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राज्य

जजों की सुरक्षा राज्‍यों के भरोसे नहीं छोड़े केंद्र, जरूरी कदम उठाए: सर्वोच्‍च न्‍यायालय

WebdeskAug 17, 2021, 02:55 PM IST

जजों की सुरक्षा राज्‍यों के भरोसे नहीं छोड़े केंद्र, जरूरी कदम उठाए: सर्वोच्‍च न्‍यायालय


धनबाद के जज उत्‍तम आनंद हत्‍याकांड की सुनवाई के दौरान सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने राज्‍यों से जजों की सुरक्षा को लेकर 10 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। तय समय में रिपोर्ट नहीं देने पर एक लाख का जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है।


झारखंड के धनबाद जिले में जज उत्‍तम आनंद की हत्‍या के बाद सर्वोच्‍च न्‍यायालय अब जजों की सुरक्षा को लेकर सख्‍त हो गया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि जजों की सुरक्षा केवल राज्‍यों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती है, केंद्र सरकार इसके लिए जरूरी कदम उठाए। इसी के साथ शीर्ष अदालत ने 10 दिन के भीतर राज्‍य सरकारों से रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही, चेतावनी दी है कि अगर राज्‍य सरकारों ने रिपोर्ट देने में देरी की तो उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

जज उत्‍तम आनंद की मौत के मामले में सर्वोच्‍च न्‍यायालय स्‍वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। सुनवाई के दौरान मंगलवार को मुख्‍य न्‍यायाधीश एन.वी. रमण ने केंद्र से जजों की सुरक्षा को लेकर केंद्र से सवाल किया। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस व्यवस्था राज्यों का विषय है। 2007 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जजों की सुरक्षा के लिए एक दिशानिर्देश जारी किया था। इसमें राज्‍यों के पुलिस महानिदेशकों से कहा गया था कि जजों की सुरक्षा में पुलिस की विशेष शाखा और खुफिया इकाई के जवानों को तैनात करने को कहा गया था। उन्‍होंने कहा कि मार्च 2020 में भी दोबारा ऐसा ही दिशानिर्देश जारी गया था। लिहाजा, अब नए दिशानिर्देश की कोई जरूरत नहीं है। इस बाबत 11 सितंबर, 2020 को केंद्र की ओर से इस मामले में हलफनामा दाखिल किया गया था। इस पर राज्यों को रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन अभी तक राज्‍यों ने इस पर हलफनामा दाखिल नहीं किया है। बता दें कि अभी तक आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और महाराष्‍ट्र ने हलफनामा दाखिल किया है।

इस पर सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिन राज्यों ने अभी तक हलफनामा दाखिल नहीं किया है, उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि 10 दिन के अंदर हलफनामा दाखिल नहीं हुआ तो राज्‍य के मुख्‍य सचिव को पेश होना होगा। साथ ही, सॉलिसिटर जनरल से कहा, ‘‘हम जानते हैं कि यह राज्यों का विषय है। सुरक्षा के निर्देश हम नहीं दे सकते। इसलिए हम चाहते हैं कि आप (केंद्र) राज्यों के साथ बैठकर यह तय करें कि आप सुरक्षा के लिए क्या कर सकते हैं? वहीं, न्‍यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूछा कि क्‍या उन दिशानिर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। राज्य सरकारें अदालत परिसर में किस हद तक जजों को सुरक्षा दे रही हैं। आप हर राज्य के डीजीपी से बात कर उनसे रिपोर्ट मांग सकते हैं। कुछ राज्यों ने सीसीटीवी लगाने की बात कही है। सीसीटीवी क्‍या कर लेगा? क्या यह जजों पर होने वाले हमले को रोक देगा?  जजों पर होने वाले हमले को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। न्यायिक अधिकारियों पर लगातार हमले हो रहे हैं और राज्य सीसीटीवी के लिए निधि नहीं होने का रोना रो रहे हैं।

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