तकनीक

इसरो का मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन

इसरो ने 2006 में ही मानवयुक्त अंतरिक्ष यान को भेजने की योजना बनायी थी, लेकिन करीब आठ वर्षो बाद जाकर अब हम इस दिशा में पहला कदम बढ़ाने के कगार पर पहुंचे हैं. भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश होगा...

प्रधानमंत्री मोदी की धरती बचाने की मुहिम

प्‍लास्टिक का कचरा भी मरुस्‍थलीकरण को बढ़ा रहा है। प्‍लास्टिक का कचरा न केवल स्‍वास्‍थ्‍य का प्रभावित कर रहा है, यह धरती की उर्वरता के लिए भी समस्‍याएं पैदा कर रहा है। हमारी सरकार ने घोषणा की है कि वह आने वाले कुछ वर्षों के भीतर सिंगल यूज प्‍लास्टिक का प्रचलन खत्‍म कर देगी..

चंद्रयान 2: असफल नहीं हुए हम उम्मीद अभी कायम

रूस ने 1958 से 1976 के बीच करीब 33 मिशन चांद की तरफ रवाना किए, इनमें से 26 अपनी मंजिल नहीं पा सके।1958 से 1972 तक अमेरिका के 31 मिशनों में से 17 नाकाम रहे। चांद पर पानी की खोज भारत का मुख्य लक्ष्य था और वो काम ऑर्बिटर कर रहा है..

#चंद्रयान-2 प्रतिभा की चांदनी

चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत दुनिया का पहला देश होगा। देश की इस गौरवशाली और ऐतिहासिक उपलब्धि में इसरो की दो महिला वैज्ञानिकों की भूमिका सर्वोपरि है। अपने दूसरे अभियान में भारत स्वदेश निर्मित लैंडर और रोवर को चांद के उस हिस्से में उतारेगा, जो अब तक अनछुआ और अंजाना है। इस अभियान से अंतरिक्ष विज्ञान में भारत के कई उद्देश्य पूरे होंगे..

अंतरिक्ष अन्वेषण और शोध पर इसरो को और तेजी से काम करने की जरूरत

कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से इसरो ने चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग थोड़े समय के लिए टाल दी है । नई तारीख तय होने पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से ही चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। चंद्रयान-2 वास्तव में चंद्रयान-1 मिशन का ही नया संस्करण है। इसमें ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं। चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था। चंद्रयान-2 के जरिए भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर उतारेगा। यह लैंडिंग चांद के दक्षिणी ..

अंतरिक्ष से दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखेगा भारत

एक समय ऐसा भी था जब अमेरिका ने भारत के उपग्रहों को लांच करने से मना कर दिया था। आज अमेरिका सहित तमाम देश खुद भारत से अपने उपग्रहों को प्रक्षेपित करवा रहें हैं..

अब हम अंतरिक्ष से भी मारेंगे, वो भी मिनटों में

तीन मिनट के अंदर भारत अंतरिक्ष में महाशक्ति बन गया. अब हम घर में घुसकर ही नहीं, अंतरिक्ष में भी मारेंगे. गौरव के हर क्षण पर रोने वाले विघ्नसंतोषियों को छोड़िए. आप बस ये जान लीजिए कि दुश्मन के सेटेलाइट हम पर हर वक्त नजर रखते हैं. अब हम जब चाहे, इस खिड़की को बंद कर सकते हैं...

मिराज उसी कंपनी ने बनाया जिसने बनाया राफेल

राफेल डील पर लगातार सवाल उठा रही कांग्रेस को पता होना चाहिए मिराज उसी कंपनी ने बनाया है जिसने राफेल। मिराज का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के आतंकी संगठनों को तबाह कर भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि अब बस। अब भारत चुप नहीं रहेगा। जिस भाषा में बात होगी उसी भाषा में जवाब मिलेगा..

पिघल रहे हैं गंगोत्री के सहायक ग्लेशियर

एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि गंगोत्री का सहायक ग्लेशियर चतुरंगी तेजी से पिघल रहा है। गंगोत्री गंगा के जल का मुख्य स्रोत है, जिसके सहायक ग्लेशियरों के पिघलने का असर गंगा नदी के प्रवाह पर पड़ सकता है।..

विकास पथ पर बढ़ रहा भारत

नोएडा में सैमसंग द्वारा दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल इकाई की स्थापना ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सबसे बड़ी उपलब्धि है। 2014 में ‘मेक इन इंडिया’ की घोषणा के बाद अब तक लगभग 40 मोबाइल फोन कंपनियों ने भारत में अपने संयंत्र लगाए हैं..

कृत्रिम बुद्धिमत्ता - नए आयाम की ओर तकनीक

यदि आप आयरन मैन की फिल्मों से परिचित हैं तो आप जार्विस नाम के वर्चुअल असिस्टेंट के बारे में भी जरूर जानते होंगे जो आयरन मैन के हर काम में उसकी सहायता करता है। इसी तरह हम पिछले एक दशक से भी पहले से हॉलीवुड फिल्मों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence - AI) के कई उदाहरण देखते आये हैं। यह सभी किरदार काफी मनमोहक होते हैं परन्तु हमने कभी यह नहीं सोचा था की यह कल्पना कभी वास्तविकता का रूप ले सकती है। ..

डाटा पर डाका : खतरा तो है!

वर्ष 2014 में हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी डाटा चोरी की घटना, रूस के हैकर ने दिया था इस घटना को अंजाम..

तेजस - भारत का अपना लाइट कॉम्बैट विमान

इस विमान का आधिकारिक नाम तेजस 4 मई 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था। तेजस ने हाल ही में भारतीय वायुसेना के साथ सेवा में प्रवेश किया है और 2017 बहरीन वायु शो में उसने अपनी शुरुआत की है। यहां उसे सार्वजनिक रुप से प्रदर्शित किया गया।..