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नौसेना में शामिल हुई स्कॉर्पीन 'वेला', दुश्मन की पनडुब्बी को मार गिराने की बढ़ी क्षमता

Webdesk

WebdeskNov 25, 2021, 02:28 PM IST

नौसेना में शामिल हुई स्कॉर्पीन 'वेला', दुश्मन की पनडुब्बी को मार गिराने की बढ़ी क्षमता
स्कॉर्पीन पनडुब्बी वेला

वेला से पहले इसी श्रेणी की कालवरी, खंडेरी और करंज पनडुब्बियों को किया जा चुका है लांच 

 

स्कॉर्पीन श्रेणी की चौथी पनडुब्बी 'वेला' गुरुवार को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल कर ली गई। इससे समुद्र के अन्दर से दुश्मन पर वार करने की भारत की क्षमता और ज्यादा बढ़ गई है। मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित शानदार समारोह में पनडुब्बी पर नौसैनिक ध्वज और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ ही उसे भारत के एक वैध और संप्रभु प्रतिनिधि के रूप में मान्यता दी गई। इस क्लास की तीन पनडुब्बियां पहले से ही भारतीय नौसेना के पास हैं।

तीन पनडुब्बियां पहले से ही नौसेना के पास
नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह की उपस्थिति में कमीशन समारोह में आईएनएस वेला को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। समारोह के दौरान न केवल पनडुब्बी पर नौसैनिक ध्वज और राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, बल्कि उसे भारत के एक वैध और संप्रभु प्रतिनिधि के रूप में मान्यता भी दी गई। इसके निर्माण के दौरान ही पनडुब्बी को 'यार्ड 11878' के रूप में नामित किया गया था। पनडुब्बी 'वेला' ने हथियार और सेंसर परीक्षणों सहित सभी प्रमुख बंदरगाह और समुद्री परीक्षणों को पूरा कर लिया है। इनमें से तीन पनडुब्बियां पहले से ही भारतीय नौसेना के पास कमीशन में हैं।

पनडुब्बी INS वेला

कुल 6 पनडुब्बियों का होना है निर्माण
प्रोजेक्ट-75 की पनडुब्बी का निर्माण 14 जुलाई, 09 को स्टील की पहली कटिंग के साथ शुरू हुआ। इसे 6 मई, 19 को लॉन्च करने के साथ ही 'वेला' नाम दिया गया। व्यापक प्रणाली, मशीनरी और हथियार परीक्षणों के बाद एमडीएल ने इसी माह की शुरुआत में 09 नवंबर को यह पनडुब्बी भारतीय नौसेना को सौंपी थी। एमडीएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल नारायण प्रसाद और नौसेना की ओर से रियर एडमिरल केपी अरविंदन ने स्वीकृति पत्रों पर हस्ताक्षर किए थे। इस प्रोजेक्ट के तहत स्कॉर्पीन डिजाइन की कुल 6 पनडुब्बियों का निर्माण किया जाना है।

पांचवीं पनडुब्बी वागीर का बंदरगाह परीक्षण शुरू
सभी पनडुब्बियों का निर्माण फ़्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप के सहयोग से मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) मुंबई में किया जा रहा है। मुंबई के यार्ड में इन पनडुब्बियों का निर्माण 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक और कदम है। वेला से पहले इसी श्रेणी की कालवरी, खंडेरी और करंज पनडुब्बियों को लांच किया जा चुका है। इस शृंखला की पांचवीं पनडुब्बी वागीर 12 नवंबर, 2020 को लॉन्च की जा चुकी है, जिसने अपना बंदरगाह परीक्षण भी शुरू कर दिया है। अगले माह इसके पहले सतह मिशन पर जाने की संभावना है। छठी पनडुब्बी भी एक उन्नत (एडवांस) चरण में है। आईएनएस वेला के कमांडिंग ऑफिसर अनीष मैथ्यू ने कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व का अवसर है। इस पनडुब्बी में बैटरी और आधुनिक संचार व्यवस्था स्वदेशी है।

स्कॉर्पीन श्रेणी की चौथी पनडुब्बी INS वेला

आईएनएस वेला की खासियत
नई पनडुब्बी एक बार गोता लगाने के बाद बहुत ही प्रभावशाली तरीके से ताकत के साथ दुश्मन की पनडुब्बी को पानी के भीतर ही डुबोने में सक्षम है। वेला उन्नत हथियारों और सेंसर से सुसज्जित है। इन सभी को सबमरीन टैक्टिकल इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सिस्टम में एकीकृत किया गया है, जिसे सबटिक्स के नाम से जाना जाता है। इस पनडुब्बी की अपनी समुद्री स्किमिंग मिसाइलों को फ्लाइंग फिश या भारी वजन वाले तार-निर्देशित टॉरपीडो के रूप में भी जाना जाता है। नौसेना इंजीनियरों और भारतीय प्रशिक्षण दल (आईटीटी) की देखरेख में पनडुब्बी का निर्माण 'आत्म निर्भर भारत' की दिशा में मील का एक प्रमुख पत्थर है।

आईएनएस वेला का पुनर्जन्म
पुरानी आईएनएस वेला को 31 अगस्त, 73 को वेला श्रेणी की पनडुब्बियों की प्रमुख नाव के रूप में कमीशन किया गया था। उसने अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान कई उल्लेखनीय परिचालन उपलब्धियां हासिल कीं हैं। इस पनडुब्बी ने 37 वर्षों तक राष्ट्र की महत्वपूर्ण सेवा की और 25 जनवरी, 2010 को उसे सेवामुक्त कर दिया गया था। नई वेला एक शक्तिशाली 'मैन ओ वॉर' है, जो पूरे स्पेक्ट्रम में आक्रामक समुद्री युद्ध में सक्षम है।

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