सोशल मीडिया

लवजिहाद: कन्वर्जन की कहानी निकिता की जुबानी

जालंधर की निकिता सैनी एक अस्पताल में कर्मचारी हैं। स्वतंत्र सोच-विचार की रही होंगी, इसलिए पति की गुलामी बर्दाश्त नहीं हुई और तलाक ले लिया। इसके बाद भी नौकरी और जीवन चलता रहा।..

देशभक्ति जैसे भी दिखाई जाए, गर्व का ही विषय होती है!

देश में एक वैचारिक खेमे को देशभक्ति और राष्ट्रीयता जैसी चीजों से बड़ी चिढ़ है। इस तरह की कोई फिल्म आए तो उसमें कमियां निकालने का मौक़ा वे कतई नहीं चूकते। ऐस ही 13 अगस्त को रिलीज होने वाले फिल्म 'भुज : द प्राइड ऑफ़ इंडिया' को लेकर किया जा रहा है ..

सनी खान के चलते 14 साल की कराटे खिलाड़ी पामेला ने जान दी

पश्चिम बंगाल की रहने वाली होनहार 14 साल की पामेला अपनी जान देने को मजबूर हो गई। उसने आत्महत्या कर ली। दरअसल सनी खान ने उसे झांसे में लेकर उसके आपत्तिजनक फोटो खींच लिए थे और उसे ब्लैकमेल कर रहा था ..

सोशल मीडिया : प्रतिमा की हिन्दू आस्था पर ‘मिशन आंबेडकर’ के नफरती ट्वीट को वेंकटेश प्रसाद का कड़ा जवाब

हिन्दू धर्म के प्रति समर्पित, हिन्दू विरोधियों पर बेलाग टिप्पणी करने वाले पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद के चाहने वालों और 'फॉलोवर्स' की संख्या लगातार बढ़ रही है ..

जमीन के नीचे यात्रा : लुभाए भी, डराए भी

हाइपरलूप में जमीन के भीतर गहराई में बनी हजारों किमी लंबी ट्यूब्स या सुरंगों के भीतर से छोटे-छोटे पॉड्स या वाहन गुजरेंगे। यह आगामी कल के परिवहन का अद्वितीय रूप होगा..

प्रतिक्रियाजीवी बनाता सोशल मीडिया!

कई अध्ययनों में सामने आया है कि स्वीकृति और प्रशंसा पाने की चाह के साथ आत्ममुग्धता भी व्यक्ति को आभासी पटल पर कुछ अधिक समय तक रोके रखती है। ऐसे में इस आभासी दुनिया में कुछ ट्रेंड करे, तो वह छूट न जाए, यह भाव आना सहज ही है। जरूरत है इसके पीछे के सच को समझने एवं मानसिक रूप से सबल होने की..

पुस्तक समीक्षा : बलूची तड़प को समझने की कोशिश

संध्या जैन की किताब ‘बलूचिस्तान - इन द क्रासहेयर आॅफ हिस्ट्री’ एक शानदार पुस्तक है। इसमें लेखिका ने बलूचियों के बलूचिस्तान में आगमन से उन्हें मिले छलावे और आज के तक संघर्ष तक को दर्शाया है। बलूचों के इतिहास और संघर्ष को अगर समझना हो, तो यह पुस्तक एक आधार बिंदु हो सकती है..

विरोध पर टिकी विचारधारा हमेशा हारती है

महाभारत के दो ऐसे चरित्र जिन्हें अलग-अलग कारणों से ही सही लेकिन उनकी जन्म देने वाली मां ने त्याग दिया। राजपरिवार से संबंध रखने के बावजूद दोनों का बचपन सामान्य जनों के बीच बीता ..

विदेशी प्रभाव का मारा भारतीय मीडिया

मीडिया से सोची-समझी साजिश के तहत भारत से जुड़ी घटनाएं सिरे से गायब..

झूठ के ठेकेदार!

ऐसा लगता है कि सेकुलर मीडिया को झूठ फैलाने की सुपारी मिली है..

मीडिया का दुरुपयोग

झूठ के बदले मीडिया को किसी तरह का आर्थिक लाभ भी अवश्य होता होगा..

ये जो पब्लिक है, सब जानती है...

मीडिया के एक वर्ग का कांग्रेस के प्रति निष्ठा व भ्रम फैलाने के प्रयास को लोग समझते हैं..

नीम चढ़ा करेला

भारत और हिन्दू विरोधी व झूठी खबरें परोस रहे मीडिया के साथ अब सोशल मीडिया कंपनियां भी सक्रिय हुर्इं..

मत-अभिमत/मीडिया : छद्म आख्यान झूठ पर वार का वक्त

पश्चिमी मीडिया को उभरते, प्रगतिशील और नए विकास की ओर अग्रसर शक्तिशाली भारत की तस्वीर अपने रचे हुए मिथ के अनुरूप नहीं लगती। इसलिए, श्मशान घाटों और कोविड हाटस्पॉट्स पर ही ज्यादा खबरें बना रही पश्चिमी मीडिया की नजरें कुछ और खोजती भी हैं तो वे गोबर और मूत्र जैसे अपने पसंदीदा विषय और कोरोना देवी की पूजा करने वाले मुट्ठी भर लोगों और खासकर अरुंधति रॉय और राणा अय्यूब जैसे शासन विरोधी नामों पर जा टिकती हैं। अब वक्त इस छद्म आख्यान के झूठ पर वार करने का है..

‘झूठिस्तान’ की आधुनिक दुनिया

सोशल मीडिया में झूठी खबरें इस तरह परोसी जाती हैं कि वे सच लगने लगती हैं। हालांकि सोशल मीडिया की हर खबर झूठी नहीं होती, पर ज्यादातर खबरों का कोई आधार नहीं होता ..

झूठ का बोलबाला

इन दिनों लोकतंत्र को झूठी खबरों की चुनौती मिल रही है। तथ्यों को छुपाकर खबरें गढ़ी जाती हैं और सोशल मीडिया के जरिए उन्हें प्रचारित किया जाता है। लोग जब तक सही-गलत की पहचान कर पाते हैं तब तक बहुत नुकसान हो चुका होता है..

चश्मा चढ़ाए लुटियन मीडिया

लुटियन्स संस्कारों से पगा ‘मेनस्ट्रीम मीडिया’ खबर उसी को मानता है, जिससे उसके स्वार्थ सधते हों। जिस खबर से कोई हित न सधता हो उसे वह खबर ही नहीं मानता..

वायरस के बाद चीनी दुष्प्रचार का हमला

भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का बड़ा हिस्सा चीनी दुष्प्रचार को बढ़ावा दे रहा है..

झूठ पर हाय-तौबा, सच पर चुप्पी

मीडिया का बड़ा वर्ग झूठे समाचारों को जोर-शोर से दिखाता है, लेकिन वास्तविक समाचारों पर चुप्पी साध लेता है..

मीडिया का हिंदूविरोधी और सांप्रदायिक नजरिया

सेकुलर मीडिया के लिए राष्टवादी संगठनों के नेताओं व कार्यकर्ताओं पर हुए हमले सामान्य घटना हैं..

इन दो पक्षियों से सीखें हिन्दू

16वीं सदी के शुरू में डच लोग मॉरीशस पहुंचे। वे यह देखकर हैरान रह गए कि इन पक्षियों को मनुष्य आराम से पकड़ लेता था। फिर डच लोगों ने इनका शिकार करना शुरू कर दिया। चूंकि डच अपने साथ कुत्ते-चूहे आदि लेकर गए थे, इसलिए धीरे-धीरे कुत्ते भी डोडो का शिकार करने लगे और चूहों ने उनके अंडों को खाना शुरू कर दिया। डोडो बिल्कुल भी रक्षात्मक नहीं रह गए थे, क्योंकि वे जिस माहौल में पीढ़ी दर पीढ़ी पल रहे थे, वहां उन्हें आक्रामक होने की जरूरत नहीं थी। लेकिन जब उन्हें आक्रामक होने की जरूरत पड़ी, तब वे यह भूल गए कि हमला कैसे ..

भटकाने में माहिर सेकुलर मीडिया

जब भी कांग्रेस की कोई सरकार मुसीबत में फंसती है, मीडिया का एक धड़ा उसे बचाने को कूद पड़ता है..

होली के रंग को मैला करने की वामपंथी सजिश

पिछले कुछ सालों से हिंदू त्यौहारों के साथ एक गहरी साजिश की जा रही है। ये एक तरह का सांस्कृतिक जिहाद है जिसे मीडिया के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है ..

खबर को मरोड़ने में माहिर ‘सेकुलरों का मीडिया’

14 साल के हिन्दू लड़के की हत्या नहीं, पर 14 साल के संदिग्ध चोर की पिटाई बनी बड़ी खबर..

बीबीसी की साम्राज्यवादी घृणा

 अभिव्यक्ति और असहमति की स्वतंत्रता को लेकर मुख्यधारा मीडिया का पाखंड हर दिन उजागर होता रहता है। अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू पर आयकर चोरी की जांच हो तो वह बदले की कार्रवाई है, लेकिन कंगना रनौत के घर को अवैध तरीके से तुड़वा देना प्रशासनिक कार्रवाई है। ..

सक्रिय हैं मीडिया संस्थानों में बैठे कामरेड

26 जनवरी को दिल्ली में हिंसा भड़काने के लिए झूठ फैलाते पकड़े गए राजदीप सरदेसाई की इंडिया टुडे-आजतक समूह में ससम्मान वापसी हो गई है। चैनल पर कार्रवाई न हो, इसलिए प्रबंधन ने उन्हें एक माह के लिए हटा दिया था। जब वे वापस न्यूजरूम में पहुंचे तो चैनल के मालिकों व पत्रकारों ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया। मानो कोई बहुत बड़ी उपलब्धि पाकर लौटे हैं..

सेकुलर मीडिया की धूर्तता पर चुप्पी

धर्म और मजहब के आधार पर खबरों से पक्षपात पर पत्रकारों की जेबी संस्थाएं कभी नहीं बोलतीं..

अमेरिकी हितों की एजेन्ट बनी, भीमा कोरेगांव दंगों के आरोपी वाली वेबसाइट

प्रवर्तन निदेशालय न्यूज क्लिक के मालिक प्रवीर पुरकायस्थ के रिश्ते एक दूसरी कंपनी सागरिक प्रोसेस एनालिस्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ भी खंगाल रहा है। इस खुलासे के बाद न्यूज क्लिक की तरफ से न अब तक कोई बयान आया है और न पुरकायस्थ इस संबंध में मीडिया से बात कर रहे हैं ..

कहां तक गिरेगा एनडीटीवी, कोरोना पीड़ित बच्चों के नाम पर अवैध रूप से वसूली की

एनडीटीवी ने तो इस बार हद ही पार कर डाली. टैक्स फ्रॉड, इनसाइडर ट्रेडिंग, संदिग्ध फंडिंग, राष्ट्र विरोधी एजेंडा के लिए कुख्यात इस चैनल ने जो किया है, वह मानवता को शर्मसार करने वाला है ..

सोशल मीडिया का दखल बाजार तक

फेसबुक, व्हाट्सएप जैसी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां उपभोक्ताओं की निजी सूचनाएं हासिल करती हैं। इन आंकड़ों के आधार पर ये अब बाजार में मांग और आपूर्ति प्रभावित कर रही हैं..

एक गलती से उजागर हुई लुटियन जमात

भारत को बदनाम करने में जुटे सेकुलर-लिबरल वामपंथियों की टोली का सच आया सामने..

गेशे जम्पा : बीसवीं कड़ी (20)

तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या हमारे भारत देश में है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में तब इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी।..

सेकुलर झूठ का स्रोत है एक

बिना तथ्य जांचे दुष्प्रचार में जुटती है लुटियन पत्रकारों की फौज..

तू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूं

एनडीटीवी झूठी खबरें गढ़ता है और कांग्रेस झूठ की उसी बैसाखी के सहारे चलने का प्रयास करती है..

दुष्प्रचार तंत्र बन गया है मीडिया

दिल्ली के चांदनी चौक में हनुमान मंदिर तोड़ने का समाचार भी अंदरूनी पन्नों में दबा दिया गया। यही कोई छोटी-मोटी अवैध मजार होती तो अंग्रेजी अखबार इसे ‘भारत में मुसलमानों पर अत्याचार’ की घटना की तरह प्रकाशित करते। ..

‘दीदी’ का खौफ दिल्ली तक!

बंगाल में ममता सरकार की तानाशाही पर स्थानीय ही नहीं, दिल्ली का मीडिया भी चुप रहता है..

दूसरे के दामन पर फर्जी दाग दिखाते दागी चेहरे वाले

मीडिया में बैठे सेकुलर पत्रकार और समाचार संस्थान एक एजेंडे के तहत खुलकर फैला रहे फर्जी खबरें..

आकाओं को बचाने के लिए तुरंत आते हैं आगे

जब भी अपने आकाओं पर खतरा मंडराते देखते हैं कुछ मीडिया घराने उनके बचाव में कूद पड़ते हैं किसानों के नाम पर चल रहे प्रायोजित आंदोलन की सचाई हर कोई देख और समझ रहा है, लेकिन सेकुलर मीडिया शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में धंसाए बैठा है। पहले दिन से ही आंदोलन में खालिस्तानी छाप साफ दिखाई दे रही है। कई जगह आतंकवादी भिंडरावाला की फोटो दिखी और खालिस्तान के नारे लगाए गए। जब कुछ चैनलों और अखबारों ने इसे रिपोर्ट किया तो तत्काल एक ‘फतवा’ जारी हो गया कि रिपोर्टिंग में ‘खालिस्तानी’ शब्द ..

सतत विकास के सच्चे संदेशवाहक

संजय तिवारी की फेसबुक वॉल से  यह सामाजिक संरचना का व्यापार है, इसलिए इस व्यापार पर इनका पूरा कब्जा है। कोई दूसरा इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। ये जिस पेड़ से पत्ते तोड़ते हैं, उसके मालिक से पूछते तक नहीं। पूछने की जरूरत भी नहीं है। पेड़ चाहे जिसका हो, महुआ का पात इन्हीं का है। इसलिए इन्हें कभी कोई रोकता भी नहीं। यह निब्बू मुसहर है (तस्वीर में देखें)। पूर्वी उत्तर प्रदेश की एक घुमंतू जाति। अगर हमारे समाज में आसपास कोई माटी के लाल हैं तो वे यही लोग हैं। माटी, पानी और पेड़ों की जितनी समझ इन्हें ..

समाचारों पर एकाधिकार के दिन लद गए

मीडिया को यह समझना होगा कि लोग सूचनाओं व समाचारों के लिए अखबारों, टीवी चैनलों के भरोसे नहीं रहेएक वर्ष पहले देश में नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर जो तमाशा खड़ा किया गया था, ठीक वैसा ही अब किसानों के लिए बने नए कानून को लेकर हो रहा है। एक अफवाह फैलाई गई क..

नियंत्रण में मीडिया मालिक!

दिल्ली सरकार को जिन पैसों से महामारी को नियंत्रित करना चाहिए उन्हें वह मीडिया मालिकों को दे रहीलव जिहाद पर मीडिया फिर से अपना असली रंग दिखा रहा है। ऐसा कोई सप्ताह नहीं बीतता जब कन्वर्जन के लिए किसी हिंदू लड़की की हत्या का समाचार न आए। लेकिन इसे रोकने के लिए जैसे ही कुछ राज्य सरकारों ने कानून बनाने की घोषणा की, मीडिया का एक जाना-पहचाना वर्ग सक्रिय हो गया जबकि धोखे से शादी और जबरन कन्वर्जन और न मानने पर हत्या जैसी जघन्य घटनाओं पर यह मीडिया चुप्पी साध लेता है। ऐसे समाचार या तो छापे नहीं जाते और अगर छप ..

आसमान में उड़ने के सपने हुए चूर

आजकल लव जिहाद को लेकर बड़ी चर्चा है। एक बहुत बड़ा वर्ग कहता है लव जिहाद साजिश है। वहीं अपने को सेकुलर कहने वाले कहते हैं, ‘‘लव जिहाद जैसी कोई बात ही नहीं है, यह तो भाजपा और संघ विचार परिवार के मन की उपज है।’’ ऐसे लोगों को ‘लव जिहाद’ नामक उपन्यास एक बार अवश्य पढ़ना चाहिए। इसकी लेखिका हैं स्वाति काले। लेखिका खुद भी लव जिहाद का शिकार रही हैं। हालांकि अब वे लव जिहादी से मुक्त होकर अपने माता-पिता के साथ रह रही हैं। कुल 10 अध्याय में बंटे इस उपन्यास में लेखिका ने आपबीती ..

के.आर. मलकानी: जयंती (19 नवम्बर) पर विशेष आपातकाल और आपबीती

के.आर. मलकानी की पुस्तक ‘द मिडनाइट नॉक’ के  हिंदी रूपांतरण ‘आधी रात कोई दस्तक दे रहा है’ में आपातकाल की भयावहता का  मार्मिक वर्णन किया गया है। यह आपातकाल के उन दिनों को पाठकों के सामने सजीव कर देगा जिन्होंने आपातकाल को नहीं देखा ‘आधी रात कोई दस्तक दे रहा है’ नामक शीर्षक से प्रकाशित पुस्तक सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय विचारक, लेखक, पत्रकार, संपादक श्री के.आर. मलकानी की अंग्रेजी में छपी पुस्तक ‘द मिडनाइट नॉक’ का हिंदी रूपांतर है।  नरेश मेहता ने ..

गेशे जम्पा -उपन्यास की चौदहवीं व पंद्रहवीं कड़ी

नीरजा माधव हमारे भारत देश में तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी।  भारत में रह रहा तिब्बती समुदाय तिब्बत में रह रहे चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। तिब्बत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और ..

धरती हमारी माता विश्व हमारा परिवार

अविनाश त्रिपाठी की फेसबुक वॉल से  पूरी पृथ्वी हमारी मां है या पूरा विश्व एक परिवार है, इस विचार के साथ कोई शर्त हमने नहीं लगाई। जैसे कॉमनवेल्थ संगठन का हिस्सा वही देश बन सकते हैं, जो ब्रिटिश द्वारा शासित देश हों। माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या:। (अथर्ववेद)अर्थात् भूमि मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूं। नमो मात्रे पृथिव्ये, नमो मात्रे पृथिव्या:। (यजुर्वेद) अर्थात् माता पृथ्वी (मातृभूमि) को नमस्कार है, मातृभूमि को नमस्कार है।भूमि को मां मानने का संस्कार वैदिक काल से लेकर आज तक चला आ रहा ..

कोविड-19 :अवरोधों के बाद भी बढ़ रहा आयुर्वेद

डॉ. नितिन अग्रवालइंडियन मेडिकल एसोसिएशन को आपत्ति है कि भारत सरकार कोरोना मरीजों के इलाज में योग और आयुर्वेद को क्यों शामिल कर रही है। उसका यह रवैया ठीक नहीं है। आज पूरी दुनिया में योग और आयुर्वेद को लेकर एक अलग माहौल है। लोग इन दोनों को अपना रहे हैं, इसे समझने की जरूरत है   गत दिनों भारत सरकार ने कोरोना पीड़ितों के इलाज के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सकों के संबंध में कुछ दिशा-निर्देश जारी किए। इसके साथ ही सरकार ने कोरोना मरीजों के इलाज में योग और कुछ आयुर्वेदिक दवाइयों को शामिल करने की अनुमति दे दी। ..

विजयादशमी उत्सव: संकट का समाधान करेगा स्वनिर्भर भारत

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने नागपुर के रेशिमबाग स्थित संघ मुख्यालय पर विजयादशमी उत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर श्री भागवत ने शस्त्र पूजन के बाद उपस्थित स्वयंसेवकों और गणमान्यजनों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश के सामने उपस्थित चुनौतियों की चर्चा की और उनके समाधान का मार्ग सुझाया..

माथे पर चन्दन और हाथ में कलावा बांधकर आठवीं फेल बिलाल खुद को बताता था दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र, मकसद था लव जिहाद

करीब दो वर्षों से बिलाल घोशी हिन्दू लड़की का पीछा कर रहा था। लड़की के घरवालों ने इस बात की शिकायत पुलिस से की थी, मगर उस समय पुलिस ने मामला दर्ज नही किया। फिलहाल, लड़की के अगवा हो जाने के बाद पुलिस लड़की और बिलाल को सरगर्मी के साथ तलाश रही है।..

गेशे जम्पा उपन्यास की तेरहवीं कड़ी

नीरजा माधव हमारे देश में तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी। भारत में रहने वाला तिब्बती समुदाय तिब्बत में चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत है। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। इसके राजनैतिक, सांस्कृतिक और मानवीय अधिकारों के प्रश्न पर ..

तनिष्क के विज्ञापन में क्या गलत है?

दीपक जोशी की फेसबुक वॉल से  एक और ऐतिहासिक फिल्म थी शोले। इसके पटकथा लेखक थे- सलीम-जावेद। फिल्म में वीरू भगवान शंकर की मूर्ति की पीछे छिपकर बसंती से फ्लर्ट करता है। यानी मंदिर का इस्तेमाल फ्लर्टिंग के लिए हो रहा है। गांव के सबसे अमीर ठाकुर परिवार के घर लालटेन जलती है, पर रहीम चाचा की मस्जिद में लाउड स्पीकर बज रहा है।विज्ञापन की आड़ में हिंदू विरोधी कुत्सित मानसिकता का प्रचारयह बताने से पहले 19 साल पीछे ले जाना चाहूंगा। 2001 में सनी देओल की फिल्म आई थी-गदर। एक सरदार (तारा सिंह) व ..

मानवीयता का पर्याय है भारतीय किसान

मनीष वाजपेयी की फेसबुक वॉल से  पुराना भारत इतना शिक्षित और धनाढ्य था कि अपने जीवन व्यवहार में ही जीवन रस खोज लेता था। वह करोड़ों वर्ष पुरानी संस्कृति वाला वैभवशाली भारत था    हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके बैल के मल-मूत्र त्यागने तक खड़ा रहता था, ताकि बैल आराम से नित्यकर्म कर सकें, यह आम चलन था। हमने यह सब बचपन में स्वयं अपनी आंखों से देखा है। जीवों के प्रति यह गहरी संवेदना उन महान पुरखों में जन्मजात ..

काफी है कलंकित पहचान भी बदल देना

पंकज कुमार झा की फेसबुक वॉल से  भगवान की कसम खा कर कहता हूं भाई!हम वो बिहारी नहीं हैं जोलालू बताते रहे हैं आपको। हम वो बिहारी हैं जैसा दिनकर,नागार्जुन, विद्यापति ने आपको बताया है। सच कह रहा हूं भाई!हम वैसे नहीं ठठाते हैं, जैसा लालू ठठाता था,हम वैसा मुस्कुराते हैं, जैसे बुद्ध मुस्कुराते थे।आप तय मानिए भाईवो लाठी हमारी पहचान कभी नहीं रहीजिसे लालू चमकाते रहे थे, हमारे पास तो वो लाठी थीजिसे थाम कर मोहनदास महात्मा बन गए। अब तो मान लीजिये भाई प्लीजकि हमारी वीरता ‘भूराबाल’ साफ करने में ..

गेशे जम्पा - बारहवीं कड़ी

नीरजा माधव हमारे भारत देश में तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी।  भारत में रह रहा तिब्बती समुदाय तिब्बत में रह रहे चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। तिब्बत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और ..

गेशे जम्पा की ग्यारवीं कड़ी

नीरजा माधव हमारे भारत देश में तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी।  भारत में रह रहा तिब्बती समुदाय तिब्बत में रह रहे चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। तिब्बत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और ..

दिल्ली पुलिस ने एनडीटीवी की खबर को बताया झूठा

एनडीटीवी ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा को दंगों के लिए जिम्मेदार 'भड़काऊ भाषण वाला व्हिसल ब्लोअर' कहा है। वहीं पुलिस ने इसे झूठी खबर बताया और एनडीटीवी की रिपोर्ट का खंडन किया है ..

जूझने का नाम है जिंदगी

उमेश चतुर्वेदी की फेसबुक वॉल से  पहले अभाव था, अवसाद नहीं था, अब वैसा अभाव नहीं है, जैसा दो-तीन दशक पहले था, लेकिन अवसाद जबरदस्त है। लेकिन इसी अवसाद में आगे बढ़ना है। जिंदगी से जूझना है और अगर इस जूझन में कोई टूट रहा है तो उसे भी बचाना है।    कुछ साल पहले की बात है..जिस टीवी चैनल में काम कर रहा था..वहां ‘इंटर्नशिप’ करने एक लड़की आई। वह लिख भी बढ़िया लेती थी और जो काम प्रशिक्षु से आमतौर पर कराए जाते हैं, उन्हें भी कुशलता से कर देती थी। ऐसे लोगों के प्रति मेरे मन में ..

गेशे जम्पा -10

नीरजा माधव हमारे भारत देश में तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी।  भारत में रह रहा तिब्बती समुदाय तिब्बत में रह रहे चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। तिब्बत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और ..

गेशे जम्पा -9

गेशे जम्पा -9..

गेशे जम्पा -8

नीरजा माधव तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या हमारे भारत देश में है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी।  भारत में रह रहा तिब्बती समुदाय तिब्बत में रह रहे चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत बने रहे। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। तिब्बत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और मानवीय ..

1400 सालों की ‘जिद’ सब कुछ खत्म कर देगी

सिद्धार्थ ताबिश की फेसबुक वॉल से  आपके मजहब और रसूल को मानने से इनकार का मतलब आपके लिए युद्ध ही है। अफगानिस्तान के बामियान में पत्थरों पर खुदे बुद्ध से कैसा युद्ध था? वहां कौन से बौद्ध थे, जिन्होंने जमीनें कब्जा ली थीं आपकी?आपने अपने मजहब को ‘जिद’ बनाया और उसकी नींव ‘जिद’ पर ही रखी। कुरैशों को उनके देवताओं को पूजने से मना किया। वे नहीं माने तो उनसे युद्ध किया। यहूदियों को उनकी किताबें पढ़ने और पूजा करने से रोका, नहीं माने तो उनसे भी युद्ध किया। इसी तरह, ईसाइयों, पारसियों ..

अपनी भाषा की कितनी कहावतें याद हैं?

सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली पठन सामग्री कभी-कभी दिल को छू जाती हैं। ऐसी ही, एक कविता सोशल मीडिया पर दिखी, जिसके रचनाकार कोई संजय कुंदन बताए जाते हैं। आप भी इस उन्मुक्त कविता का आनंद लीजिए- कितना हंसोड़ रहा होगा वह आदमी जिसने एक ऊंट के साथ मजाक किया होगा उसके मुंह में जीरे का एक दाना रखकर। सचमुच बड़ा फक्कड़ रहा होगा वहबड़ा ही मस्तमौलाजिसने छछूंदर के सिर परचमेली के तेल मले जाने की मजेदार बात सोची होगी। जरा कहावतों के जन्म के बारे में सोचेंकिसने कहा होगा पहली बारकि अधजल गगरी छलकत जाएआए थे हरिभजन ..

हिन्दी एक कठिन भाषा है ! उर्दू, फारसी और अंग्रेजी सीखिए जनाब !

देवांशु झा की फेसबुक वॉल से हिन्दी चैनलों की पत्रकारिता का मूल स्वर है- सरलीकरण। सरल लिखो! सरल लिखो यानी स्थान को जगह लिखो, समाचार को खबर लिखो, पाठशाला को मदरसा लिख दो। कठिन को भी कठिन नहीं लिखो वरना मुश्किल होगी! करीब दस साल पहले एक चैनल से विदा होते हुए जब मैं अपने साथियों से अंतिम बार मिल रहा था, तब एक कम उम्र लड़की ने मुझसे बाय कहा। मैंने जवाब दिया, ‘देखो, जल्दी ही भेंट होगी!’ वह कुछ विस्मय से बोली, ‘सर, आप हिन्दी के बड़े अच्छे और भूले-बिसरे शब्द बोलते हैं।’ मैं ..

गेशे जम्पा

नीरजा माधव तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या हमारे भारत देश में है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी।  भारत में रह रहा तिब्बती समुदाय तिब्बत में रह रहे चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत बने रहे। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। तिब्बत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और मानवीय ..

इस ऐतिहासिक क्षण को पड़ाव मत समझना

तुफैल चतुवेर्दी की फेसबुक वॉल से   यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। तेरह सौ वर्षों से मेरी बैलेंस शीट फाइनल नोटिंग की प्रतीक्षा में है। मेरे हृदय में तेरह सौ वर्षों से अंगारे धधक रहे हैं। इसे इस एक छोटे से घाव की 500 वर्षों बाद सफाई से गंवा मत देना। यह अग्नि जलती रहनी चाहिए। प्रधानमंत्री आज के भाषण में सुहेल देव पासी का जिक्र संकेत है, दिशानिर्देश है, दीर्घ यात्रा के लिये पाथेय है।  राष्ट्र की अवधारणा, जो वेदों से नि:सृत होती है, को व्यष्टिवाचक मान लिया जाए तो उसकी कल्पना पुरुष ..

कालीकट विवि में राष्ट्रविरोधी पाठ्यक्रम

 टी. सतीशनकेरल राष्ट्र और हिंदुत्व विरोधी ताकतों का गढ़ तो है ही। अब इनकी घुसपैठ उच्च शिक्षा में भी हो गई है। हाल ही में कालीकट विवि ने बी.ए. अंग्रेजी साहित्य के पाठ्यक्रम में एक ऐसी पुस्तक को शामिल किया है, जिसमें अरुंधति रॉय के राष्ट्रविरोधी लेख हैचित्र: बीए (अंग्रेजी साहित्य) के तृतीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में शामिल अरुंधति रॉय के राष्ट्रविरोधी लेख के पृष्ठ। रल का कालीकट विश्वविद्यालय इन दिनों एक बार फिर गलत कारणों से चर्चा में है। दरअसल, विश्वविद्यालय ने सी.आर. मुरुगन बाबू और प्रो. आबिदा फारूकी ..

‘राजनीतिक दिशानिर्देश’ पर खबरें गढ़ता मीडिया

कुछ मीडिया घरानों की फर्जी खबर और रिपोर्ट पर प्रियंका वाड्रा बहुत फुर्ती से ट्वीट करती हैंभातीय मीडिया के  एक वर्ग विशेष के लिए बीता सप्ताह बहुत कठिन रहा। राम मंदिर को लेकर अकुलाहट तो है ही, राफेल और नई शिक्षा नीति को लेकर भी कुलबुलाहट मची रही। खुद को सेकुलर बताने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से लेकर रक्षा और शिक्षा तक की नीतियों में हिंदू-मुसलमान का कोण तलाश रहे हैं। मीडिया का यह रवैया कई तरह की समस्याएं पैदा करता है। कोई झूठी या मनगढ़त खबर अचानक सुर्खियों में छा जाती है और कोई वास्तविक मुद्दा ..

गेशे जम्पा

 नीरजा माधव तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या हमारे भारत देश में है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी।  भारत में रह रहा तिब्बती समुदाय तिब्बत में रह रहे चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत बने रहे। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। तिब्बत के राजनीतिक, सांस्कृतिक ..

मीडिया से गायब होती मर्यादा

सेकुलर मीडिया बिना जांच-पड़ताल खबरें छापकर समाज और देश को कर रहा है बदनामदिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों पर मीडिया का एक बड़ा वर्ग किसी संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा है। जैसे ही यह तथ्य सामने आया कि कई हिंदू पीड़ितों को झूठी शिकायतों के आधार पर आरोपी बनाया गया है, ताकि पुलिस अपनी कार्रवाई में मजहबी आधार पर संतुलन दिखा सके, वैसे ही एक नया दुष्प्रचार शुरू हो गया। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने फर्जी खबर छापी कि पुलिस ने आदेश दिया है कि हिंदू आरोपियों से नरमी बरती जाए। यह मनगढ़ंत समाचार है, क्योंकि अधिकांश ..

गेशे जम्पा

नीरजा माधव तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या हमारे भारत देश में है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी।  भारत में रह रहा तिब्बती समुदाय तिब्बत में रह रहे चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत बने रहे। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। तिब्बत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और मानवीय ..

गेशे जम्पा

नीरजा माधव तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या हमारे भारत देश में है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी। अपने देश को आजाद कराने की उम्मीद लिए अपनी निर्वासित सरकार को भारत के हिमाचल प्रदेश में पीठासीन किया। भारत में रह रहा तिब्बती समुदाय तिब्बत में रह रहे चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे ..

‘राजकुमारी’ की पालकी के कहार

कुछ सेकुलर पत्रकार प्रियंका गांधी वाड्रा की पालकी उठाए घूम रहे हैंउत्तर प्रदेश में चुनाव होने में अभी वैसे तो लगभग 2 साल हैं, लेकिन मीडिया ने अभी से माहौल बनाना शुरू कर दिया है। ऐसा कांग्रेस के इशारे पर हो रहा है। माना जा रहा है कि कांग्रेस की ‘राजकुमारी’ प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं। जनता के बीच उनका और उनकी पार्टी का कोई आधार हो न हो, लेकिन मीडिया के एक वर्ग के लिए उनकी यह इच्छा पोप के आदेश से कम नहीं है। लिहाजा ‘राजकुमारी’ को एक बार फिर ..

असली भारत क्या है?

सच्चिदानंद जोशी की फेसबुक वॉल सेइंडिगो की उड़ान से दिल्ली से बेंगलुरु की यात्रा (लॉकडाउन से पहले) कर रहा था। यहां विमान सेवा के नाम का उल्लेख किसी विज्ञापन के लिए नहीं, बल्कि इसलिए किया कि आप जान जाएं कि विमान सेवा विशुद्ध भारतीय (प्राप्त जानकारी के अनुसार) हैइंडिगो की उड़ान से दिल्ली से बेंगलुरु की यात्रा (लॉकडाउन से पहले) कर रहा था। यहां विमान सेवा के नाम का उल्लेख किसी विज्ञापन के लिए नहीं, बल्कि इसलिए किया कि आप जान जाएं कि विमान सेवा विशुद्ध भारतीय (प्राप्त जानकारी के अनुसार) है और इसकी अधिकांश ..

किसके इशारे पर नाच रहा सेकुलर मीडिया

चीनी झुकाव वाले मीडिया की भारत-भूटान संबंधों में दरार की शरारती कोशिशदिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मुख्यधारा मीडिया का सांप्रदायिक चरित्र भी हर दिन सामने आ रहा है। एनडीटीवी की तो विशेषज्ञता ही दंगाइयों के पक्ष में रिपोर्टिं..

गेशे जम्पा

नीरजा माधव तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या हमारे भारत देश में है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी। अपने देश को आजाद कराने की उम्मीद लिए अपनी निर्वासित सरकार को भारत के हिमाचल प्रदेश में पीठासीन किया। तब से लेकर आज तक जब भी तिब्बत में आजादी की आग भड़की, उसकी आंच भारत और चीन के सम्बन्धों ने भी ..

हिंदू और मंदिर पर ही सेकुलरिज्म का उबाल क्यों?

सोनाली मिश्रा की फेसबुक वॉल सेहमारी आस्था क्या है, व्रत रखना, रोजे रखना, फास्टिंग करना, घूंघट करना, बुर्का पहनना, ईसाई नन वाले परिधान पहनना? इस पर अपने-अपने मतानुसार विचार रखे जाएं या फिर स्व-चेतना पर छोड़ दिया जाए। मगर जब आपके सामने यह मामला आए कि ..

गेशे जम्पा

नीरजा माधव   तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या हमारे भारत देश में है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी। अपने देश को आजाद कराने की उम्मीद लिए अपनी निर्वासित सरकार को भारत के हिमाचल प्रदेश में पीठासीन किया। तब से लेकर आज तक जब भी तिब्बत में आजादी की आग भड़की, उसकी आंच भारत और चीन के सम्बन्धों ..

चीनी एजेंडे पर भारतीय मीडिया

चीन के साथ सीमा विवाद को  लेकर  मीडिया का  एक  वर्ग लगातार भारत विरोधी  खबरें  परोस रहा हैपिछले लगभग दो दशक में चीन ने भारतीय मीडिया के अंदर जो पैठ बनाई है, उसके परिणाम सामने आने लगे हैं। इस संवेदनशील समय में कई मीडिया संस्थान चीन की बोली बोल रहे हैं। वे चीन की तरफ से झूठी खबरें फैलाने से भी बाज नहीं आ रहे। पहले चाइनीज वायरस को लेकर रिपोर्टिंग में इसके लक्षण दिखाई दिए थे, अब लद्दाख में हुई झड़प के बाद तो मानो कुछ छिपाने को ही नहीं बचा है। सबको पता है कि कौन-कौन चीन के ..

कहां गए कॉमरेड!

  (रविशंकर प्रसाद की फेसबुक वॉल से)आज जब देश का मजदूर समाज अपनी हालत से दुनिया को रुला रहा है, झकझोर रहा है तो मजदूरों के ठेकेदार क्या कर रहे हैं? आप पाएंगे कि वे ऐसा कुछ कर रहे हैं, जिसका मजदूरों से  कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने अपने दफ्तरों के दरवाजे मजदूरों के लिए बंद कर दिए हैं। दिल्ली स्थित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का दफ्तर।आपातकाल के वक्त कांग्रेस के ‘भाट’ और ‘चारण’ कुछ घंटे के लिए बहक गए थे। तब गलती से वह लिख बैठे थे- इंदू जी, इंदू जी, क्या हुआ आपको- ..

सामाजिक दरार पैदा करने वाली पत्रकारिता

सेकुलर मीडिया दलाली के साथ-साथ समाज में दरार पैदा कर रहा है।  दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल करने का काम चल रहा है। पुलिस पूरी जांच-पड़ताल के बाद वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ गिरफ्तारियां कर रही है। इसके बाद भी मीडिया का एक वर्ग किसी दंगाई के गर्भवती होने, तो किसी के छात्र होने के नाम पर सहानुभूति पैदा करने की कोशिश कर रहा है। ठीक उसी तरह जैसे कश्मीरी आतंकी सरगनाओं की पहचान ‘गणित के टीचर’ के तौर पर करने की कोशिश होती है। आरोपियों में सभी वर्ग के लोग शामिल ..

फर्जी दुकान, फीके पकवान, बड़बोले ‘विद्वान’

अमेरिका की तर्ज पर भारत में दंगों की  आस में बैठा चीनी फरमाबरदार  सेकुलर मीडियाअमेरिका की तरह भारत में दंगे क्यों नहीं हो रहे? आखिर किसी निर्दोष को मारा क्यों नहीं जा रहा? सबकुछ ठीक क्यों चल रहा है? ये कुछ प्रश्न हैं जो पिछले सप्ताह से भारतीय मीडिया के एक जाने-पहचाने वर्ग में बार-बार उछल रहे हैं। पहले ‘आत्मनिर्भर भारत’अभियान और अब चीन के साथ भारतीय सेना का कड़ा रवैया, ये वे बड़े कारण हैं जिनके चलते उन पत्रकारों में बहुत बेचैनी है जिनकी गर्भनाल चीन से जुड़ी हुई है। वरना यह कैसे होता ..

धांधली पर खुला मुंह विज्ञापनों ने सिला

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के  बाद भी कोरोना संकट पर झूठी खबरें परोस रहा मीडिया का एक वर्गपूरे विश्व में महामारी फैलाने के बाद चीन अब एक तरह का छद्म युद्ध शुरू कर चुका है। यह युद्ध मीडिया किसी भी देश में वहां की मीडिया के माध्यम से अपनी मर्जी का झूठ फैलाता रहा है।  बीते कई सालों में चीन ने वामपंथी दुष्प्रचार तंत्र को विकसित किया है। अपने देश में भी जब चीन से जुड़ा कोई विवाद होता है तो कुछ मीडिया संस्थानों और पत्रकारों की गतिविधियां देखकर समझ में आ जाता है कि वे किसके लिए काम कर रहे हैं। एनडीटीवी ..

‘विश्वस्त मीडिया’ का चीन की शह पर भारत-द्वेष

‘‘आत्मनिर्भर भारत’ से चिढ़ा मीडिया झूठे तथ्यों और फर्जी खबरों  के  सहारे चीन की तरफदारी में जुटानेपाल से कथित सीमा विवाद को भी भारतीय मीडिया के वामपंथियों ने तूल देने की पूरी कोशिश की। शायद इसलिए क्योंकि चीन ऐसा चाहता है। दूसरी तरफ मीडिया का वह अधकचरा वर्ग भी है जिसे नेपाल-भारत संबंधों का इतिहास और संवेदनशीलता की समझ नहीं है। एबीपी न्यूज ने तो मयार्दा की सारी हदें तोड़कर अभिनेत्री मनीषा कोइराला के लिए लिखा कि वह ‘खाती भारत का और गाती चीन का’ हैं। ऐसा वही कर सकता ..

‘जिसे अब आप अपना सबकुछ मानते हैं वह कितने रूपों में चलकर आपके पास पहुंचा है!’

(ताबिश सिद्दिकी की फेसबुक वॉल से)अरब के लोग दैवीय सहायता के लिए पत्थर को पूजते थे। सांप को वे जिन्न कहते थे जो उनके लिए अल्लाह का ही एक रूप होता था। अरबों के लिए ‘अल-इलाह’ कोई भी हो सकता था। किसी के लिए देवी उज्जा सब कुछ थीं तो किसी के लिए देवता हुबल। किसी के लिए वे इलाह होते थे तो किसी के लिए अल-इलाह। ऊल्लाह अरबों के लिए सबसे बड़ा देवता था। अल यानी बड़ा और इलाह मतलब देवता। मतलब सबसे बड़ा देवता। अरब के लोग अपने सबसे बड़े देवता को ‘अल-इलाह’ यानी ‘अल्लाह’ कहते ..

‘कांग्रेस भक्त मीडिया’ और कोरोना का सच

‘केरल मॉडल’ के गुणगान गाने वाला मीडिया असम में कोरोना पर हुए जबरदस्त नियंत्रण पर एक लाइन नहीं लिखता। दिल्ली में जमाती उपद्रव और केजरीवाल की नाकामी छुपाने वाले मीडिया को प.बंगाल में हिंदुओं का दमन नहीं दिखता  देश-विदेश का मीडिया इन दिनों केरल के रंग में रंगा दिख रहा है। हर जगह चाइनीज वायरस से लड़ने में केरल सरकार की ‘सफलता’ का महिमागान है। क्या टाइम्स आॅफ इंडिया, क्या आजतक और क्या एनडीटीवी। सीएनएन और बीबीसी भी केरल सरकार के ‘चमत्कारी’ काम को देखकर लहालोट ..

सच उजागर होता गया, वे मुंह फेरे खड़े रहे

पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दिल्ली में कोरोना संक्रमण को संभालने में दिख रही नाकामी और आंकड़ों को छुपाने वाले मीडिया ने फर्जी खबरें छापकर देश को गुमराह किया। ‘दुबई की राजकुमारी’ के चहेते कांग्रेसियों को छुपाया ..

'फेक न्यूज़ लोकतंत्र और पत्रकारिता के लिए खतरा'

नारद जयंती के अवसर पर नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स इंडिया द्धारा कोरोना काल में फर्जी खबरों की समस्या पर एक वेबिनार कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गलत उद्देश्य से फर्जी खबरों को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया    केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गलत उद्देश्य से फर्जी खबरों को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है और कहा है कि सरकार इस संबंध में कड़े कानूनी उपाय करने का विचार कर रही है। जावड़ेकर ने नारद जयंती के अवसर पर नेशनल यूनियन ..

उत्तर प्रदेश से नकारात्मक समाचार ढूंढकर भ्रम फैलाने में लगा है सेकुलर मीडिया

उत्तर प्रदेश से नकारात्मक समाचार ढूंढने की जिम्मेदारी कई संवाददाताओं को दी गई है। अब जब कुछ खास नहीं मिल रहा तो झूठ ही गढ़ने का काम जारी है। देश में चायनीज वायरस फैलाने में तब्लीगी जमात के योगदान पर पर्दा डालने का काम जारी है। इसी उद्देश्य से अचानक ऐसी खबरें आने लगीं कि जमात के लोग बड़ी संख्या में ‘प्लाज्मा’ दान कर रहे हैं। ये वे ‘दानवीर’ थे जिनमें वायरस पाया गया था और उपचार के बाद जो स्वस्थ घोषित किए गए। उनके ‘प्लाज्मा दान’ को महादान बताने की होड़ लग गई। अखबारों ..

पत्रकारिता पर हमले से आंख फेरता सेकुलर मीडिया

पालघर की घटना में साधुओं की निर्मम हत्या का सच छुपाने वाले मीडिया की निष्ठाएं देश से इतर देश विरोधी ताकतों के पास गिरवी रखी हैं। मीडिया के इस वर्ग को न सच दिखायी देता है,न पत्रकारिता के मूल्यों से कोई सरोकार है एक समय था जब यूरोपीय समाज में पोप पद आलोचना से परे माना जाता था। बड़े-बड़े सम्राट उसके आगे सिर झुकाते थे और पोप का कहा ही कानून माना जाता था। दुनिया ने उस व्यवस्था को नकार दिया, लेकिन भारत में एक पूरा तंत्र है जो पोप प्रणाली में जी रहा है। उनकी पोप सोनिया गांधी हैं। मुख्यधारा मीडिया का एक ..

कांग्रेसी चैनल के झूठ का कांग्रेस से नाता

एबीपी माझा चैनल ने मुंबई में झूठी खबर फैलाई, पर सिर्फ संवाददाता को बलि का बकरा बनाकर जेल भेजा  अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में मीडिया का एक वर्ग कैसे माफिया की तरह काम करता है, इसका नमूना पिछले दिनों दिखा। मुंबई में एबीपी माझा चैनल के संवाददाता को लॉक डाउन के बाद ट्रेन चलने की झूठी खबर फैलाने के आरोप में जेल भेजा गया। उसी की खबर पर बांद्रा रेलवे स्टेशन पर हजारों प्रवासी मजदूर पहुंच गए थे। ऐसी झूठी खबरें तो रोज ही फैलाई जाती हैं, पर कभी किसी संवाददाता की गिरफ्तारी नहीं हुई। खबर झूठी थी, पर ..

यह युद्ध है, इसे सैनिक लड़ेंगे

राजीव मिश्रा की फेसबुक वॉल से  दिल्ली से बिहार, उत्तर प्रदेश के मजदूरों की भगदड़ और पलायन का दृश्य देख कर लोगों का कवि हृदय जाग गया है। लॉजिक (तर्क) और कॉमन सेंस (व्यावहारिक बुद्धि) की जगह करुण रस बह रहा है। हाय गरीब, हाय गरीब का रुदन सुन रहा हूं। मेरे अंदर का कवि दुख और गरीबी देख कर नहीं जागता। इतना भी क्रूर नहीं हूं कि दूसरों के दुखों की आंच पर अपनी संवेदनाओं के पराठे सेंकूं। अगर सचमुच इतनी ही संवेदना होती तो उन्हीं गरीबों के बीच रह कर उनका इलाज कर रहा होता, उनके जैसा जीवन जी रहा होता। ..

हृदय में गहराता राष्ट्र का मर्म

   आज राष्ट्र के स्वत्व के संदर्भ में नकारात्मक टिप्पणियों को सही मानने की प्रवृत्ति देखकर लगता है कि टिप्पणीकार और उसके पक्ष में खड़े होने लोगों को अपने देश के स्वत्व की जानकारी शायद कम है। इसी पृष्ठभूमि पर एक सार्थक विवेचन है ‘भारत के राष्ट्रत्व का अनंत प्रवाह’। राष्ट्र को ‘नेशन’ का पर्याय मानने, राज्य को राष्ट्र के समतुल्य समझने के कारण बहुत सारे संशय उत्पन्न होते हैं। वास्तव में हमारे राष्ट्र का प्रादुर्भाव अंग्रेजों के आने के बाद, उनके द्वारा अखिल ..

भारत में किसका एजेंडा चला रहा है बीबीसी ?

जहां तक भारत में बीबीसी की सेवाओं का प्रश्न है उसकी भूमिका बेहद संदिग्ध है। ब्रिटिश सरकार का यह संस्थान भारत विरोधी एजेंडे और फेक न्यूज़ की बड़ी फ़ैक्ट्री बनकर उभरा है..

कोरोना के सेकुलर मसीहा की सचाई

एनडीटीवी ने ये पूरा झूठ गढ़ा था ताकि इसके नाम पर वो यह जता सके कि महामारी के इस समय में मुस्लिम समुदाय जो बर्ताव कर रहा है वो बिल्कुल उचित है। अगर वो महामारी फैला रहे हैं तो क्या हुआ, दवा भी तो ढूंढ रहे हैं..

सोनिया गांधी की नाजायज मांग

शिशिर सोनी की फेसबुक वॉल से समझ से परे सलाह: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल लगता है सोनिया गांधी पर भी अब राहुल गांधी का असर होने लगा है। तभी वह राहुल गांधी की तरह बहकी-बहकी बातें कर रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि मीडिया को दिया जाने वाला विज्ञापन दो साल के लिए बंद किया जाए और इस राशि का उपयोग कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में किया जाए। वह मीडिया की बुनियाद पर चोट करने को क्यों कह रही हैं? जाहिर है कि उनका गुस्सा राहुल गांधी को लेकर मीडिया के ठंडे ..

जमात का तमाशा

 तब्लीगी जमात की हरकतों से वायरस के सामुदायिक संक्रमण का खतरा बढ़ा  दिल्ली से लेकर पूरे देश में तब्लीगी जमात का तमाशा जारी है। सेकुलरवाद के नाम पर अक्सर मीडिया ऐसे मामलों पर चुप्पी साध लेता है। लेकिन इस बार शायद जनता का दबाव ऐसा था कि कुछ चैनलों और अखबारों को इस असभ्य जमात की मजहबी पहचान का जिक्र करना पड़ा। डॉक्टरों पर थूकने के मामले हों या मेडिकल टीमों पर हमले, ये ऐसी घटनाएं थीं जिनका बचाव करना उस मीडिया के लिए भी संभव नहीं था, जो अब तक यह काम पूरी लगन के साथ करता रहा है। जिस किसी ने ..

अब सेकुलर लॉबी यूपी को लेकर झूठी खबरें फैलाने में जुटी

ऐसे समय में जब पूरा देश चीन के फैलाए वायरस से युद्ध लड़ रहा है, कुछ लोग देश में भ्रम की स्थिति पैदा करने में जुटे हैं। इसी प्रयास में एक समाचार फैलाया गया कि उत्तर प्रदेश के भदोही में एक महिला ने अपने 5 बच्चों को गंगा नदी में फेंक दिया..

सेकुलर मीडिया अफवाह और कांग्रेस

मीडिया के ज़रिए एक अफ़वाह उड़ाई जा रही है कि शेयर बाज़ार में गिरावट का फ़ायदा उठाकर चीन भारतीय कंपनियों के शेयर ख़रीद रहा है। भाषा ऐसी कि आपको लगेगा कि चीन भारतीय कंपनियों को ख़रीदकर कोई बहुत बड़ा आर्थिक हमला कर रहा है। इस बात के समर्थन में अख़बारों और चैनलों के पास जिस ‘महान अर्थशास्त्री’ का बयान है वो हैं राहुल गांधी ..

अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अफवाहें फैला रहे एफएम चैनल

इन दिनों देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी की हालत कुछ ऐसी है कि निजी एफ़एम रेडियो अब अफ़वाहें फैलाने का भी बड़ा ज़रिया बन चुके हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया समूह का एफ़एम चैनल रेडियो मिर्ची अक्सर इस काम में आगे रहता है।..

पीएम मोदी के खिलाफ कांग्रेस का अफवाह तंत्र सक्रिय

कांग्रेस का दुष्प्रचार तंत्र अपने ही गढ़े इस संदेश के आधार पर कोई अफ़वाह फैला पाता ख़ुद प्रधानमंत्री ने आगे आकर इसका न सिर्फ़ खंडन किया, बल्कि साफ़ लिखा कि यह मोदी को विवादों में घसीटने की कोई ख़ुराफ़ात लगती है..

देश को अराजकता की ओर धकेलने का षड्यंत्र

तब्लीगी जमात की हरकतों से पूरा देश चिंतित है, लेकिन मीडिया का एक बड़ा वर्ग उसका बचाव कर रहा है। आजतक समेत कई मीडिया घरानों ने झूठ फैलाया कि मरकज से लोगों को निकालने के लिए पुलिस को बहुत पहले अर्जी दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। जबकि सारा सच सबूतों के साथ सामने आ चुका था..