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जर्मनी: ‘अल्लाहू-अकबर’ बोलते हुए सोमाली शरणार्थी ने तीन को घोंपा चाकू

WebdeskJun 29, 2021, 11:49 AM IST

जर्मनी: ‘अल्लाहू-अकबर’ बोलते हुए सोमाली शरणार्थी ने तीन को घोंपा चाकू

जर्मनी में एक बार फिर तेज हुई कट्टर इस्लामवादी 'शरणार्थियों' की समस्या से छुटकारा दिलाने की मांग
 

जर्मनी के शहर वुर्जबर्ग में एक सोमाली शरणार्थी दिनदहाड़े लोगों पर चाकू लेकर टूट पड़ा और यहां-वहां वार करते हुए उसने तीन लोगों की जान ले ली और पांच को बुरी तरह घायल कर दिया। हत्यारा जोर जोर से नारे लगा रहा था 'अल्लाहू अकबर'। शहर के मशहूर बार्बरोसा स्क्वायर पर हुआ ये हमला, लोगों में दहशत पैदा कर गया।
    जानकारी के अनुसार, हत्यारे की पहचान सोमालिया के 24 वर्षीय शरणार्थी के तौर पर हुई है। 2015 से वह इस वुर्जबर्ग शहर में रह रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि हमलावर एक बड़ा सा चाकू लिए था जिससे वह आते-जाते लोगों पर हमला बोल रहा था।

    हमले में एक बच्चे और उसके एक अभिभावक सहित तीन लोग मारे गए हैं। हत्यारा हमला करने पर 'अल्लाहू-अकबर' के नारे लगा रहा था। एक स्थानीय महिला जूलिया का कहना था कि हमलावर को चाकू से हमला करते देखकर कुछ लोगों ने रोकने के लिए उस पर कुर्सियां, छाते, सेलफोन फेंके। पर उस पर कोई असर नहीं हुआ। लोअर फ्रैंकोनिया पुलिस वहां पहुंची जिसने हमलावर के पैर में गोली मारी और फिर उसे गिरफ्तार किया गया।
     
    सोशल मीडिया पर वायरल इस घटना के एक वीडियो में सोमाली हमलापर नंगे पांव है और उसके हाथ में एक बड़ा चाकू है जिसे वही आते-जाते लोगों पर लहरा रहा है। एक अन्य वीडियो में बार्बरोसा स्क्वायर पर लाठी एवं कुर्सियां लिए स्थानीय लोग हमलावर का पीछा करते दिख रहे हैं। पुलिस ने बताया कि इस हमले के पीछे के उद्देश्य की जांच हो रही है।

    बवेरिया के सुरक्षा अधिकारी जोचिम हेरमैन का कहना है कि हमले के पीछे ‘इस्लामी कट्टरपंथ’ वजह हो सकता है क्योंकि हमलावर ‘अल्लाहू-अकबर’ चिल्ला रहा था। यह हमला एक संभावित ‘इस्लामी कट्टरपंथी उद्देश्य’ की तरफ संकेत करता है।

    वुर्जबर्ग की आबादी 1,30,000 है। यह शहर म्युनिख और फ्रैंकफर्ट के बीच मौजूद है। जर्मनी ने 2015 में गरीब और युद्धग्रस्त देशों के शरणार्थियों को खुले दिल से अपने यहां स्वीकारा था। उक्त सोमालियाई भी तभी वुर्जबर्ग में आया था। जर्मनी में शरणार्थियों की वजह से अपराध का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। करीब चार साल पहले सरकार ने भी माना था कि करीब 13 प्रतिशत शरणार्थियों की जानकारी सरकार के पास है ही नहीं, जो या तो अवैध रूप से देश में रह रहे हैं या कहीं और चले गए हैं। इसके साथ ही, यूरोप के कई देशों में मध्य एशियाई और अफ्रीकी देशों से आए शरणार्थी अब वहां के मूल निवासियों के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं और कई देशों में लोग अब इन्हें निकाल बाहर करने की मांग करने लगे हैं। लेकिन मानवाधिकार की बात करके कई इस्लामी संगठन और सेकुलर एक्टिविस्ट उनके 'दर्द' का दुष्प्रचार करके 'मानवता' की दुहाई देने लगते हैं।


    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि हमलावर एक बड़ा सा चाकू लिए था जिससे वह आते-जाते लोगों पर हमला बोल रहा था। हमले में एक बच्चे और उसके एक अभिभावक सहित तीन लोग मारे गए हैं। हत्यारा हमला करने पर 'अल्लाहू-अकबर' के नारे लगा रहा था। एक स्थानीय महिला जूलिया का कहना था कि हमलावर को चाकू से हमला करते देखकर कुछ लोगों ने रोकने के लिए उस पर कुर्सियां, छाते, सेलफोन फेंके। पर उस पर कोई असर नहीं हुआ।

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