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मिटा दिया भ्रूणहत्या का कलंक

Written byमनोज ठाकुरमनोज ठाकुर
Mar 5, 2022, 11:40 pm IST
inभारत, हरियाणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत जिले से पूरे देश को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत जिले से पूरे देश को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया था

आज हरियाणा 6 साल पहले वाला राज्य नहीं है, जहां जन्म लेने से पहले ही बच्चियों को मार दिया जाता था। झज्जर का छबीली गांव तो कन्या भ्रूणहत्या के लिए कुख्यात था। राज्य में ऐसे और भी कई गांव थे। लेकिन छबीली गांव ने अपने माथे पर लगे इस कलंक को न केवल मिटाया है, बल्कि अपनी पहचान ऐसे गांव की बनाई है, जहां लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक है 

हरियाणा के झज्जर जिले का छबीली गांव एक सामान्य-सा गांव है। यहां ऐसा कुछ नहीं है, जो इस गांव को दूसरों से अलग करता हो। फिर भी यह देश में अपनी पहचान रखता है। दरअसल, छबीली गांव पहले कन्या भ्रूणहत्या के लिए कुख्यात था। कुछ साल पहले तक इस गांव में प्रति हजार लड़कों पर मात्र 800 लड़कियां थीं। यहां प्रदेश ही नहीं, देश भर में सबसे कम लड़कियां थीं। लेकिन अब यहां लड़कियों की संख्या लड़कों से भी अधिक हो गई है। यहां प्रति हजार लड़कों पर 1091 लड़कियां हैं और यही इस गांव की पहचान है। छबीली गांव में लिंगानुपात में आए इस अभूतपूर्व सुधार में ग्रामीणों का सबसे बड़ा योगदान है। यहां ग्राम पंचायत लिंग जांच और कन्या भ्रूणहत्या पर जुर्माना लगाती है। अगर कहीं भी इसका पता चलता है तो तत्काल कार्रवाई की जाती है।

यह बदलाव आया है, प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पानीपत से जब ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत करने से पहले हरियाणा में प्रति हजार लड़कों पर 871 लड़कियां थीं। लेकिन मनोहर लाल खट्टर की अगुआई वाली भाजपा सरकार की कुशल नीतियों, योजनाओं और सख्ती के कारण 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 922 हो गया। अब स्थिति यह है कि राज्य के 22 में से 20 जिलों में लिंगानुपात 900 से अधिक है। बीते 6 साल के दौरान राज्य सरकार ने 30,000 कन्या भ्रूण की रक्षा की। कोरोना महामारी के बावजूद राज्य सरकार ने 2020 में ही 8,000 कन्या भ्रूण की रक्षा की। 

कन्या भ्रूणहत्या रोकने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर जागरुकता अभियान और योजनाएं शुरू कीं, जिनमें ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’,  ‘लाड़ली’, ‘आपकी बेटी-हमारी बेटी’ आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही, अवैध लिंग परीक्षण, गर्भपात केंद्रों की पहचान के लिए टीमें गठित की गर्इं, प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीएनडीटी) और एमपीटी अधिनियम के तहत बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई और ‘मुखबिर प्रोत्साहन अभियान’ के तहत राज्य व पड़ोसी राज्यों में भ्रूण परीक्षण केंद्रों की जानकारी देने वालों को एक लाख रुपये का इनाम देने की व्यवस्था की गई। बीते 6 वर्षों में करीब 1,000 छापे मारे गए। इसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड में मारे गए 275 छापे भी शामिल हैं। इस दौरान पीएनडीटी-एमपीटी अधिनियम के तहत 970 मामले दर्ज किए गए और 3,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। साथ ही, ‘मुखबिरों’ को करीब 3 करोड़ रुपये भी दिए गए। इन सब कारणों से हरियाणा में लिंगानुपात में काफी सुधार आया। साथ ही, हॉकी, कुश्ती जैसे खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला खिलाड़ियों ने भी लोगों की मानसिकता पर गहरी छाप छोड़ी। 

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के लोगों को समझाया था कि कन्या भू्रणहत्या पाप है। यदि कोई ऐसा करता है तो उसे गांव के देवता का श्राप लगता है। लेकिन इतना कहना काफी नहीं था। इसलिए उन्होंने कन्या भ्रूणहत्या रोकने के लिए दूसरे उपाय भी किए। जागरुकता, प्रोत्साहन देने के साथ भय भी दिखाया गया। लगातार प्रयासों के बाद ग्रामीण इलाकों में लोगों की सोच में बदलाव आया। इसमें गैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समाज, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभाग के कर्मचारियों ने टीम बनाकर गांवों का दौरा किया और लोगों को जागरूक किया। गांव छबीली के 43 वर्षीय सतबीर सिंह कहते हैं, ‘‘गांव में जागरुकता अभियान चलाने के बाद ग्रामीणों की समझ में आया कि अब लड़का और लड़की में कोई अंतर नहीं है।’’इसी तरह, एक समय था जब जींद और महेंद्रगढ़ जिलों में भी कन्या भ्रूणहत्या बड़े पैमाने पर होती थी, लेकिन वहां भी स्थिति में काफी बदलाव आया है।

बेटी बचाओ अभियान के तहत काम कर रहे 32 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता संदीप कुमार ने बताया कि यह लोगों की बदलती सोच का ही परिणाम है कि अब परिवार में पहली संतान लड़की होने पर लोग खुश होते हैं। लेकिन दूसरी संतान भी लड़की जन्म लेती है, तब भी वे खुश होते हैं। राज्य के अस्पतालों में यह बदलती सोच आसानी से देखी जा सकती है। राज्य के शहरी इलाकों में तो बेटियों की लोहड़ी अब आम बात हो गई है। हरियाणा पहले से बहुत बदल गया है। अब यहां के लोगों में लड़का और लड़की को लेकर मानसिकता बदल रही है। वे दोनों को ही समान नजरिये से देखने लगे हैं। 

राज्य सरकार की उपलब्धि का आलम यह है कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में हरियाणा 2019 में  देशभर में पहले स्थान पर रहा। इसके तहत देश के 5 श्रेष्ठ राज्यों और 10 जिलों का चुनाव किया गया। इसके अलावा, जागरुकता अभियान में बेहतर कार्य करने वाले 10 जिलों को भी सम्मानित किया गया। केंद्र सरकार द्वारा जिन पांच राज्यों को शीर्ष 5 राज्यों की सूची में रखा गया, उनमें हरियाणा के बाद उत्तराखंड दूसरे स्थान पर, दिल्ली तीसरे, राजस्थान और उत्तर प्रदेश क्रमश: चौथे और पांचवें स्थान पर रहे। 

पत्रिका लांसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा में जिन महिलाओं की पहली संतान बेटी होती है, वे दूसरी बार गर्भवती होने पर अल्ट्रासाउंड करा कर भ्रूण का लिंग जांचने की कोशिश करती हैं। पत्रिका का दावा है कि हर साल 5,00,000 कन्याओं को कोख में ही मार दिया जाता था। लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। इसका श्रेय जाता है, भाजपा सरकार को। हरियाणा में सरकार अब अगले लक्ष्य को हासिल करने में जुटी हुई है। नया लक्ष्य है प्रदेश में प्रति हजार 950 लड़कियों का आंकड़ा हासिल करना। महिला और बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को और ज्यादा गति देने जा रहा है। इसके लिए सरकारी स्कूलों की छात्राओं को अभियान से जोड़ा जा रहा है। ये बच्चियां स्कूलों में अपनी गतिविधियों के माध्यम से बेटियों के महत्व बारे जागरुकता संदेश देंगी। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शिक्षा विभाग के जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) को बजट जारी किया जाएगा।

कार्यक्रम के बारे में स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सूचित किया जाएगा। स्कूलों में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ को लेकर गतिविधियों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को 5,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। अतिरिक्त परियोजना समन्वयक स्कूलों में जाकर चलाई जा रही गतिविधियों का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा में लड़कियों के प्रति सोच बदल रही है। यह सुखद है। इसके लिए लगातार प्रयास करने होंगे, क्योंकि लंबे समय से जो सोच बनी है, उसे खत्म करने में समय लगता है। इसलिए हम लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। यह तब तक जारी रहेगा, जब तक कि कोख में हर बेटी सुरक्षित न हो जाए। यह हमारा प्रण है, जिसे हम हर हालत में पूरा करेंगे।      

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