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भाजपा नेताओं ने परिसीमन आयोग से की मुलाकात, कश्मीरी पंडितों, एससी—एसटी समुदाय के लिए सीटें आरक्षित करने की रखी मांग

WebdeskJul 09, 2021, 01:04 PM IST

भाजपा नेताओं ने परिसीमन आयोग से की मुलाकात, कश्मीरी पंडितों, एससी—एसटी समुदाय के लिए सीटें आरक्षित करने की रखी मांग



 


गत गुरुवार को जम्मू में भाजपा नेताओं ने परिसीमन आयोग से मुलाकात की। इस दौरान भाजपा के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। प्रतिनिधिमंडल ने परिसीमन आयोग के समक्ष 1995 में हुई परिसीमन की खामियों को तथ्यों के साथ उजागर किया है


गत गुरुवार को जम्मू में भाजपा नेताओं ने परिसीमन आयोग से मुलाकात की। इस दौरान भाजपा के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविन्द्र रैना, पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ निर्मल सिंह, कविन्द्र गुप्ता, मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी और पूर्व विधायक आरएस पठानिया शामिल रहे। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना ने कहा कि हमने परिसीमन आयोग के समक्ष 1995 में हुई परिसीमन की खामियों को तथ्यों के साथ उजागर किया है।

आयोग से हमने अपील की है कि परिसीमन प्रक्रिया के दौरान सिर्फ जनसंख्या ही नहीं अन्य मानकों को महत्व देकर जम्मू को उसका हक दिया जाना चाहिए। इसके अलावा पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के लिए आरक्षित 24 विधानसभा सीटों में से एक तिहाई सीटें प्रदेश में बसे लोगों के लिए ओपन की जानी चाहिए। क्योंकि 1947, 1965 और 1971 में कई लोग जम्मू-कश्मीर में आकर बसे हैं। इसलिए उन सभी लोगों की 8 सीटों को जम्मू-कश्मीर के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। रैना ने कहा कि परिसीमन प्रकिया के लिए जो भारतीय संविधान के 6 प्रमुख बिंदु हैं, उनके आधार पर परिसीमन किया जाना चाहिए। सिर्फ जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करना ठीक नहीं होगा, इससे लोगों को न्याय नहीं मिल पायेगा। इसके अलावा कश्मीरी पंडितों के लिए कश्मीर घाटी में 3 सीटें आरक्षित की जानी चाहिए।

जिसमें एक सीट उत्तरी कश्मीर में, 1 मध्य कश्मीर में और 1 दक्षिण कश्मीर में। वहीं जम्मू- कश्मीर के दलितों को उनकी जनसंख्या के आधार पर न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुर्जर बकरवाल (एसटी) समुदाय को पूरे भारतवर्ष में राजनीतिक आरक्षण मिलता है, इसी तर्ज पर अब उन्हें जम्मू-कश्मीर में भी राजनीतिक आरक्षण मिलना चाहिए। जिससे इन समुदाय के लोगों नए परिसीमन के जरिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।
 

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