इस्लामी देशों में भी होती थीसूर्य पूजा - बनवारी लाल ऊमर वैश्य


सूर्य इस ब्राह्मण्ड के विराट देवता हैं। सूर्य और चन्द्र ईश्वर की दो आंखों के समान हैं जो हमारी दैनिक गतिविधियों को देख रही हैं। सूर्य को कर्माध्यक्ष कहा गया है जो हमारे पाप-पुण्य आदि कर्मों के साक्षी हैं। हम उनसे कुछ भी छुपा नहीं सकते। वे हमारे अपराध, भ्रष्टाचार और अनैतिक कार्यों को अपने काल पात्र में जमा करते जा रहे हैं। सूर्य के पास विश्व की सबसे बड़ी आणविक शक्ति है जिसे वे क्षणभर में विस्फोटित कर सकते हैं। इसी से प्रेरणा लेकर वैज्ञानिकों ने अणु बम की रचना की थी जिसका प्रयोग हिरोशिमा और नागासाकी पर हुआ था। अब तो संहार की दृष्टि से अनेक देशों में क्षमता मूलक परमाणु बमों का आविष्कार हो गया है। सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं। वे विश्व को प्रकाश देते हैं इसलिए उन्हें भास्कर कहा जाता है। वे वनस्पतियों के पोषण में अपनी ऊर्जा समाहित करते हैं अत: वे पूषा के नाम से जाने जाते हैं। दिन, रात, मास, पक्ष, संवत्सर, ऋतु आदि के प्रवर्तक सूर्य हैं। "विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव,/यद्-भद्रं तन्न आसुव"। अर्यमा, धाता, अंशुमान, विष्णु, इन्द्र, वरुण, विवस्वान, मित्र, पर्जन्य, पूषा, भग और त्वष्टा, ये बारह सूर्य वर्षभर प्रचण्ड ऊर्जा में घिरे रहते हैं। कहते हैं, जिस-दिन एक साथ ये बारह सूर्य ताप छोड़ने लगे तो उस दिन ब्राहृाण्ड भस्म हो जाएगा। इनकी आणविक सत्ता को ध्यान में रखकर इनकी पूजा और जलार्चन आज भी जारी है "शं नो मित्र:।"

विश्व में सूर्य के कई मंदिर थे जिन्हें आक्रांताओं ने ध्वस्त कर अपने काले कारनामों का परिचय दिया है। कश्मीर का मार्तण्ड मंदिर, जिसे तुर्को ने तोड़ा था। उड़ीसा का कोणार्क मंदिर विश्व चर्चित है। तंजौर का सूर्य मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है। सूर्यवंशी राजाओं का देश होने के कारण भारत सूर्य मंदिरों का गढ़ था, जिनकी पूजा कर राजाओं ने आतंकवाद का विनाश किया था। मिस्र की रानी हेपतेप सूर्य की पूजा करती थीं। उन्होंने विदेशी आक्रांताओं को मार भगाया था। रानी सूर्या देवी के नाम से नील घाटी में चर्चित हुई थी। यूनान के सूर्य देवता "अपोलो" थे जिनका मंदिर डालफिन में था, जिनकी पूजा पीथियन नारियां करती थीं। वे सूर्य स्रोत का पाठ करती थीं। रोम के वेटिकन नगर में धनुर्धारी सूर्य देव "अपोलो" की प्रतिमा संरक्षित है। जापान में यमातू की पूजा प्रचलित थी। यम का अर्थ होता है सूर्य। जापानी मंदिर में सूर्या देवी की मूर्ति रखने की परंपरा है। अंग्रेज कवि बाइरन और शेली ने सूर्य नारायण "अपोलो" पर कविता लिखी है। सूर्य पूजा यूनान का राष्ट्रीय पर्व था। वैदिक कालीन सूर्य पूजोत्सव का स्मृत रूप उत्तरी भारत का लोलार्क पष्ठी, बिहार का "डाला छठ" संक्रांति पर्व आदि जीवंत हैं। देश में कुंभ पर्व सूर्य पूजा को अनुप्राणित करते हैं। नदी स्नान कर सूर्य को अघ्र्य देते हुए आज भी भारतीय अपनी पूजा परंपरा को बनाए हुए हैं।

इस्लामी देशों में भी सूर्य पूजा होती थी, जिसका श्रेय कृष्ण के पौत्र साम्व को जाता है। उन्होंने मूलस्थान (मुल्तान) में चन्द्र भागा नदी (चिनाब) के किनारे सूर्य मंदिर बनवाया था, जिसकी पूजा के लिए उन्होंने इस्लामी देशों अरब, इराक, ईरान आदि से मग ब्राहृण को बुलाया था। ऐसा उन्होंने साम्प्रदायिक एकता और सद्भावना बनाये रखने के लिए किया था। परन्तु इससे आर्यावत्र्त के ब्राहृण नाराज हो गए थे। मग ब्राहृण देश में बस गए और शाकद्वीपी ब्राहृण के नाम से चर्चित हो गए। ये सूर्य पूजा के विशेषज्ञ होते हैं। महाभारत काल में शाकद्वीप, जो आज इस्लामी देश है, वहां मग, मगध, मानव और मंदक, ये ब्राहृण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के रूप में रहते थे। अरब में इनकी बस्तियां थीं जो अब मक्का (मग) मदीना (मंदक) आदि के नाम से जानी जाती हैं।

"मगाश्च मगधाश्चैव मानदा मन्दगास्वधा।। (कूर्म पुराण)"

शाकद्वीप की ये जातियां सूर्य की पूजा करती थीं। कभी साम्व शाकद्वीप शिरोमणि थे। वे मग पुरोहितों का सम्मान करते थे ताकि सूर्य पूजा के जरिए धार्मिक एकता बनी रहे। सूर्य सभी देशों में समान भाव से आलोक प्रदान कर हमें "तमसो मा ज्योतिर्गमय" का संदेश देते हैं। वे आतंक रूपी अंधकार का विनाश कर रहे हैं। उनका यह कार्य आज भी प्रासंगिक है। आतंक से अशांति फैलती है। विश्व बन्धुत्व की भावना प्रभावित होती है। राष्ट्र का विकास बाधित होता है। सूर्य सभी पंथों और जातियों के देवता हैं। मस्जिद का मुख्य भाग पूर्व दिशामुखी होता है, क्योंकि सूर्य का यह उदयाचल है। मस्जिद स्थापत्य कला में ईरानी मुल्ला-मौलवी दक्ष थे। वे सौर संस्कृति से परिचित थे।

आज का इराक अतीत का असीरिया था। वहां के सूर्य देवता "अस्सुर" हैं। अस्सुर वाण वहां के राजा थे और सूर्य के उपासक थे। उनकी पुत्री उषा श्रीकृष्ण के पुत्र अनिरुद्ध से ब्याही गई थी।

मिस्र की एक स्तुति में सूर्य की महिमा का वर्णन है। "हे सूर्य देव!तुम स्वर्ग से प्रकट होते हो, तुम्हारे स्वागत में भोर के पंछी प्रभाती गाते हैं, भील नदी तुम्हारी गति से चलती है, तुम इस देश के देवता हो, तुम विराट हो, तुम प्रतापी और शक्तिमान हो।

अख्टान मिस्र के देवता सूर्य थे। राजाओं ने अख्टान धर्म का प्रवर्तन किया था। दशरथ मिस्र के राजा थे। मिस्र के सम्राट अपने को सूर्यवंशी मानते थे। ईरान के राजा अपने को आर्य मिहिर कहते थे। मिहिर का अर्थ होता है-सूर्य। फारस में सूर्य भगवान "मिथ्र" की उपासना होती थी। "मिथ्र" सूर्य के पर्याय "मित्र" का अपभ्रंश रूप है। अरबी भाषा में सूर्य को आफताब (आताप) कहा जाता है जो प्रताप और शौर्य का सूचक है।

गुप्तकाल में मंदस्तेर में सूर्य मंदिर था। वहां के जुलाहे रेशम उद्योग की आय से सूर्य मंदिर का संचालन करते थे। उत्तर प्रदेश में बसे जुलाहे मतांतरित मुसलमान हो गए किंतु उनके उद्योग व्यवसाय का मतांतरण नहीं हो सका। देखा जाए तो दुनिया के सभी पंथ-जाति के लोग सूर्य परिवार के हैं। अलबरूनी ने इस्लामी देश के मगों की सूर्य पूजा की प्रशंसा की है। ये मग सौर धर्म के प्रवर्तक थे। अब सूर्य अकेले नहीं हैं, बल्कि वे बारह हैं, उनका एक साथ उदय होना विश्व के लिए विनाशकारी माना जाता है। शाकद्वीप के मग समुदाय सौर ऊर्जा की शक्ति से परिचित थे। उन्होंने इस्लामी देशों में सौर सम्प्रदाय की बुनियाद तब रखी थी जब इस्लाम मजहब का जन्म नहीं हुआ था। वराह मिहिर ने कहा है- विष्णोर्भागवता मगाश्च सविदेतु:। सूर्य पूजा की व्यापकता के लिए श्रीकृष्ण के पौत्र साम्व को सदैव याद किया जाएगा। "शाकद्वीपस्य दुग्धाम्बू निधि बलयितो तत्र विप्रे...स्वत:स्वांग शाम्बो।"

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