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राज्य

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर, सिद्धू के बाद चन्‍नी सरकार पर मनीष तिवारी का हमला

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WebdeskNov 29, 2021, 02:51 PM IST

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर, सिद्धू के बाद चन्‍नी सरकार पर मनीष तिवारी का हमला

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। कभी नौकरियों में भाई-भतीजावाद तो कभी तबादलों को लेकर राज्य की चरणजीत चन्नी सरकार लगातार सवालों के घेरे में है। गुटों में बंटे कांग्रेस नेता एक-दूसरे की टांग खींच रहे हैं। इस बार पार्टी सांसद मनीष तिवारी ने तबादलों पर चन्नी सरकार को घेरा है।

 

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। कभी नौकरियों में भाई-भतीजावाद तो कभी तबादलों को लेकर राज्य की चरणजीत चन्नी सरकार लगातार सवालों के घेरे में है। दूसरी तरफ, गुटों में बंटे कांग्रेस नेता एक-दूसरे की टांग खींच रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझ रहे हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर भी लगातार दबाव बनाए हुए हैं। सिद्धू की कार्यशैली के खिलाफ भी आवाजें उठ रही हैं। इस बार राज्य में धड़ल्ले से किए जा रहे तबादलों पर आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राज्य सरकार से हिसाब मांगा है। चन्नी सरकार के 70 दिनों के कार्यकाल में जिन अधिकारियों का तबादला किया गया, उन्होंने उसकी सूची जारी करने को कहा है। 

मनीष तिवारी बनाम सिद्धू-चन्नी

मनीष तिवारी ने रविवार को एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने कहा कि लोगों के कामकाज के लिए मैंने सुबह 7 बजे कुछ अधिकारियों को बुलाया। लेकिन उन्होंने दावा किया उनका तबादला हो गया है। मैं जानना चाहता हूं कि यह सच है या झूठ। मैं पंजाब सरकार से आग्रह करता हूं कि कृपया पटवारी से लेकर मुख्य सचिव तक, पिछले 70 दिनों में सभी सरकारी विभागों में तबादलों और नियुक्तियों की पूरी सूची प्रकाशित करें। साथ ही, उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट भी ट्वीट की है, जिसमें पूछा गया है कि सत्ता बदलते ही अधिकारियों का तबादला सही है या गलत। कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह मुख्यिमंत्री बनते ही चरणजीत चन्नी ने अधिकारियों का तबादला कर दिया। इसी तरह, नियुक्ति के कुछ दिन बाद ही अमृतसर, जालंधर और लुधियाना के पुलिस कमिश्नर को बदल दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि तीनों की एक ही गलती कैसे हो सकती है? अधिकारियों की नियुक्ति उनकी योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि नेताओं और रसूखदारों की इच्छा पर होती है। बता दें कि हाल ही में पंजाब सरकार ने 16 आईएएस और 29 पीसीएस अधिकारियों का तबादला किया था। इनमें कुछ ऐसे अधिकारी भी हैं, जिनका दो माह में तीन बार तबादला किया गया। इससे पहले मनीष तिवारी ने पंजाब में बीएसएफ के बढ़े क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर चन्नी सरकार पर हल्ला बोला था। उनके निशाने पर सिद्धू भी रहे हैं। अभी हाल ही में इमरान खान को बड़ा भाई बताने पर उन्होंने सिद्धू से पूछा था कि क्या पुंछ में अपने सैनिकों की शहादत को इतनी जल्दी भूल गए?

सिद्धू-सुनील जाखड़ में तनातनी

पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्य़क्ष सुनील जाखड़ और सिद्धू के बीच तनातनी भी किसी से छिपी नहीं है। हाल ही में सिद्धू ने अमृतसर में कहा था कि जाखड़ केवल ट्वीट करते हैं। उनकी तरह मुद्दे नहीं उठाए। जाखड़ ने सिद्धू को इसका जवाब शायराना अंदाज में दिया। उन्होंने सिद्धू के बयान का एक वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया, 'बुत हम को कहे काफिर, अल्लाह की मर्जी है, सूरज में लगे धब्बा, फितरत के करिश्मे हैं, बरकत जो नहीं होती, नीयत की खराबी है।‘ एक दिन पहले ही जाखड़ ने सिद्धू पर तंज कसते हुए कहा कि पंजाब में ड्रामा अब नई ‘पॉलिटिकल करेंसी’ बन चुकी है, जो क्रिप्टो करेंसी की तरह है। यह बिकती तो ज्यादा है लेकिन उसकी विश्वसनीयता नहीं है। बता दें कि जाखड़ को हटाकर उनकी जगह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। यह बदलाव अचानक किया गया था। कांग्रेस के लिए जाखड़ की नाराजगी सबसे बड़ी चिंता है, क्योंकि वे पार्टी के कद्दावर हिंदू चेहरा हैं। इससे पहले उन्होंने केदारनाथ जाने पर चरणजीत चन्नी और नवजोत सिद्धू को ‘राजनीतिक तीर्थयात्री’ बताया था। 

सरकार पर सिद्धू के हमले जारी

इसी तरह, सिद्धू ने पंजाब के महाधिवक्ता और डीजीपी पर हल्ला बोलते हुए उन्हें हटाने के लिए चन्नी सरकार पर दबाव बनाया। अंतत: चन्नीे सरकार को एपीएस देओल को अटॉर्नी जनरल पद से हटाना पड़ा। अब सिद्धू ड्रग्स मामले में लगातार चन्नी सरकार पर हमले कर रहे हैं। पहले उन्होंने धमकी दी कि अगर सरकार ने एसटीएफ की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं की तो वे आमरण अनशन करेंगे। इस पर उप-मुख्यवमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि एक समिति गठित की जा रही है, जो इस मामले की जांच में देरी पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करेगी। इस पर सिद्धू ने रंधावा पर हल्ला बोलते हुए कहा कि ड्रग्स मामले में उच्च न्यायालय में अपील का क्या मतलब है। न्यायालय ने रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का आदेश भी दे दिया है। उधर, सिद्धू के बड़बोलेपन और कार्यशैली के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। विधायक वरिंदरमीत पहाड़ा और कुलबीर जीरा ने सिद्धू के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिद्धू को अपनी बात पार्टी के अंदर उठानी चाहिए। ये दोनों कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार गिराने वाले गुट में शामिल थे। 

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