साइबर सुरक्षा - तरुण सिसोदिया


7 दिसम्बर की शाम वाराणसी (उ.प्र.) के शीतला घाट पर हुए आतंकी हमले के बाद इसकी जिम्मेदारी लेने वाला ई-मेल इंडियन मुजाहिद्दीन ने मुम्बई से भेजा था। इसमें महत्वपूर्ण यह नहीं है कि ई-मेल भेजकर हमले की जिम्मेदारी ली गई बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि जिस इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करके यह ई-मेल भेजा गया, वह "हैक" किया गया था। इस घटना के कुछ दिन पहले, यानी 3 दिसंबर की रात भारत की प्रतिष्ठित जांच एजेंसी केन्द्रीय जांच ब्यूरो की वेबसाइट पर "पाकिस्तानी साइबर आर्मी" नामक "हैकरों" के समूह ने "पाकिस्तान जिंदाबाद" आदि पाकिस्तान समर्थित नारे लिख छोड़े थे। सी.बी.आई. की वेबसाइट पर भारत के बारे में भी कई निम्नस्तरीय आपत्तिजनक बातें लिखीं गईं थीं।

विश्व के सामने "कम्प्यूटर" नामक एक ऐसी मशीनरी का आविष्कार हुआ जिससेकाम की गति में तेजी आई। समय के साथ-साथ यह परिष्कृत होता चला गया और आज स्थिति यह है कि लगभग प्रत्येक कार्य में इसका उपयोग अपरिहार्य-सा हो गया है। कम्प्यूटर के बाद इंटरनेट आया। इसके आगमन ने तो कम्प्यूटर की उपयोगिता को अत्यधिक बढ़ा दिया। इसके उपयोग से जिन दस्तावेजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने में घंटों से लेकर दिनों तक का समय लगता था, अब वह पलक झपकते ही यानी सेकेंडों में पहुंचने लगे। इसके अलावा शोध व जानकारी प्राप्त करने सहित और भी अनेक कार्यों के लिए इंटरनेट उपयोगी साबित हुआ। इंटरनेट की सहायता से आज हम किसी भी प्रकार की जानकारी क्षण भर में प्राप्त कर सकते हैं। कोई सामाचार पत्र या पत्रिका पढ़नी हो या फिर किसी संदर्भ का वीडियो देखना हो, सब कुछ इंटरनेट पर आसानी से सुलभ है। यह कहना भी अतिशयोक्ति पूर्ण नहीं होगा कि दुनिया की किसी भी प्रकार की जानकारी कम्प्यूटर के "माउस" के एक "क्लिक" में आपके सामने होगी। लेकिन

वैसे तो साइबर सेंधमारी से दुनिया का लगभग हर देश प्रभावित है, लेकिन जिन देशों पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है उनमें से भारत भी एक है। एक अनुमान के अनुसार भारत में साइबर अपराध प्रतिवर्ष 50 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं। देश की सुरक्षा, अनुसंधान एवं वित्तीय मामलों से जुड़े कार्यालयों की वेबसाइटों और कम्प्यूटरों पर ज्यादा आक्रमण हो रहे हैं। जनवरी 2010 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन ने ब्रिटिश अखबार "द टाइम्स" को दिए साक्षात्कार में कहा था कि 15 दिसंबर, 2009 को उनके तथा प्रधानमंत्री कार्यालय सहित अन्य कई सरकारी कार्यालयों के कम्प्यूटरों को हैकरों ने निशाना बनाया था। वहीं मई, 2009 में भारत के विदेश मंत्रालय के कम्प्यूटरों को "हैक" कर जानकारी चुराने के समाचार भी प्रकाशित हो चुके हैं।

साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञ श्री पीयूष पांडे का कहना है कि किसी देश की सुरक्षा के संदर्भ में साइबर सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। अमरीका, जोकि साइबर सुरक्षा को लेकर बेहद सर्तक रहता है, ने तमाम नीतियां साइबर सुरक्षा के संबंध में बना रखी हैं, उसके बाद भी अमरीका की तमाम गुप्त जानकारियां "विकीलीक्स" नामक वेबसाइट ने सार्वजनिक कर दीं, जिसके कारण अमरीका हैरान और परेशान है। यह घटना अमरीका के लिए साइबर सुरक्षा के महत्व को प्रकट करती है। भारत के भी तमाम महत्वपूर्ण संस्थान इंटरनेट के जरिए सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं तथा तमाम महत्वपूर्ण सूचनाएं इंटरनेट के जरिए सर्वर पर रहती हैं। अगर इस तरह से साइबर सुरक्षा ढीली होगी तो महत्वपूर्ण सूचनाएं ऐसे लोगों के हाथों में जा सकती हैं। जो इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। भारत में हाल के दिनों में साइबर सुरक्षा को दुरुस्त करने के लिए कोशिशें तो हुई हैं, लेकिन अभी भी हम उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं जिसकी हमें जरूरत है। उस तरह की नीतियां भी नहीं हैं जो उन महत्वपूर्ण सूचनाओं को बचाने में कारगर साबित हों।

दिल्ली पुलिस की 2009 की रपट के अनुसार अकेले 2009 में साइबर अपराधों की सं#ंख्या में 150 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। प्रसिद्ध उद्योगपति एवं राज्यसभा सदस्य विजय माल्या, नोबल पुरस्कार विजेता अमत्र्य सेन, राज्यसभा सदस्य राजीव प्रताप रूढ़ी, अभिनेत्री हंसिका मोटवानी आदि अनेक हस्तियों के ई मेल आईडी "हैक" होने तथा सोशल नेटवर्किंग साइटों पर फर्जी अकाउंट बनाने के मामले सामने आ चुके हैं।

देश की सुरक्षा से संबंधित संस्थानों पर पड़ोसी देश सुनियोजित ढंग से हमला करा रहे हैं। पहले तो इस काम में केवल चीन ही लगा रहता था, लेकिन अब पाकिस्तान भी इस काम में तेजी दिखा रहा है। विगत दिनों टोरंटो विश्वविद्यालय के कनाडाई और अमरीकी शोधकर्ताओं ने अपनी रपट "सेडो

देश के सुरक्षा संस्थानों पर साइबर हमलों के प्रभाव पर केन्द्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक सरदार जोगिंदर सिंह का कहना है कि आज हर व्यक्ति कम्प्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल करता है।

बढ़ते साइबर हमलों के बारे में साइबर सुरक्षा से जुड़े कुछ जानकारों का कहना है कि इस तरह के अपराध असुरक्षित नेटवर्किंग के कारण होते हैं। आपने जरा भी लापरवाही बरती तो आप "हैकिंग" के शिकार हो सकते हैं। आपके ईमेल और वेबसाइट हैक न हो सकें, इसके लिए आपको हर जरूरी उपाय समय-समय पर करते रहने चाहिए। एंटीवायरस अपडेट करते रहें, अनजान ईमेल एवं वेबसाइट न खोलें आदि।

सभी प्रकार के सुरक्षा उपक्रम अपनाने के बाद भी साइबर हमले लगातार हो रहे हैं, इसके लिए कुछ लोग जहां आधुनिक सुरक्षा तकनीकी का न होना मानते हैं वहीं कुछ लोग इस प्रकार के अपराधों के लिए कानून का ढीला होना मानते हैं, जिसके कारण इस गैरकानूनी कृत्य में लगे लोग बिना किसी डर के अपना काम करते रहते हैं। साइबर ममलों से जुड़े अधिवक्ता श्री विजय पाल डालमिया का कहना है कि भारत में साइबर अपराध के विरुद्ध कोई ठोस कानून न होना भी

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पं. मदन मोहन मालवीय की डेढ़ सौ वीं जयन्ती (25 दिसम्बर) पर विशेष

राष्ट्रभक्त शिक्षाशास्त्री मालवीय जी

द लक्ष्मीकांता चावला

गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में यह लिखा-

जब जब होइ धरम कै हानी बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी।।

और फिर

तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा। हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा।।

यह उक्ति 19वीं शताब्दी में प्रत्यक्ष हो गई। सैकड़ों ऐसे महामानव इस शताब्दी में अवतरित हुए जिन्होंने भारत मां को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त करवाने के लिए तन-मन-धन अर्पित कर सफल संघर्ष किया। ऐसे ही एक महापुरुष पंडित मदन मोहन मालवीय का 25 दिसंबर सन् 1861 तद्नुसार पौष कृष्ण अष्टमी विक्रमी संवत 1918 को जन्म हुआ। मालवीय जी एक महान राष्ट्रभक्त, स्वतंत्रता सेनानी, विख्यात शिक्षाविद्, अनेक समाचार पत्रों के संपादक, कुशल अधिवक्ता तथा वाणी-वक्तृता के धनी थे। परिवार की आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल न होने के कारण दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करते ही मालवीय जी अध्यापन कार्य करने लगे। उन्होंने देश की शिक्षा को हिन्दुत्व की स्वर्णिम आभा से मंडित किया और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। इसके लिए पूरे देश में घूम-घूमकर धन संग्रह किया और स्वयं बीस वर्षों तक इसके कुलपति भी रहे। जिस ढंग से मालवीय जी ने देश भर से इस विश्वविद्यालय के लिए भिक्षा मांगी, उन्होंने स्वयं को राष्ट्रीय भिखारी स्वीकार किया। उनका यह विश्वास था कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य धर्म और नीति को शिक्षा का अनिवार्य अंग बनाकर युवकों के चरित्र का निर्माण करना है। इस हेतु उन्होंने संस्कृत शिक्षण को महत्व देने के साथ ही परिसर में गीता प्रवचन की परंपरा प्रारंभ की, जो आज भी अक्षुण्ण है। यह मणिकांचन संयोग ही है कि राष्ट्रीय स्वयंसवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरू जी इसी विश्वविद्यालय के छात्र एवं शिक्षक रहे।

राजनीतिक यात्रा

मालवीय जी ने 25 वर्ष की आयु में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में सभी को मंत्रमुग्ध कर देने वाला व्याख्यान दिया और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा प्रारंभ हो गई। वे सर्वप्रिय राजनेता और शिक्षाविद् के नाते एक साथ सर्वमान्य हो गए। सन् 1911 से उन्होंने अपनी सुस्थापित वकालत को हमेशा के लिए त्याग दिया, पर उनके लिए अदालत में प्रस्तुत होते रहे जो अंग्रेज शासकों के अत्याचार के शिकार होते थे। स्वदेशी का उनका व्रत वस्तु, विचार, व्यवहार, भाषा और उद्योगों के साथ-साथ स्वसंस्कृति के जीवन मूल्यों के प्रति भी आस्थावान था। मालवीय जी ने उस समय एक बड़ा आंदोलन किया जब अंग्रेजों ने गोमुख से गंगा सागर तक गंगा के प्रवाह को अवरूद्ध करने का प्रयास किया, इससे बाध्य होकर अंग्रेजी शासन को गंगा की अविरल धारा को संरक्षित करना पड़ा। 1920 के दशक में मालवीय जी ने खिलाफत आंदोलन में कांग्रेस की भागीदारी का भी विरोध किया और 1942 में गांधी जी को सावधान किया कि देश की स्वतंत्रता का सौदा देश विभाजन से न किया जाए।

मालवीय जी का डा.अम्बेडकर से बहुत गहरा स्नेह संबंध था। इसी के आधार पर जलियांवाला बाग के नृशंस हत्याकांड से मालवीय जी द्रवित हुए और विदेशी शासकों के प्रति आक्रोश से भी भर उठे। इस पर चर्चा के लिए हुई शिमला काउंसिल में महामना मालवीय जी का अभूतपूर्व ऐतिहासिक वक्तव्य छह घंटे तक चला। जिसको सुनकर काउंसिल के अंग्रेज सदस्य भी चकित, मुक्त और द्रवित हो गए। ऐसा वक्तव्य इससे पूर्व बम्बई उच्चन्यायालय में केवल लोकमान्य तिलक ने ही दिया था और यह दोनों ही भाषण स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अनुपम हैं। मालवीय जी चाहते थे कि हिन्दू संगठित और शक्तिवान बनें। वे जात-पांत के बंधनों से मुक्त करके पूरे समाज को एक साथ आगे बढ़ता देखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने प्रभावी कार्य किया। मालवीय जी राजनीतिज्ञ होते हुए भी राजनीति से ऊपर थे। वे धर्म के प्रकट समर्थक, पर रूढ़िवादिता के विरोधी तथा आधुनिकता एवं सांस्कृतिक जीवन मूल्यों के समर्थक थे। स्वदेशी के प्रणेता तथा स्वावलम्बी भारत के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ और प्राचीन साहित्य की युग के अनुसार व्याख्या के प्रतिपादक थे। उनका जीवन संकीर्णताओं से पूरी तरह परे, पर दृढ़ आस्थावान था।

राष्ट्रहित जीवन-मरण

मालवीय जी राष्ट्रहित जीना और राष्ट्रहित ही मरना चाहते थे। उन्हें स्वर्ग और मोक्ष की

हम यह कभी नहीं भूल सकते कि मालवीय जी ने भारत को अपना प्रथम विश्वविद्यालय दिया और सारे समाज को यह संदेश दिया कि भगवान घट-घट वासी हैं। इसलिए सभी भारत बंधु मेरे सगे भाई बहन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभी देश गुलाम है और मेरे पास मरने की कोई फुर्सत नहीं। महाकवि मैथिली शरण गुप्त ने मालवीय जी को श्रद्धाजलि भेंट करते हुए कहा-

भारत को अभिमान तुम्हारा,

तुम भारत के अभिमानी

पूज्य पुरोहित थे हम सबके,

रहे सदैव समाधानी।

अंदलीवे हिन्दू नजर ने कहा-

दिल खुदा का घर है,

उस घर में बसा है मालवी

हम पुजारी हैं,

हमारा देवता है मालवी

पहले दिल, पहले वफा,

पहले नजर है मालवी

सब नजर है,

मुद्दई क्या जाने क्या है मालवी।

मालवीय जी के 150 वें जन्मदिवस पर कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें नमन करता है।

राष्ट्र सेविका समिति का भगिनी निवेदिता की स्मृति को

गौरवान्वित करने का अभियान

राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका प्रमीला ताई मेढ़े ने कहा कि 13 अक्तूबर, 2010 से 13 अक्तूबर 2011 तक की अवधि भगिनी निवेदिता के स्मृति वर्ष के रूप में मनाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि 13 अक्तूबर 1911 को भगिनी का निधन हुआ था। स्वामी विवेकानन्द की परम प्रिय शिष्या भगिनी निवेदिता मूलत: आयरिश महिला थीं, परन्तु उन्होंने भारत में अपना सम्पूर्ण जीवन भारत की स्वाधीनता, भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान एवं विकास के लिए समर्पित कर दिया। मारग्रेट एलिजाबेथ नोबुल के रूप में उनका जन्म 28 अक्तूबर 1868 को आयरलैंड में एक ईसाई पादरी के घर हुआ था। इस स्मृति वर्ष में उनके द्वारा शिक्षा, सेवा एवं स्वदेशी आर्थिक चिन्तन की भावना से किए गए कार्यों को जन-जन तक पहंचाने हेतु रा.से.स. द्वारा अनेक प्रेरणादायी कार्यक्रम चलाने की योजना है।

प्रमीला ताई 23 दिसम्बर को नई दिल्ली के पहाड़गंज स्थित उदासीन आश्रम में एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने बताया कि इस विषय में देश भर के सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में भगिनी के जीवन परिचय, कार्य शैली व सन्देश पर लिखी एक पुस्तिका के माध्यम से देश की युवा पीढ़ी तक राष्ट्रीयता की भावना का सन्देश पहुंचाने का भी संकल्प रा.से.स. ने लिया है। इस हेतु महाराष्ट्र में 10,000 पुस्तकों के वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रचेतना निर्मात्री भगिनी का दार्जिलिंग के "रॉय विला" स्थान पर उपेक्षित एवं अज्ञात समाधिस्थल है। इस स्मृतिवर्ष में उनकी समाधि स्थल को सुशोभित करने एवं प्रशासन द्वारा इस स्थल को पर्यटन स्थलों की सूची में अंकित कराने की भी योजना है। आधुनिक समाज में महिलाओं पर बढ़ रहे अत्याचारों के विषय में ताईजी ने कहा कि समस्या तब निर्माण होती है जब सोच की दिशा बदलती है। आधुनिक परिप्रेक्ष्य में समाज की मानसिकता को बदलने की विशेष आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि रा.से.स. द्वारा महिलाओं को विभिन्न कार्य क्षेत्रों में जाने के लिए अग्रसर किया जाता है। समिति द्वारा प्रताड़ित एवं उपेक्षित महिलाओं के लिए छात्रावास भी बनाए गए हैं।

युवा पीढ़ी के लिए संदेश में उन्होंने कहा कि युवा ही देश के निर्माता हैं और शिक्षा के माध्यम से युवाओं को संस्कृति से जोड़ा जा सकता है। इसके लिए संस्कारयुक्त परिवार एवं समाज निर्माण करना परम आवश्यक है।

द संगीता सचदेव

रामलला की जय-जयकार

देखते-देखते ई. सन् 2010 भी बीत गया। इस वर्ष हिन्दू समाज पर प्रभु श्रीराम की बड़ी कृपा रही और न्यायालय ने कहा कि अयोध्या में जहां श्री रामलला विराजमान हैं, वही भगवान राम का जन्मस्थान है। न्यायालय का यह निर्णय इस वर्ष की सबसे बड़ी घटना है, चारों ओर रामलला की जय-जयकार गूंज उठी। महंगाई और घोटालों के कारण यह वर्ष उथल-पुथल वाला रहा। इस उथल-पुथल के पीछे केन्द्र की संप्रग सरकार की विफलता है। यह सरकार और इस सरकार की अगुआई करने वाली सोनिया पार्टी की पूरी ताकत इस वर्ष "युवराज" राहुल गांधी को "योग्यता का इंजेक्शन" देने में लगी रही। फिर भी "युवराज" कसौटी पर खरे नहीं उतरे। बिहार में कांग्रेस की करारी शिकस्त ने यह साबित कर दिया। हताश एवं निराश सरकार, कांग्रेसी नेता और खुद "युवराज" ने हिन्दुत्व, संत-महात्मा, हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों और उनके वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को बदनाम करने का अभियान-सा चलाए रखा। इस राजनीतिक षड्यंत्र के विरुद्ध राष्ट्रीय चेतना के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं को अपने 85 वर्ष के इतिहास में पहली बार धरना-प्रदर्शन कर सशक्त विरोध दर्ज करना पड़ा। जनता

वर्ष 2010 की शुरुआत संप्रग सरकार की तुष्टीकरण नीति के विरोध के साथ हुई। न्यायमूर्ति (से.नि.) सगीर अहमद की अध्यक्षता वाले कार्यदल ने जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता देने की सिफारिश की। इसके विरुद्ध समस्त राष्ट्रवादी संगठनों ने जम्मू से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन किया। 10 जनवरी को जम्मू में "जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम" ने एक गोष्ठी आयोजित की।

6 जनवरी को उल्फा के सरगना परेश बरुआ ने आतंक का नया खाका ई मेल के जरिए भेजा। कहा जाता है कि इसके लिए बरुआ की मदद चीन और अलकायदा ने की।

14 जनवरी को हरिद्वार में कुम्भ का प्रथम मुख्य स्नान हुआ।

जनवरी के प्रथम सप्ताह में चैन्ने में रेल राज्यमंत्री और मुस्लिम लीग के सांसद ई.अहमद ने एक कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलित करने से मना किया और कहा "यह इस्लाम-विरोधी" है।

26 जनवरी को श्रीनगर के लाल चौक पर 1991 के बाद पहली बार तिरंगा नहीं फहरा। उमर सरकार की इस विफलता को लेकर राष्ट्रवादियों में आक्रोश पनपा।

जनवरी के अन्तिम सप्ताह में हैदराबाद में हिन्दू धर्म आचार्य सभा के सम्मेलन में धर्माचार्यों ने कहा, " मन्दिरों पर सरकारी नियंत्रण बर्दाश्त नहीं।"

31 जनवरी को दिल्ली में विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा समिति के एक प्रतिनिधिमण्डल ने राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल को गोरक्षा के समर्थन में कराए गए हस्ताक्षरों के संग्रह को सौंपा।

8 फरवरी को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने आंध्र प्रदेश में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण पर रोक लगाई। इसी दिन प. बंगाल सरकार ने सरकारी नौकरियों में मुसलमानों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की।

13 फरवरी को पुणे के जर्मन बेकरी में आतंकी हमला। 12 लोग मारे गए।

15 फरवरी को बंगाल के मिदनापुर जिले में शिल्दा स्थित सुरक्षा बल शिविर में माओवादियों ने हमला करके 25 सुरक्षाकर्मियों की जान ले ली।

17 फरवरी को

21 फरवरी को पाकिस्तान में दो सिखों की नृशंस हत्या पर भारत में तीखा आक्रोश दिखा।

24 फरवरी को कोल्लम (केरल) में विशाल हिन्दू सम्मेलन। सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने लगभग 1 लाख गणवेशधारी स्वयंसेवकों को सम्बोधित किया।

27 फरवरी को प्रसिद्ध समाजसेवी श्री नानाजी देशमुख का चित्रकूट में निधन। 28 फरवरी को उनकी मृत देह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को सौंपी गई।

27 फरवरी को ही संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता डा. श्रीपति शास्त्री का भी निधन पुणे में हुआ।

2 मार्च को बरेली (उ.प्र.) में दंगे हुए। कांग्रेसी नेता तौकीर रजा के नेतृत्व में कट्टरपंथियों ने चुन-चुन कर हिन्दुओं को निशाना बनाया।

19 मार्च को कर्नाटक सरकार ने राज्य विधानसभा में गोहत्या निषेघ विधेयक पारित करवाया।

20 मार्च को माधोपुर (पंजाब) में डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भव्य प्रतिमा स्थापित। प्रतिमा का अनावरण श्री मोहनराव भागवत, श्री लालकृष्ण आडवाणी व श्री नितिन गडकरी ने किया।

27 मार्च को मेरठ में वरिष्ठ प्रचारक श्री ज्योति स्वरूप ने अन्तिम सांस ली।

5 अप्रैल को बृहत् बंगलूरु महानगर पालिका चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत।

6 अप्रैल को दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) में नक्सली हमले में 76 जवान शहीद। नक्सलियों द्वारा पहली बार

मार्च के प्रथम सप्ताह में रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट ने गैर-मणिपुरी लोगों को 31 मई तक मणिपुर छोड़ने की धमकी दी।

11 अप्रैल से मणिपुर में उग्रवादी संगठनों ने आर्थिक नाकेबंदी कर सरकार को खुली चुनौती दी। लगभग 65 दिन तक मणिपुर सड़क मार्ग से शेष भारत से कटा रहा।

13 अप्रैल को श्रीनगर घाटी में भारत-विरोधियों ने एक आतंकवादी फारुक अहमद खान को अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के विरुद्ध प्रदर्शन किया।

21 अप्रैल को दिल्ली में महंगाई के खिलाफ भाजपा की विशाल रैली।

29 अप्रैल को थिम्फू (भूटान) में भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता असफल हुई।

6 मई को मुम्बई में पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी की सजा सुनाई गई।

12 मई को पूरे देश में भाजपा ने सी.बी.आई. के दुरुपयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया।

19 मई को फ्रांस सरकार ने उस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें सार्वजनिक जगहों पर मुस्लिमों के बुर्का पहनने पर पाबंदी है।

28 मई को पश्चिम मिदनापुर (प.बंगाल) में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पर नक्सलियों ने हमला करके 200 से ज्यादा यात्रियों को मौत के घाट उतार दिया।

7 जून को भोपाल गैस काण्ड पर अदालती फैसले से कोहराम मचा। फैसले के बाद कांग्रेस पर आरोप लगे कि उसने इस काण्ड के आरोपियों की मदद की।

26 जून को त्रिनिदाद और टोबैगो की श्रीमती कमला प्रसाद बिसेसर ने गीता हाथ में लेकर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

28 जून को अनंतनाग (कश्मीर) में अलगाववादियों ने एक शिव मन्दिर को जला डाला।

2 जुलाई को कोलकाता उच्च न्यायालय ने बंगाल की वाममोर्चा सरकार के उस निर्णय पर रोक लगा दी, जिसमें सरकारी मकानों के आवंटन पर मुस्लिमों को आरक्षण देने की बात कही गई थी।

4 जुलाई को केरल में जिहादियों ने प्रोफेसर जोसफ का दाहिना हाथ काट दिया।

7 जुलाई को रायपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे और वरिष्ठ पत्रकार श्री रामशंकर अग्निहोत्री का निधन हो गया।

16 जुलाई को नई दिल्ली में तथाकथित "हिन्दू आतंकवाद" का हौवा खड़ा करने के खिलाफ हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया।

16 जुलाई को इस्लामाबाद में भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत में पाकिस्तान ने सामान्य शिष्टाचार की धज्जियां उड़ा दीं। किन्तु भारतीय विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की। इस कारण उनकी कड़ी आलोचना भी हुई।

केरल के मुख्यमंत्री अच्युतानन्दन ने केरल में बढ़ती इस्लामी कट्टरता को देखते हुए कहा, "क्या निकट भविष्य में भारत का फिर विभाजन होगा?" एक वामपंथी नेता के इस बयान से हलचल मच गई। सेकुलरों ने उन्हें माफी तक मांगने की सलाह दी।

2 अगस्त को अनंतनाग एवं कश्मीर घाटी के अन्य स्थानों पर पत्थरबाजों ने तोड़फोड़ की। पूरी घाटी बेकाबू हुई।

6 अगस्त को लेह में बादल फटने से भारी वर्षा हुई। लगभग 300 लोग मारे गए और हजारों लोग बेघर हुए। बेघरों को बसाने के लिए स्वयंसेवकों ने पूरे देश से सहायता भेजी।

24 अगस्त को केन्द्र सरकार ने उत्तराखण्ड में लोहारी नागपाला जलविद्युत परियोजना रद्द करने की घोषणा की। विश्व हिन्दू परिषद ने इसके विरुद्ध अभियान छेड़ रखा था।

4 सितम्बर को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का परिणाम घोषित हुआ। इसमें अभाविप को अभूतपूर्व सफलता मिली। राहुल गांधी के प्रयासों के बावजूद कांग्रेस समर्थित एन.एस.यू. आई. बुरी तरह पराजित हुई।

6 सितम्बर को संघ के वरिष्ठ प्रचारक ठाकुर राम सिंह जी ने नश्वर शरीर को त्यागा।

6-8 सितम्बर तक देगंगा (प. बंगाल) में साम्प्रदायिक दंगे हुए। मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं को जान-माल की बड़ी क्षति पहुंचाई। इसके विरोध में वहां दुर्गापूजा का आयोजन नहीं हुआ।

20 सितम्बर को दिल्ली से एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमण्डल श्रीनगर गया। इसमें शामिल सेकुलर नेताओं ने अलगाववादियों की मिजाजपुर्सी की सारी हदें तोड़ दीं।

30 सितम्बर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अयोध्या में जहां श्री रामलला विराजमान हैं, वही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि है। इस निर्णय से पूरे विश्व के हिन्दुओं में हर्ष की लहर दौड़ गई।

अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारत को चुनौती देते हुए कहा, "जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण विलय नहीं हुआ। हमारा सशर्त अद्र्धमिलन हुआ है...।" इस बयान की देशभर में तीव्र आलोचना हुई। किन्तु कांग्रेस के "युवराज" राहुल गांधी ने कहा, "उमर ने गलत क्या कहा है।"

14 अक्तूबर को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्प ने तीन दिन के अन्दर दूसरी बार विधानसभा में बहुमत प्राप्त किया। भारतीय राजनीति में ऐसा पहली बार हुआ और इसके पीछे वही सोनिया पार्टी थी, जो दक्षिण की एकमात्र भाजपा सरकार को सहन नहीं कर पा रही है।

3 से 14 अक्तूबर तक दिल्ली में राष्ट्रमण्डल खेलों का आयोजन हुआ। भारतीय खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। किन्तु खेल आयोजन से जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और इस आयोजन को "भ्रष्टमंडल खेल" कहा जाने लगा।

6-9 नवम्बर तक अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत का दौरा किया, पर उन्होंने भारतीय हितों की अनदेखी की।

10 नवम्बर को देशभर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने हिन्दुत्व व संत-महात्माओं को आतंकवाद से जोड़कर बदनाम करने के राजनीतिक षड्यंत्र के खिलाफ अभूतपूर्व धरना-प्रदर्शन दिया।

14 नवम्बर को 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले के कारण दूरसंचार मंत्री ए.राजा ने इस्तीफा दिया।

16 नवम्बर को 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रपट संसद के पटल पर रखी गई। ए. राजा पर 1.76 लाख करोड़ रु. के घपले का आरोप लगा।

18 नवम्बर को सर्वोच्च न्यायालय ने 2 जी स्पेक्ट्रम पर प्रधानमंत्री से हलफनामा मांगा। डा. मनमोहन सिंह पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनसे सर्वोच्च न्यायालय ने किसी घोटाले के सन्दर्भ में हलफनामा मांगा।

24 नवम्बर को बिहार में जदयू-भाजपा गठबंधन सरकार ने ऐतिहासिक जीत प्राप्त कर सत्ता में जोरदार वापसी की। साम्प्रदायिक और जातिवादी राजनीति करने वाले लालू-पासवान की हार हुई और कांग्रेस की ऐसी ऐतिहासिक दुर्गति हुई कि उसे सिर्फ 4 सीटें मिलीं।

26 नवम्बर को गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार एवं भारत सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा, "घोषित बंगलादेशी भारत में कैसे घूम रहे हैं?"

2 दिसम्बर को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्राह्मोस के उन्नत संस्करण का सफल परीक्षण हुआ। यह मिसाइल 290 कि.मी. तक मार कर सकती है।

5 दिसम्बर को फ्रांस के राष्ट्रपति भारत दौरे के दौरान दिल्ली पहुंचे।

8 दिसम्बर को वाराणसी के शीतला घाट पर आरती के समय बम विस्फोट। इसकी जिम्मेदारी जिहादी आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने ली।

9 दिसम्बर को अमरीका में भारतीय राजदूत मीरा शंकर के साथ अमरीकी रक्षाकर्मियों ने जांच के नाम पर बदसलूकी की, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने साड़ी पहन रखी थी।

10 दिसम्बर को बिहार सरकार ने विधायक निधि खत्म करने का निर्णय लिया। बिहार पहला ऐसा राज्य है, जिसने विधायक निधि खत्म की है।

11 दिसम्बर को कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने यह कह कर अपनी पार्टी को शर्मसार किया कि हेमन्त करकरे ने अपनी मौत से कुछ घंटे पहले उन्हें फोन कर कहा था कि हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों से उनकी जान को खतरा है।

12 दिसम्बर को बैडमिंटन खिलाड़ी सा

13 दिसम्बर को संसद का शीतकालीन सत्र खत्म हुआ। पूरे सत्र में एक भी काम नहीं हुआ, जो भारतीय संसदीय इतिहास में एक "रिकार्ड" है। पूरे सत्र में 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जे.पी.सी. से जांच कराने की मांग कर विपक्ष अड़ा रहा और सरकार ने भ्रष्टाचारियों को बचाते हुए अड़ियल रवैया अपनाया।

15 दिसम्बर को चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ भारत दौरे पर आए।

17 दिसम्बर को विकिलीक्स ने खुलासा किया कि राहुल गांधी मानते हैं कि भारत में लश्कर से अधिक घातक हिन्दू संगठन हैं। इस पर कांग्रेस को जवाब देते नहीं बना।

19 दिसम्बर को क्रिकेटर सचिन तेन्दुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच खेलते हुए 50वां शतक बनाया, जो विश्व कीर्तिमान है। द

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