वस्वराष्ट्रं’ यानी राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाने के लिए संघ कार्य को अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले श्री गुरुजी की आज पुण्य तिथि है। ..

महात्मा गांधी, बाबा साहेब आंबेडकर और जनरल करिअप्पा भी आ चुके हैं संघ के वर्ग में

प्रणब मुखर्जी का संघ के तृतीय वर्ष वर्ग के समापन में जाना कांग्रेसियों और वामपंथियों को खासा परेशान करना वाला है। संभवत: इसलिए अभी तक किसी ने इस बात पर कोई टिप्पणी भी नहीं की है। जहां तक प्रणब दा की बात है तो इंदिरा गांधी के बाद के दौर में प्रणब मुखर्जी, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में गिने जाते रहे हैं। ..

चिन्तन - समरसता और संघ विचार

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने संविधान सभा और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की भूमिका पर नई रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि बाबासाहेब ने स्वातंत्र्य, समता, बंधुता की तत्वत्रयी की प्रेरणा फ्रांसीसी राज्य क्रांति के बजाय तथागत ब..

साक्षात्कार सरसंघचालक : एक है हिन्दुत्व

रा.स्व.संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा यानी संघ से जुड़ा वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन। समाज में संघ कार्य की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है।  विविध क्षेत्रों में संघ के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की उत्कंठा है। 2018 के अवसर पर रेशिम बाग, नागपुर में सरस..

संघ को किसी भी रूप में चातुर्वर्ण्य व्यवस्था स्वीकार नहीं—बालासाहब देवरस

वरिष्ठ पत्रकार दिनकर विनायक गोखले ने डॉ. हेडगेवार भवन में बालासाहब का साक्षात्कार  लिया था। उस समय बालासाहब के निजी सचिव डॉ. आबाजी थत्ते और महाराष्ट्र टाइम्स के नागपुर प्रतिनिधि केशवराव पोतदार उपस्थित थे। यह साक्षात्कार अगस्त 1973 के किर्लोस्कर मासिक..