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भारत

शरद चंद्र की किरणें खीर में डालती हैं 'अमृत', और भी हैं कई लाभ

WebdeskOct 20, 2021, 04:14 PM IST

शरद चंद्र की किरणें खीर में डालती हैं 'अमृत', और भी हैं कई लाभ
खीर

प्राचीनकाल में शरद पूर्णिमा की रात आयुर्वेद के मनीषियों ने जड़ी-बूटियों से जीवनदायी औषधियों के निर्माण की परंपरा शुरू की थी।

 

शरद चंद्र की शीतलता से मन तो शांत होता ही है, इसके औषधीय महत्ता भी है। शरद पूर्णिमा की रात्रि अमृत की रश्मियां संजीवनी बनकर बरसती हैं। इस दिन चंद्रमा धरती के सर्वाधिक निकट होता है, इस कारण इसकी किरणें धरती पर छिटक कर अन्न-जल व वनस्पति को अपने औषधीय गुणों से अधिक सघनता से सिंचित करती हैं। इससे वनस्पतियों में नया प्राणतत्व आ जाता है। इसीलिए प्राचीनकाल में शरद पूर्णिमा की रात आयुर्वेद के मनीषियों ने जड़ी-बूटियों से जीवनदायी औषधियों के निर्माण की परंपरा शुरू की थी।

आयुर्वेद के मनीषियों ने इस चंद्र अमृत का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए खीर की परंपरा भी चलाई। मिट्टी के बर्तन में खीर बनाकर उसे घर की छत पर खुले आकाश के नीचे रखने के बाद अगले दिन सुबह इसके सेवन के कई लाभ हैं। लखनऊ के जाने-माने आयुर्वेदाचार्य अजय दत्त शर्मा कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की यह खीर श्वास और दमा के रोगियों के लिए काफी लाभदायक होती है। ऋतु परिवर्तन के कारण इस समय पित्त प्रकोप की आशंका रहती है। इसलिए इस खीर को खाने से पित्त भी शांत हो जाता है। इस खीर के सेवन व चंद्र दर्शन से नेत्रज्योति भी बढ़ती है। इस पर्व को स्वास्थ्य संरक्षण की दृष्टि से "मुहूर्त विशेष" की मान्यता हासिल है।

खीर की औषधीय महत्ता वैज्ञानिक प्रयोगों से भी परखी गई है। कुछ साल पहले बीएचयू के वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया था। उक्त अध्ययन में पाया गया था कि खीर बनाने के प्रयुक्त दुग्ध में मौजूद लैक्टिक अम्ल और चावल में मौजूद स्टार्च, यह दोनों तत्व चन्द्रकिरणों की शक्ति को अधिक मात्रा में अवशोषित कर अधिक गुणवत्तायुक्त हो जाते हैं। काशी के आयुर्वेदाचार्य शांतनु मिश्र बताते हैं कि शरद पूर्णिमा पर काशी के गढ़वाघाट मठ से अनेक वर्षों से अस्थमा पीड़ितों के लिए खास तरह की औषधि का वितरण किया जाता है, जो चंद्रकिरणों से तैयार की जाती है। वह बताते हैं कि शरद पूर्णिमा को ब्रह्म मुहूर्त में चंद्रमा की किरणों के बीच जब गंगा में स्नान किया जाता है तो मनुष्य के शरीर में अनूठी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।

रोग का कारण त्रुटिपूर्ण जीवनशैली
हमारी वैदिक मनीषा द्वारा सदियों पूर्व बनाये गये स्वास्थ्य संरक्षण के  नियम-उपनियम आज भी उतने ही कारगर हैं तथा समूची दुनिया इनकी  वैज्ञानिकता को जान-परख कर चमत्कृत है। आज के समय में रोगों की  भरमार का मूल कारण हमारी त्रुटिपूर्ण जीवन शैली है। दूषित व ऋतु  विपरीत आहार-विहार व मानसिक तनाव के कारण हमारी जीवन शक्ति क्षीण हो रही है। इससे उबरने के लिए प्रयोगों पर कसौटी पर खरे उतरे। शरद पूर्णिमा के दिन किये जाने वाले स्वास्थ्य संरक्षण के उपचारों को हर भारतवासी को अपनाना चाहिए।

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