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भारत

सेवा का माध्यम बना पुराना सामान

सेवा का माध्यम बना पुराना सामान
संस्था द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में कपड़े खरीदते लोग

 

दीपावली से पहले लोग जिन चीजों को पुराना या फालतू कहकर घर से बाहर कर देते हैं, उनके जरिए वडोदरा के कुछ युवा समाज सेवा कर रहे हैं। इससे बहुत सारे गरीब लोगों को घरेलू सामान मिलता है, वहीं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ाई में मदद मिलती है। 

 

गुजरात के वडोदरा में पिछले सात साल से कुछ युवा एक अनूठा कार्य कर रहे हैं। यह कार्य है पुराने कपड़ों, खिलौनों और अन्य वस्तुओं का संग्रह करना और उन्हें बेचकर गरीब बच्चों की मदद करना। उल्लेखनीय है कि दीपावली से पहले प्राय: लोग घर के पुराने वस्त्र, खिलौने, जूते,  फर्नीचर और अन्य वस्तुएं या तो फेंक देते हैं या फिर किसी गरीब को दान दे देते हैं। अधिकतर  लोग तो कूड़े में डाल देते हैं। इस कारण कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। शहरों में कूड़ों के पहाड़ बन रहे हैं। पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इन सबको देखते हुए वडोदरा में आईटीआई संस्थान चलाने वाले 37 वर्षीय व्रजेश पटेल और उनके साथियों ने इन वस्तुओं से गरीबों की मदद करने का विचार किया। इसके बाद इन लोगों ने 'खुशियों की अलमारी' नाम से एक संगठन बनाया।

यह भी तय किया कि दीपावली से पहले वडोदरा शहर में जितनी भी पुरानी चीजों को लोग घर से बाहर करेंगे उन्हें जमा करना है। इसके लिए शहर की विभिन्न कॉलोनियों में दीपावली से पहले एक जगह तय की गई और लोगों से आग्रह किया गया कि आप जो कुछ भी घर से बाहर करने वाले हैं, उन्हें कूड़ेदान में न डालकर अमुक स्थान पर रख दें। उनके इस निवेदन का असर भी हुआ। लोगों ने उन जगहों पर रखे पात्रों में ही अपने पुराने सामान को रखना शुरू किया।

'खुशियों की अलमारी' से जुड़े युवाओं में से अधिकतर युवा उच्च शिक्षित हैं और कुछ न कुछ कारोबार करते हैं। इनमें कई तो विदेश में पढ़कर अपनी कोई कंपनी चलाते हैं। वडोदर के लोग इन युवाओं की सेवा भावना से बहुत ही प्रभावित हैं। इस कारण यह संस्था दिनोंदिन अधिक से अधिक जरूरतमंदों की सेवा कर पा रही है। 

 

हालत यह हो गई कि हर दिन पात्र भरने लगे और संस्था को प्रतिदिन खाली पात्र रखना पड़ा। इस तरह एक सप्ताह में लाखों की संख्या में कपड़े और अन्य वस्तुएं जमा हो गईं। इसके बाद संस्था ने उन कपड़ों को धुलवाया और उनकी प्रदर्शनी लगाई। उसमें हर वस्तु 10 रु. में बेची गई। पहले ही वर्ष प्रदर्शनी में रखी गईं लगभग 90 प्रतिशत वस्तुएं बिक गईं। इससे जो पैसा जमा हुआ, उसे अनंता एजुकेशन ट्रस्ट को दिया गया। यह ट्रस्ट गरीब बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में मदद करता है। व्रजेश पटेल ने बताया कि हर वर्ष लगभग 5,00,000रु. का सामान बिकता है और पूरा पैसा अनंता एजुकेशन ट्रस्ट को दे दिया जाता है। इससे गरीब छात्रों के लिए कपड़े, पुस्तकें, स्कूल बैग और अन्य सामान खरीदा जाता है।  


'खुशियों की अलमारी' से जुड़े युवाओं में से अधिकतर युवा उच्च शिक्षित हैं और कुछ न कुछ कारोबार करते हैं। इनमें कई तो विदेश में पढ़कर अपनी कोई कंपनी चलाते हैं। वडोदर के लोग इन युवाओं की सेवा भावना से बहुत ही प्रभावित हैं। इस कारण यह संस्था दिनोंदिन अधिक से अधिक जरूरतमंदों की सेवा कर पा रही है। 

 


 

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