पाञ्चजन्य - राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक पत्रिका | Panchjanya - National Hindi weekly magazine
Google Play पर पाएं
Google Play पर पाएं

चर्चित आलेख

ओडिशा: कन्वर्जन के लिए बार—बार आता था पादरी, ग्रामीणों ने इलाके में दोबारा न आने का शपथ पत्र लिखवाकर खदेड़ा

WebdeskSep 28, 2021, 06:26 PM IST

ओडिशा: कन्वर्जन के लिए बार—बार आता था पादरी, ग्रामीणों ने इलाके में दोबारा न आने का शपथ पत्र लिखवाकर खदेड़ा


डॉ समन्वय नंद

ओडिशा का जनजाति बहुल सुंदरगढ़ जिला हमेशा से ही ईसाई मिशनरियों के निशाने पर रहा है। यहां के एक गांव में बार—बार ईसाई पादरी द्वारा कन्वर्जन का प्रयास किया जा रहा था। ग्रामीणों ने पादरी को हिदायत दी और लिखित रूप से यहां प्रचार करने के लिए न आने की बात लिखवा कर ही छोड़ा
  

ओडिशा का जनजाति बहुल सुंदरगढ़ जिला हमेशा से ही ईसाई मिशनरियों के निशाने पर रहा है। इस जिले में कन्वर्ट लोगों की संख्या भी अन्य जिलों की तुलना में अधिक हैं। यहां के एक गांव में बार—बार ईसाई पादरी द्वारा कन्वर्जन का प्रयास किया जा रहा था। ग्रामीण उसे बार—बार यहां प्रचार के लिए न आने की हिदायद देते रहे। लेकिन वह फिर भी नहीं मान रहा था। पिछले 26 सितंबर को ग्रामीणों ने पादरी से लिखित रूप से यहां प्रचार करने के लिए न आने की बात लिखवा कर ही छोड़ा। इस कारण इलाके में काफी तनाव दिखा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रेंगाली इलाके के एक पादरी महेन्द्र साहू सुंदरगढ़ जिले के हेमगिरि प्रखंड स्थित कनिका पंचायत के टांगरडिही गांव में बार—बार आकर सरल लोगों को बहला—फुसलाकर उनका कन्वर्जन कराने का प्रयास करता था। वह पिछले एक साल से नियमित गांव में आता रहता था। ग्रामीण उसे बार—बार समझाते थे कि वह इस कार्य के लिए यहां न आये। लेकिन वह मानता नहीं था। बार—बार कन्वर्जन के प्रयास में यहां आता रहता था। लेकिन गत 26 सितंबर को ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया। ग्रामीण काफी आक्रोशित दिखे तथा इसे लेकर गांव में भारी तनाव देखा गया। बाद में ग्रामीणों ने पादरी को उनके प्रखंड में कभी मतांतरण के लिए न आने की बात लिखित में देने के बाद ही छोड़ा।

विश्व हिन्दू परिषद के सुंदरगढ़ के संगठन मंत्री रामचंद्र नाएक ने कहा कि कन्वर्जन के कारण समाज में अशांति व विभेद पैदा होता है। इसलिए कन्वर्जन को रोका जाना चाहिए। ओडिशा में अवैध रूप से कन्वर्जन रोकने के लिए कानून लागू है। लेकिन दुर्भाग्य से इस कानून का सही रूप से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इस कारण उस तरह की घटनाएं सामने आ रही है। आवश्यकता इस बात की है कि राज्य सरकार इस कानून को कड़ाई से लागू करे, ताकि गांव–गांव में किसी प्रकार की अशांति की स्थिति उत्पन्न न हो।

 

Comments
user profile image
सतीश कुमार तिवारी शिक्षक
on Oct 06 2021 17:12:42

ख्््ख Kendriya star per Kanoon ki jarurat hai aur Sarkar per dabav dalna hoga sanvidhan sanshodhan kar yah kam Kiya Ja sakta hai Dharm prachar main main dharmantaran Lagu Nahin Hota H

user profile image
Anonymous
on Sep 29 2021 17:48:38

इससे भी भयंकर स्तिथि तो लद्दाख के गांव की है यहां भी बुद्ध धर्म को मानने वालों को इसियाई और सबसे ज्यादा तो मुसलमान बनाने का काम चल रहा है इतनी मस्जिद जीवन में कल्पना से परे है

user profile image
Anonymous
on Sep 29 2021 17:47:06

यह सत्य है मैं कई सालों से विदेशी पर्यटकों को लेकर जाया करता हूं हर वर्ष नए गिरजाघर और मिशनरी स्कूल खोले जा रहे हैं शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा आप यदि ईसाई धर्म अपना लोगे तो ही मिलेगी

user profile image
Anonymous
on Sep 29 2021 08:44:41

संविधान से kanवर्जन की धारा हटा दो दुनिया को बता दो कि धर्म परिवर्तन अब नहीं होता है यह स्वतः ही रुक जाएगा

user profile image
Anonymous
on Sep 28 2021 20:57:53

sadhubad BHP

Also read: श्री विजयादशमी उत्सव: भयमुक्त भेदरहित भारत ..

Afghanistan में तालिबान के आतंक के बीच यहां गूंज रहा हरे राम का जयकारा | Panchjanya Hindi

अफगानिस्तान का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें नवरात्रि के दौरान काबुल के एक मंदिर में हिंदू समुदाय लोग ‘हरे रामा-हरे कृष्णा’ का भजन गाते नजर आ रहे हैं।
#Panchjanya #Afghanistan #HareRaam

Also read: दुर्गा पूजा पंडालों पर कट्टर मुस्लिमों का हमला, पंडालों को लगाई आग, तोड़ीं दुर्गा प्र ..

कुंडली बॉर्डर पर युवक की हत्‍या, शव किसान आंदोलन मंच के सामने लटकाया
सहारनपुर में हो रहा मदरसे का विरोध, जानिए आखिर क्या है कारण

विजयादशमी पर विशेष : दुष्प्रवृत्तियों से जूझने का लें सत्संकल्प

  विजयादशमी के महानायक श्रीराम भारतीय जनमानस की आस्था और जीवन मूल्यों के अन्यतम प्रतीक हैं। भारतीय मनीषा उन्हें संस्कृति पुरुष के रूप में पूजती है। उनका आदर्श चरित्र युगों-युगों से भारतीय जनमानस को सत्पथ पर चलने की प्रेरणा देता आ रहा है। शौर्य के इस महापर्व में विजय के साथ संयोजित दशम संख्या में सांकेतिक रहस्य संजोये हुए हैं। हिंदू तत्वदर्शन के मनीषियों की मान्यता है कि जो व्यक्ति अपनी आत्मशक्ति के प्रभाव से अपनी दसों इंद्रियों पर अपना नियंत्रण रखने में सक्षम होता है, विजयश्री उसका वरण अवश ...

विजयादशमी पर विशेष : दुष्प्रवृत्तियों से जूझने का लें सत्संकल्प