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राज्य-झारखंड: किसान ने कहा-'मुफ्त में ले लो तरबूज', लेकिन सेना ने पूरे पैसे में खरीदे पांच टन

WebdeskJun 12, 2021, 12:54 PM IST

राज्य-झारखंड: किसान ने कहा-'मुफ्त में ले लो तरबूज', लेकिन सेना ने पूरे पैसे में खरीदे पांच टन

बोकरो का तरबूज किसान रंजन कुमार उस समय भावुक हो गया जब सेना के अधिकारियों ने उसकी 5 टन तरबूज मुफ्त में देने की पेशकश के बावजूद] उससे तरबूज बाजार भाव पर पूरे पैसे में खरीदे

खूंटी में किसानों से खरीदे तरबूजों के साथ सीआरपीएफ के जवान   (फाइल चित्र)

लॉकडाउन के दौरान प्राकृतिक आपदाएं भी कम नहीं आईं भारत में। खेती—किसानी पर इसका गहरा असर पड़ा। पूर्वी भारत में फसलें कम हुईं या जितनी हुईं बाजार में बेचने में दिक्कत आई। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप, हारी—बीमारी से लोगों के असमय दुनिया से चले जाने की दर्दभरी खबरों के बीच बोकारो, झारखंड से एक सुखद और सकारात्मक खबर मिली है।

हुआ यूं कि देश में अन्य स्थानों के मुकाबले, झारखंड के तरबूज के किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। लॉकडाउन की वजह से किसान अपने तरबूज बाजार तक नहीं ले जा पाए, न ही बाहर से व्यापारी इन्हें लेने पहुंच पाए। लिहाजा, किसान पके तरबूजों को खेतों में ही रखने का मजबूर हो गए। इधर गत मई महीने में चक्रवाती तूफान ‘यास’ आया तो मुसीबत और बढ़ गई। बोकारो का युवा किसान रंजन कुमार महतो भी अपने पके तरबूजों की फसल को यूं ही पड़े रहते देखकर परेशान था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इनको कैसे बेचे। आखिरकार उसने सेना की स्थानीय छावनी से संपर्क किया और उनसे बिना पैसे के ही 5 टन तरबूज लेने का अनुरोध किया जिससे वे खराब न जाएं।

उसकी परेशानी की जानकारी होने पर रामगढ़ स्थित छावनी से सिख रेजिमेंट के कमांडेंट ब्रिगेडियर एम. श्रीकुमार अन्य कुछ अधिकारियों के साथ किसान रंजन कुमार के खेत पर पहुंचे। रंजन कुमार ने उन्हें मु्फ्त में उसके 5 टन तरबूज ले जाने को कहा। लेकिन सेना ने रंजन से उसके तरबूज मुफ्त में नहीं लिए, बल्कि उसे बाजार भाव से 5 टन तरबूजों की कीमत अदा की, उसके बाद ही खेत से तरबूज ले जाए गए।

सिख रेजिमेंट के कमांडेंट किसान रंजन कुमार के खेत पर पहुंचे। रंजन कुमार ने उन्हें मु्फ्त में उसके 5 टन तरबूज ले जाने को कहा। लेकिन सेना ने रंजन से उसके तरबूज मुफ्त में नहीं लिए, बल्कि उसे बाजार भाव से 5 टन तरबूजों की कीमत अदा की, उसके बाद ही खेत से तरबूज ले जाए गए।


उल्लेखनीय है कि रंजन ने रांची विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि ली है। उसके बाद उसने खेती करने का फैसला किया।

दरअसल ब्रिगेडियर श्रीकुमार रंजन के हौसले से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने उसकी दिक्कतों को समझा और यह सराहनीय कदम उठाया। रामगढ़ छावनी बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर श्रीकुमार ने बताया कि रंजन ने 25 एकड़ जमीन, 5,000 रुपये प्रति एकड़ के सालाना किराए पर ली। उसने 15 लाख रुपये लगाकर छह एकड़ में तरबूज उगाए हैं। कुल 120 टन तरबूज हुए उसके खेत में। सेना के 5 टन तरबूज खरीदने के बाद, बचे तरबूजों को अब भी खरीदारों का इंतजार है।

रंजन सेना के इस सहयोग से खुश है। उसने यहां तक बताया कि गांव में कोई 2 रु. किलो के हिसाब से भी इन्हें नहीं खरीद रहा था, लॉकडाउन ने उसका बाजार तक पहुंचना भी मुश्किल बनाया हुआ था। तरबूज खराब न हों, बस इसी की चिंता थी। आखिरकार, उसने अपने बहादुर सैनिकों को मुफ्त में तरबूज देने का फैसला किया। फिर रंजन ने छावनी से बात की।

सीआरपीएफ भी मदद को आई आगे
इससे पहले खूंटी से भी ऐसी ही एक सकारात्मक खबर आई थी। खूंटी में बड़ी मात्रा में हुई तरबूज की खेती को खरीदार मिले थे। वहां भी किसान लॉकडाडन के कारण अपनी तरबूज की फसल न बिकने से काफी परेशान थे। इस परेशानी से किसानों को राहत दिलाई थी सीआरपीएफ की 94 बटालियन ने। सीआरपीएफ ने किसानों से बड़ी मात्रा में उचित मूल्य पर तरबूज खरीदकर अपने शिविरों में भेजे हैं। खूंटी नक्सल प्रभावित जिला है इसलिए यहां सीआरपीएफ के कई शिविर हैं। सीआरपीएफ स्थानीय किसानों से तरबूज लेकर अपने जवानों को उपलब्ध करा रही है।

 

कितने कारगर हैं राज्य सरकार के प्रयास!
अभी पिछले दिनों की ही बात है। झारखंड में तरबूज के किसानों को हो रहे नुकसान को देखते हुए राज्य के कृषि मंत्री ने उद्यान विभाग के निदेशक, 'वेजफेड' के प्रबंध निदेशक सहित दूसरे अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया कि वे किसानों की खेतों में पड़ी तरबूज की फसल पर जिला स्तर पर समन्वय स्थापित करें। जिन जिलों में तरबूज की खेती नहीं हो रही है, उन जिलों में तरबूज भेजे जाएं। बाजार समिति के सचिव को कहा गया कि वे अपने जिले में तरबूज की पैदावार और खपत की स्थिति के बारे में बताएं। कृषि विभाग के सचिव ने 'वेजफेड' के प्रबंध निदेशक से कहा है कि राज्य के सभी जिलों में तरबूज की खरीदारी करके घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। लेकिन अगर ऐसा होता तो तरबूज के किसान यूं परेशान न होते, उनकी पैदावार यूं खेतों पड़ी न रहती। सूत्रों के अनुसार, किसान अब भी हताश हैं और सरकार के प्रयासों को दिखावा बता रहे हैं।
हालांकि भाजपा ने भी कहा कि राज्य सरकार दिखावे के लिए ऐसी 'व्यवस्था' कर रही है। वास्तविकता में कुछ हो नहीं रहा है। प्रदेश भाजपा ने राज्य सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

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