राष्ट्रपति और गृहमंत्री से संतों की मांग-


धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करें

- प्रतिनिधि

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण उच्चाधिकार समिति से जुड़े धर्माचार्यों, संतों के एक प्रतिनिधिमण्डल ने गत 19 जुलाई को राष्ट्रपति डा.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम एवं केन्द्रीय गृहमंत्री श्री शिवराज पाटिल से अलग-अलग मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपे तथा देश के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का आग्रह किया। इस प्रतिनिधिमण्डल में चित्रकूट के जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी, श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी (अयोध्या), जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी (हरिद्वार), महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद जी (मुम्बई), महामण्डलेश्वर स्वामी हंसदास जी (हरिद्वार), महंत डा. रामविलास दास वेदान्ती जी (अयोध्या), महंत कौशल किशोर दास जी (अयोध्या), महंत फूलडोल बिहारीदास जी (वृन्दावन), विश्व हिन्दू परिषद् के अध्यक्ष श्री अशोक सिंहल तथा मंत्री श्री राजेन्द्र सिंह पंकज शामिल थे।

राष्ट्रपति से भेंट के बाद स्वामी रामभद्राचार्य जी ने संवाददाताओं से कहा कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा पर प्रतिदिन तीस लाख रुपए व्यय हो रहा है। 1992 के बाद से अब तक पंद्रह अरब रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद वहां आतकंवादी प्रवेश करने में सफल हुए, यह चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि के पश्चिम क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था में बहुत खामियां पाई गईं। श्री रामभद्राचार्य ने बताया कि राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि वे संविधान के अनुसार जो संभव होगा, जरूर करेंगे।

विश्व हिन्दू परिषद् के अध्यक्ष श्री अशोक सिंहल ने बताया कि गृहमंत्री श्री पाटिल से सकारात्मक बातचीत हुई। श्री पाटिल ने उनसे कहा कि अयोध्या तथा अन्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर रपट देने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति 6 अगस्त तक अपनी रपट दे देगी। इस रपट पर होने वाले निर्णय पर अमल किया जाएगा। श्री सिंहल ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सरकार आवश्यक कदम उठाएगी। राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि श्रीराम जन्मभूमि पर हमला करने वाले आतंकवादियों के विषय में पूरी जानकारी प्राप्त की जाए और यदि वे पाकिस्तान से सम्बंधित रहे हैं तो भारत सरकार कठोरता से पाकिस्तान सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज कराए तथा जिन स्थानीय लोगों (भारत में रहने वाले) ने आतंकवादियों का किसी भी प्रकार से सहयोग किया हो, बिना किसी संकोच के उनको कठोरतम दण्ड देना सुनिश्चित किया जाए। यह भी मांग की गई है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन की व्यवस्था उनकी परम्परा के अनुसार करने दी जाए और पूजन सामग्री ले जाने की छूट दी जाए।

- प्रतिनिधि

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