आजमगढ़ में योगी आदित्यनाथ पर जानलेवा हमला - सुलगता पूर्वाञ्चल - डा. राकेश उपाध्याय


गत् 7 सितम्बर को विश्वविख्यात गोरक्षपीठ के युवा उत्तराधिकारी और सांसद योगी आदित्यनाथ आजमगढ़ में हिंसक भीड़ के हमले में बाल-बाल बचे। उन पर आजमगढ़ में मुस्लिम कट्टरपंथियों की उग्र भीड़ ने उस समय योजनापूर्वक हमला बोला जब वे डीएवी कालेज के मैदान में आतंकवाद विरोधी चेतावनी रैली को संबोधित करने जा रहे थे।

योगी आदित्यनाथ पर हमला पूर्णतः पूर्व नियोजित था। इसे बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने भी स्वीकार किया। हमलावरों को उनके काफिले की पल-पल की "लोकेशन" भी किसी गुप्त सूत्र के माध्यम से मिल रही थी। हमला शहर के संवेदनशील मुस्लिमबहुल तकिया इलाके में हुआ। यहां पहले से एकत्र हिंसक भीड़ ने योगी के काफिले पर र्इंट-पत्थरों का भीषण पथराव और गोलीबारी कर समूचे पूर्वाञ्चल को दहला कर रख दिया। योगी आदित्यनाथ पर हमले की जानकारी मिलते ही स्थान-स्थान पर लोग सड़कों पर उतर आए और चारों ओर अघोषित बंदी का माहौल बन गया। उल्लेखनीय है कि पाञ्चजन्य अपने 18 दिसंबर, 2005 के अंक में योगी आदित्यनाथ पर खतरे के संदर्भ में विस्तृत रपट प्रकाशित कर चुका है।

7 सितम्बर, 2008 को हुए हमले की इबारत भी कम अचंभित व हैरत में डालने वाली नहीं है। हुआ यूं कि आजमगढ़ में गत 16 अगस्त को अमदाबाद विस्फोटों के प्रमुख सूत्रधार अबू बशीर की गिरफ्तारी के बाद आजमगढ़ स्थित उसके घर पर सहानुभूति जताने के लिए इमाम बुखारी समेत तमाम सेकुलर नेताओं की भीड़ जमा होने लगी थी। इन नेताओं में अमर सिंह, अबू आजमी, अकबर अहमद डम्पी आदि प्रमुख हैं। 21 अगस्त को इमाम बुखारी ने बशीर के घर व्यक्त प्रतिक्रिया में कहा कि "सरकारें मुसलमानों पर जुल्म ढा रही हैं। बशर निर्दोष है, मुसलमान होने के कारण उसे गिरफ्तार किया गया है। हम ये जुल्म और बर्दाश्त नहीं करेंगें। हमारी ताकत 20करोड़ की है। सरकारें इस ताकत को कम करके न आंकें।"

जिहादी तत्वों को शह दिए जाने की इस कोशिश के विरुद्ध योगी आदित्यनाथ ने आजमगढ़ में ही आतंकवाद विरोधी सभा करने की घोषणा की। इसी कारण उन पर जानलेवा हमला किया गया। प्रशासन को इसकी पूर्व सूचना थी। सभा का आयोजन दोपहर डेढ़ बजे के लगभग किया गया था, इसमें भाग लेने के लिए योगी आदित्यनाथ का काफिला लगभग 1.20 बजे दोपहर को जैसे ही नगर के तकिया मुहल्ले से गुजरने लगा, उस पर र्इंट-पत्थर और गोलियां बरसने लगीं। काफिले के आगे पुलिस उपाधीक्षक और उपजिलाधिकारी की गाड़ियां पुलिस बल के साथ थीं तो पीछे पीएसी के जवान सुरक्षा में लगाए गए थे। करीब 100 से ज्यादा गाड़ियों के काफिले में जिहादी तत्व योगी आदित्यनाथ के वाहन की पहचान नहीं कर पाए और दनादन गाड़ियों को निकलता देख अचानक ही काफिले पर चारों ओर से धावा बोल दिया गया। काफिले में पीछे की गाड़ियों को रोककर उन पर सवार कार्यकर्ताओं को दंगाइयों ने लहूलुहान कर दिया। इस हमले में प्रख्यात गोभक्त मुन्नर यादव गंभीर रूप से घायल हो गये। कुछ पत्रकार-छायाकारों ने उन्हें जान पर खेलकर बचाया। उल्लेखनीय है कि मुन्नर यादव के भाई सुन्नर यादव की कुछ वर्ष पहले ही दंगाईयों ने हत्या कर दी थी।

सूत्रों के मुताबिक खुफिया विभाग ने सभा के दौरान गड़बड़ी की आशंका जताई थी लेकिन कट्टरपंथी इस तरह काफिले को घेरेंगे, ये कल्पना वे भी नहीं कर सके। इस हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई और पीएसी के चार जवानों समेत 12 लोग घायल हो गए। पुलिस उपाधीक्षक की कार समेत दर्जन भर अन्य गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुर्इं। इसके बाद पुलिस ने नौ लोगों को हिरासत में लिया, जिसमें एक मुस्लिम के मारे जाने के आरोप में प्रदीप सिंह और धीरज सिंह नामक दो सगे भाई भी शामिल हैं। बताया जाता है कि इन दोनों को षड़यंत्रपूर्वक पुलिस ने कट्टरपंथियों के दबाव में आरोपी बनाया है, जबकि अभी ये तय नहीं है कि मारा गया व्यक्ति पुलिस की जवाबी फायरिंग में मरा या किसी अन्य द्वारा चलाई गई गोली से।

यद्यपि खुफिया सूचनाओं के कारण पहले से ही तैनात पुलिस बल और योगी आदित्यनाथ के संयम ने शहर को दंगे की आग में झुलसने से बचा लिया। हमले का समाचार जैसे ही सभा स्थल पर पहुंचा वहां पहले से जमा हजारों की भीड़ उत्तेजित हो गई, लोग तकिया मुहल्ले की ओर जवाबी अंदाज में बढ़ने लगे लेकिन योगी आदित्यनाथ के आह्वान ने सभी को शांत किया। हमले के बावजूद लगभग 3 घंटे सभा चलने के बाद प्रशासन ने भारी सुरक्षा के बीच योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर रवाना किया। इसके पूर्व सभा में प्रशासन और आतंकवाद विरोधी नारों के बीच योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें धैर्य और संयम के साथ आतंकवाद का समूल विनाश करना है।

8 सितम्बर को समूचा पूर्वांचल योगी आदित्यनाथ पर हमले के विरोध में बंद रहा। स्थान-स्थान पर सैकड़ों लोगों ने आतंकवाद का पुतला फूंककर गिरफ्तारियां दीं। अनेक स्थानों पर छिटपुट उपद्रव और हिंसा भी हुई। खुफिया विभाग ने आशंका जाहिर की है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में यदि सावधानी न बरती गई तो आगे किसी बड़े उपद्रव या आतंकवादी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।

साथ में जितेन्द्र सिंह

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