चर्चित आलेख
संपादकीय
बेलाग सितंबर. २८, २०२०

विश्व को चाहिए कई वैक्सीन

अधूरी कुंठित विचारधाराओं, व्यक्तिगत हितपूर्ति की इच्छाओं पर पलते विषाणुओं का इलाज कोविड जितना ही जरूरी है। विश्व को लोकतंत्र और वैश्विक मानवता की वैक्सीन की जरूरत है। दुनिया में लोकतंत्र कैसे मजबूत हो, दुनिया में समानता के अधिकारों की बात कैसे हो और ये जो छलने वाले लोग हैं, इनकी वैक्सीन अगर नहीं खोजेंगे तो ऐसे वायरस बार-बार आते रहेंगे।एक चलचित्र में बहुत सारे स्थिर-चित्र होते हैं, लेकिन देखने वाले को उसमें शामिल किसी खास चित्र के कितने आयाम हैं, इसका अंदाजा तब तक नहीं होता जब तक उसे फ्रीज नहीं किया जाता। वा

22 Days 5 Hr ago
नारद - खबर मीडिया की
सोशल मीडिया अगस्त. ०५, २०२०

‘राजनीतिक दिशानिर्देश’ पर खबरें गढ़ता मीडिया

कुछ मीडिया घरानों की फर्जी खबर और रिपोर्ट पर प्रियंका वाड्रा बहुत फुर्ती से ट्वीट करती हैंभातीय मीडिया के  एक वर्ग विशेष के लिए बीता सप्ताह बहुत कठिन रहा। राम मंदिर को लेकर अकुलाहट तो है ही, राफेल और नई शिक्षा नीति को लेकर भी कुलबुलाहट मची रही। खुद को सेकुलर बताने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से लेकर रक्षा और शिक्षा तक की नीतियों में हिंदू-मुसलमान का कोण तलाश रहे हैं। मीडिया का यह रवैया कई तरह की समस्याएं पैदा करता है। कोई झूठी या मनगढ़त खबर अचानक सुर्खियों में छा जाती है और कोई वास्तविक मुद्दा कभी उ

76 Days 7 Hr ago
e संस्करण

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बहुरंग
चौपाल / ब्लॉग
सोशल मीडिया अक्टूबर. १९, २०२०

गेशे जम्पा उपन्यास की तेरहवीं कड़ी

नीरजा माधव हमारे देश में तिब्बती शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या है। चीन की विस्तारवादी नीति के परिणामस्वरूप एक अहिंसक धार्मिक देश तिब्बत पराधीन हो गया। 1959 में इसका चरमोत्कर्ष देखने को मिला जब तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष परम पावन दलाई लामा को अपने लाखों अनुयायियों के साथ अपना देश छोड़ भारत में शरण लेनी पड़ी। भारत में रहने वाला तिब्बती समुदाय तिब्बत में चीनी सत्ता से संघर्षरत तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत है। 19वीं सदी के अन्त तक तिब्बत स्वतंत्र था। इसके राजनैतिक, सांस्कृतिक और मानवीय अधिकारों के प्रश्न पर छाई वैश्

1 Days 2 Hr ago
वीडियो गैलरी
तथ्यपत्र / फैक्टशीट
तकनीक
साक्षात्कार अप्रैल. ३०, २०१९

''अंतरिक्ष में अपनी ताकत बढ़ाने का सामर्थ्य रखते हैं हम''

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी एंड प्लानिंग के निदेशक के पद से सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक नंबी नारायण का जीवन ऐसे असाधारण घटनाक्रमों का साक्षी है जिसने न सिर्फ उनके व्यक्तित्व पर दाग लगाने की कोशिश की बल्कि उन्हें खुद को निर्दोष साबित करने के लिए एक लंबी न्यायिक लड़ाई लड़नी पड़ी। इसके बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने न सिर्फ उन्हें हर आरोप से मुक्त किया, बल्कि केरल सरकार से उन्हें 50 लाख रुपए का मुआवजा भी दिलवाया। इसी वर्ष केन्द्र की मोदी सरकार ने उन्हें पद्मभूषण सम्मान से अलंकृ

539 Days 2 Hr ago
बोधिवृक्ष
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