तकनीक

ट्विटर और कू : क्या करे आम आदमी?

माइक्रोब्लॉगिंग फ्लेटफॉर्म सिर्फ चर्चित हस्तियों के काम के ही नहीं हैं बल्कि आम लोगों के लिए भी इनकी बहुत उपयोगिता है। इससे न सिर्फ आप खबरों के बारे में अपडेट रह सकते हैं बल्कि राय भी ले-दे सकते हैं, शिकायत कर सकते हैं, सूचित कर सकते हैं, अपने उत्पाद बेच सकते हैं, भर्तियां कर सकते हैं और इस रह की अनेक चीजों से लाभान्वित हो सकते हैं..

थर्मल इंजीनियर दिवस पर विशेष: कोयला संयंत्रों के बजाय अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ाएं कदम

आज दुनियाभर में वायु प्रदूषण एक बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है और इस समस्या के लिए थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाला उत्सर्जन भी एक बड़ा कारण है ..

प्रीडिक्टिव एनालिटिक्स से हो सकती है बीमारी की भविष्यवाणी

तकनीकी अब स्वास्थ्य क्षेत्र के हालात बदल देने की दिशा में बढ़ गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और प्रीडिक्टिव एनालिटिक्स जैसी जटिल सी सुनाई देने वाली तकनीकों का प्रयोग करके हजारों को बीमारी का शिकार होने से बचाया जा रहा है।..

जब मस्तिष्क से नियंत्रित हों मशीनें

माइक्रोसॉफ्ट को एक ऐसे उपकरण के लिए पेटेंट मिल चुका है, जिसके जरिए उपयोगकर्ता केवल सोचकर ही मशीनों और उनके भीतर चलने वाली प्रक्रियाओं को नियंत्रित कर सकेगा..

स्वदेशी पुर्जे से बनी प्राणरक्षक मशीन

इंदौर के रजनीश शर्मा और उनके साथियों ने ऑक्सीजन बनाने वाली एक मशीन तैयार की है, जो उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जिन्हें इन दिनों ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है|..

दृष्टिबाधितों की बाधा दूर करती नई तकनीक?

तकनीक की महत्ता इसी बात में है कि वह हर एक व्यक्ति के लिए सुविधाजनक स्थितियों का निर्माण करे, भले ही वह व्यक्ति शारीरिक दृष्टि से दूसरों से थोड़ी बहुत भिन्नता ही क्यों न रखता हो। छृष्टिहीन लोगों के लिए सौगात लाई है नई तकनीकं..

ईमेल का मतलब निजता से समझौता नहीं

आज ईमेल का जमाना है। इसके जरिए आप अपना संदेश एक सेकेंड में कहीं भी भेज सकते हैं। आपके संदेश को कोई तीसरा न पढ़ ले, इसके लिए अनेक ‘फीचर’ हैं, जिनका उपयोग करके आप अपनी निजता की रक्षा कर सकते हैं..

अपनी इंटरनेट खोज का दायरा बढ़ाइए

इंटरनेट पर सब कुछ उपलब्ध है। किताब से लेकर सवाल-जवाब; तक, समाचार, संगीत, नौकरी और हवाई किराये से लेकर जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री तथा शादी-विवाह, सबके लिए सर्च इंजन उपलब्ध है। बेहतर खोज परिणाम चाहते हैं तो गूगल से इतर इन सर्च इंजनों पर जाइए ..

नि:शुल्क सॉफ्टवेयर भी होते हैं उपयोगी

मोबाइल और कम्प्यूटर के लिए आज ढेरों ऐसे सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जो बिना शुल्क मिल जाते हैं। अक्सर लोग मान लेते हैं कि ये सॉफ्टवेयर उतने कारगर और उपयोगी नहीं होते, पर यह धारणा सही नहीं है। कैसे? आइए, देखते हैं ..

हिंदी में काम करते हैं तो यह जानना जरूरी

अगर आपको घर से ही अपने कार्यालय के वार्षिक प्रतिवेदन की फाइल सही व्यक्ति तक पहुंचानी है या किसी प्रकाशक को किताब की पांडुलिपि भेजनी है तो 25 मेगाबाइट की सीमा वाले ईमेल की बजाए इसे वीट्रांस्फरडॉटकॉम से भेज सकते हैं..

जीवन सुगम बनाती तकनीक की राह

आजकल जाने-अनजाने लोग तकनीक के साथ नजदीकी रिश्ता कायम करते जा रहे हैं। वक्त के इस दौर में यह जरूरी भी है। मोबाइल फोन में ही दुनियाभर की सुविधाएं देने वाले एप उपलब्ध हैं। इन्हें आजमाइए और जीवन सुगम बनाइए ..

मानसिक तनाव और तकनीकी मनोचिकित्सक

तनाव, हताशा, अवसाद आदि अनेक मनोवैज्ञानिक समस्याओं के बारे में अब मदद ली जा सकती है चैटबॉट से। मनोरोगियों के लिए अपने समय और शर्तों पर इन रोगों के समाधान का एक जरिया है चैटबॉट..

साइबर अपराधियों की चालाकियों का तोड़

जरूरी नहीं है कि साइबर अपराध वेबसाइटों, इंटरनेट, ईमेल, रेंसमवेयर और मैलवेयर के जरिए ही हो। आजकल व्हाट्सएप, फेसबुक, फोन, एसएमएस और पेटीएम का भी अपराधी इस्तेमाल कर रहे हैं ..

जब संकट में पड़े तकनीक तब क्या कीजै

आने वाले दौर में कृत्रिम मेधा से संचालित होने वाली तकनीकों को लेकर एक धर्मसंकट खड़ा हो सकता है। अब इंसान के काम को सरल बनाने वाली तकनीकों को लेकर कुछ नियम-कायदे बनाना वक्त की जरूरत है..

अब आपकी सेहत को संभालेगी तकनीक

‘डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर’ अस्पतालों या डॉक्टरों के क्लिनिक में आने वाले फोन पर नजर रखते हुए इस बात का अंदाजा लगा लेता है कि किस इनसान को दिल का दौरा पड़ा होगा या पड़ सकता है..

कभी तो परहेज करें मोबाइल-लैपटॉप से

आज ज्यादातर लोग सोने, कामकाज और जरूरी गतिविधियों पर खर्च होने वाले समय के बाद बचा-खुचा लगभग सारा वक्त मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप के हवाले कर रहे हैं। यह आदत बीमारियां ही लाएगी..

अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक कैसे लगा सकता है फेसबुक ?

अगर हमारे देश में 'फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन' यानी अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार है, तो फेसबुक उसको कैसे सेंसर कर सकता है? कोई क्या बोलेगा, क्या देखेगा और क्या नहीं देखेगा, यह फेसबुक कैसे निर्धारित कर सकता है ? ..

’20 से निकलेंगी ’21 की तकनीकें

2021 में स्वचालित वाहनों की तकनीकों का और भी अधिक विकास होगा और ऐसे मॉडल सामने आएंगे जिन पर मनुष्यों की ही तरह भरोसा किया जा सके। इसी तरह डेस्कटॉप एवं लैपटॉप और निखर कर आएंगे..

कुछ खास ही होंगे इंटरनेट से जुड़े शहर

बालेन्दु शर्मा दाधीचइंटरनेट से जुड़े स्मार्ट शहर चुस्त-दुरुस्त और व्यवस्थित रखे जा सकेंगे।उनमें स्पष्ट सामाजिक, प्रशासनिक और आर्थिक कार्यकुशलता सुनिश्चित की जा सकेगी। ‘सिस्को’ का अनुमान है कि इन सब व्यवस्थाओं के चलते इन शहरों में अगले बीस वर्ष के दौरान ऊर्जा की खपत में 30 प्रतिशत तक की कमी की जा सकेगी स्मार्ट शहर की एक परिकल्पना स्मार्ट शहर ऐसे ‘कनेक्टिड शहर’ हैं जिनके भीतर की आधारभूत संरचना के विभिन्न अवयव स्वतंत्र रूप से काम नहीं करते बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते ..

तकनीक ‘इंटेलिजेंट’ तो शहर क्यों न हों ‘स्मार्ट’!

बालेन्दु शर्मा दाधीचदुबई और डेनमार्क जैसे देशों में तकनीक और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए शहरी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, इसलिए भारत में भी स्मार्ट सिटी विकसित की जा रही हैं। जरूरत इस बात की है कि नए शहर बसाने से पहले उसकी योजना इस प्रकार बनाई जाए ताकि उनका संचालन अत्यंत कार्यकुशलता के साथ किया जा सकेभारत ही नहीं, दुनियाभर के शहरों पर बढ़ती आबादी का दबाव है। तकनीक, आर्थिक, सुख-सुविधाओं और पर्यावरणीय परिवर्तनों ने स्मार्ट सिटी में रुचि पैदा की हैडेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में यातायात, हवा ..

सूचनाओं का पुख्ता तंत्र है कल का मंत्र

बालेन्दु शर्मा दाधीचऐसा नहीं लगता कि ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेन्सी का विकास किसी आपराधिक मकसद से हुआ और यह तकनीकी दुनिया में सक्रिय ऐसे लोगों के दिमाग की उपज है जो मुक्त की अवधारणा में यकीन रखते हैं-जैसे मुक्त सॉफ्टवेयर, मुक्त कोड, मुक्त सूचनाएं, मुक्त लेन-देन आदि। लेकिन इनके लाभ असाधारण हैंदुनिया के लेन-देन तथा सूचना संग्रहण प्रणालियों का भविष्य है ब्लॉकचेन मेंब्लॉकचेन दुनिया भर में फैले लाखों कंप्यूटरों पर सूचनाओं को कूट (एनक्रिप्टेड) संकेतों के रूप में सुरक्षित रखने की प्रणाली है। यह हर क्षेत्र ..

बिना बैंक पैसे का लेन-देन

बालेन्दु शर्मा दाधीच पुराने तौर-तरीकों को ध्वस्त करने के लिए बनी ब्लॉकचेन तकनीक। यह पुरानी कार्यप्रणालियों का विकल्प है और बैंकिंग व्यवस्था पर संस्थागत एकाधिकार को चुनौती देती है। अब तक हम अपना लेन-देन वित्तीय संस्थानों के जरिए करते आए हैं, लेकिन अब उसी तरह का लेन-देन बिना बैंक जाए ब्लॉकचेन के जरिए भी किया जा सकता हैबिटकॉइन नामक डिजिटल क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन की व्यवस्था के रूप में हुआ ब्लॉकचेन का विकास जब एक बिटकॉइन की कीमत लाखों रुपयों तक पहुंच गई तो आम लोगों के मन में भी ‘क्र..

अब मशीनें भी इंटरनेट पर!

बालेन्दु शर्मा दाधीच‘इंटरनेट आफ थिंग्स’ के आने से हम एक और क्रांतिकारी दौर में आ गए हैं जब जीवन के तमाम क्षेत्रों में इंटेलिजेंट उपकरण अपनी जगह बनाते जा रहे हैं। ये उपकरण हमारे जीवन को बेहतर और ज्यादा सुविधाजनक बनाने वाले हैं। वे हमारे लिए बेहतर इलाज, बेहतर सुरक्षा और बेहतर परिवहन आदि का भी रास्ता खोलेंगेअभासी सहायकों, स्मार्ट शहरों और स्वचालित कारों के दौर में जिस प्रौद्योगिकी की खूब चर्चा हो रही है, उनमें से एक है-इंटरनेट आफ थिंग्स। सवाल उठेगा कि क्या ऐसा भी कोई इंटरनेट हो सकता है-इंटरनेट ..

यहां क्रेता और विक्रेता दोनों फायदे में!

बालेन्दु शर्मा दाधीचक्लाउड कम्प्यूटिंग एक ऐसी व्यवस्था है, जहां उपभोक्ता को ढांचागत खर्च करने की जरूरत नहीं होती, वहीं क्लाउड सेवा प्रदाता कंपनियों की भी नियमित कमाई होती है। खास बात यह है कि जरूरत के अनुसार इस सेवा का उपयोग किया जा सकता है।  इसके अलावा, क्लाउड पर रखे जाने वाले डाटा भी निजी स्तर पर रखे जाने वाले डाटा के मुकाबले अधिक सुरक्षित होते हैंऐसे कम क्षेत्र होते हैं, जहां ग्राहक भी लाभ की स्थिति में हो और विक्रेता भी। क्लाउड कंप्यूटिंग में ऐसा ही है। मान लीजिए कि आपकी कंपनी एक-दो महीने ..

डिजिटल दुनिया में आप बिक रहे कानूनन!

बालेन्दु शर्मा दाधीचतकनीक ने न केवल हमारे जीवन को आसान बनाया है, बल्कि जीवन स्तर में सुधार के साथ देश-दुनिया के विकास को एक नया आयाम प्रदान किया है। आज के युग में इनसान पूरी तरह विज्ञान और तकनीक पर निर्भर है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जो तकनीक से अछूता हो। ‘तकनीक’ नाम से इस नियमित स्तंभ में तकनीक के विभिन्न पक्षों की सरल, सुगम्य भाषा में चर्चा होगी और होगा इस क्षेत्र की नई उपलब्धियों का ब्यौराभाजपा ने 2009 का लोकसभा चुनाव लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में लड़ा था। उस समय पार्टी ने आॅनलाइन ..

कंप्यूटिंग में ‘क्लाउड’ का कमाल

बालेन्दु शर्मा दाधीचतकनीक ने न केवल हमारे जीवन को आसान बनाया है, बल्कि जीवन स्तर में सुधार के साथ देश-दुनिया के विकास को एक नया आयाम प्रदान किया है। आज के युग में इनसान पूरी तरह विज्ञान और तकनीक पर निर्भर है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जो तकनीक से अछूता हो। इस बार ‘तकनीक’ स्तंभ में हम कंप्यूटिंग में अक्सर सुने जाने वाले शब्द ‘क्लाउड’ की बात करेंगे कंप्यूटिंग में क्लाउड शब्द की कहानी आखिर क्या है? 1996 में इस शब्द का पहली बार प्रयोग हुआ था लेकिन आज भी अधिकांश लोगों के लिए ..

यहां ताकत बने तो आगे निकल जाएंगे हम

तकनीक की दुनिया में तीसरा बड़ा मौका आ रहा है भारत के पास। यह उतना ही बड़ा हो सकता है जितना कि कंप्यूटर और इंटरनेट का आगमन था। यह है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कृत्रिम बुद्धिमत्ता का क्षेत्र, जहां भारत के लिए संभावनाएं उभर रही हैं। ऐसे में इसका पूरा फायदा उठाकर हम अपना कायापलट कर सकते हैं..

भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का किया सफल परीक्षण, अरब सागर में मौजूद लक्ष्य को किया नष्ट

भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया है। अरब सागर में आईएनएस चेन्नई से दागे गये मिसाइल ने उच्चस्तरीय और बेहद जटिल युद्धाभ्यास के बाद लक्ष्य को सटीकता से मार गिराया। ब्रह्मोस प्राइम स्ट्राइक हथियार के रूप में नेवल सर्फेस लक्ष्यों को दिन या रात और किसी भी मौसम में समुद्र या सतह पर किसी भी लक्ष्य को 400 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक ध्वस्त करने की क्षमता रखता है।पिछले दिनों भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया है। भारतीय नौसेना के स्वदेशी स्टील्थ ..

आधुनिकतम तकनीकों तक पहुंच चुकी है हिंदी

बालेन्दु दाधीचअगर आज भी आपको लगता है कि हिंदी में कंप्यूटर और मोबाइल पर ऐसा नहीं किया जा सकता या वैसा नहीं किया जा सकता तो शायद आपको पूरी जानकारी नहीं है या फिर आप बहुत पुरानी तकनीकों के साथ नए दौर को जीत लेने की कोशिश में हैं। हिंदी बुनियादी तकनीकी समस्याओं से ऊपर उठ चुकी है और अधिकांश मामलों में जो कुछ अंग्रेजी में किया जा सकता है, वही हिंदी में भी किया जा सकता है।जी हां, शीर्षक का तात्पर्य स्पष्ट है। अगर आज भी आपको लगता है कि हिंदी में कंप्यूटर और मोबाइल पर ऐसा नहीं किया जा सकता या वैसा नहीं ..

आम आदमी की ताकत झलक रही है हिंदी की तकनीकी तरक्की में

बालेन्दु शर्मा दाधीचहिंदी के प्रयोग को अपनाने और आगे बढ़ाने में आम हिंदीभाषी का महत्वपूर्ण योगदान है। अब चूँकि हिंदी में टेक्स्ट इनपुट (टंकण) करना कोई मुश्किल काम नहीं रह गया है, इसलिए लोगों की अभिव्यक्ति स्वतःस्फूर्त ढंग से सामने आ रही है। कीबोर्ड का प्रयोग करें या फिर बोलकर टाइप करें, माध्यम आपके पास है। अब बस अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर है और अवसर है संवाद के धरातल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करने का।हिंदी के प्रयोग को अपनाने और आगे बढ़ाने में आम हिंदीभाषी का महत्वपूर्ण योगदान है। अब चूँकि हिंदी ..

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर विशेष: समृद्ध और सशक्त भारत के लिए स्वदेशी जरूरी

भारत विश्व का विशालतम परमाणु शक्ति सम्पन्न लोकतंत्रिक गणतंत्र है। मई 11, 1998 को पोखरण में किए अपने परमाणु परीक्षण के उपरांत भारत ने स्वयं के एक आणविक शक्ति सम्पन्न देश होने की गौरवमयी घोषणा की थी। स्वाधीनता के 51 वर्ष बाद, इस अवसर पर देश में प्रथम बार एक नहीं दो-दो रणनीतिक सिद्धांतों की घोषणा करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि वी विल हेव मिनिमम न्यूक्लिअर डिटरेन्स अर्थात हम न्यूनतम इतने परमाणु ह​थियार रखेंगे कि कोई हम पर परमाणु आक्रमण का दुस्साहस नहीं कर सके..

सावधान: कोरोना की आड़ में बढ़ रहे हैं साइबर हमले

कोविड-19 के कारण दुनिया आपात स्थिति से गुजर रही है। अधिकांश कंपनियां ऑनलाइन काम कर रही हैं, डिजिटल लेन-देन भी बढ़े हैं। लेकिन इसके बीच साइबर हमले भी बढ़े हैं। साइबर ठग नए-नए हथकंडे अपना कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं ..