न्यायपालिका में भ्रष्टाचार


जानते सब हैं, बोलता कोई नहीं

-ज्योतिका कालरा, अधिवक्ता, दिल्ली उच्च न्यायालय

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, यह एक आम मान्यता है। जब किसी व्यक्ति के खिलाफ अदालती निर्णय आता है तो उसे लगता है कि जरूर न्यायाधीश ने विपक्षी लोगों से पैसे लिए होंगे या किसी और वजह से उसने अदालत का निर्णय अपने पक्ष में करवा लिया होगा। कहते सब हैं, पर डरते भी हैं कि ऐसा कहने पर वे अदालत की अवमानना के मामले में फंस न जाएं। उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। न्यायपालिका के खिलाफ बोलने से पहले उसके दिमाग में खतरे की घंटी जरूर बजती है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने एक बार कहा था कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कितना है इस बात पर विवाद हो सकता है लेकिन न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, यह सब मानते हैं। अभी हाल ही की घटना है। राष्ट्रपति के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट निकल गया। यह एक स्पष्ट उदाहरण है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार किस हद तक पैठा हुआ है। पैसे देकर आप अदालत से किसी भी तरह का आदेश निकलवा सकते हैं।

आमतौर पर कहा जाता है कि फलां वकील के पास जाइए, वह निश्चित रूप से आपकी जमानत करवा देगा। उस "निश्चित रूप से" का एक अर्थ होता है। यही भ्रष्टाचार है। परन्तु अदालतों ने अपने आप को पूरी तरह से ऐसे आवरण में ढांप रखा है कि कभी इस पर न कोई खबर छपती है, न कोई कार्रवाई होती है। कानून ऐसा है कि आज न्यायाधीश को गिरफ्तार नहीं कर सकते। यह तो छोड़िए, आप उनके खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति रखने का मुकदमा नहीं बना सकते। कानून ऐसा है कि अगर कोई न्यायाधीश इस प्रकार की स्थितियों में पाया जाए तो उस पर होने वाली कार्रवाई को सार्वजनिक नहीं किया जाता।

दुर्भाग्य से आज कोई ऐसा मंच नहीं है जहां न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत की जा सके। अगर न्यायपालिका को हम भ्रष्टाचार मुक्त देखना चाहते हैं तो यह आवश्यक है कि न्यायपालिका की भी जवाबदेही तय हो। जब हर चीज की जवाबदेही है तो न्यायपालिका की ही क्यों न हो? एक ऐसा मंच, एक ऐसा संगठन होना चाहिए, जिसमें न्यायपालिका के साथ-साथ प्रशासन के लोग भी हों, सरकारी अधिकारी भी हों। हम हर बात में पारदर्शिता की बात कहते हैं पर न्यायपालिका के बारे में यह पारदर्शिता कहां जाती है? न्यायाधीशों के खिलाफ इस मंच से जो शिकायतें की जाएं उन्हें जनता के सामने रखा जाना चाहिए। न्यायमूर्ति मुखर्जी का मामला आया था। तब कितनी बातों का खुलासा हुआ था, पर बाद में फिर चुप्पी छा गई। उन्हें जमानत भी मिल गई। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के कई और कारण हैं। उन सभी का तभी खुलासा हो पाएगा जब हम एक स्वतंत्र मंच बनाएंगे, जो न्यायाधीशों के काम पर कुछ नियंत्रण रख सके।

(वार्ताधारित)

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