पाञ्चजन्य - राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक पत्रिका | Panchjanya - National Hindi weekly magazine
Google Play पर पाएं
Google Play पर पाएं

संघ

विश्व को सुख देने वाला धर्म हमारे पास: श्री मोहनराव भागवत

WebdeskOct 05, 2021, 04:13 PM IST

विश्व को सुख देने वाला धर्म हमारे पास: श्री मोहनराव भागवत


गत दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने जम्मू विश्वविद्यालय के जनरल जोरावर सिंह सभागार में प्रबुद्धजनों की गोष्ठी को संबोधित किया।


 

गतदिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने जम्मू विश्वविद्यालय के जनरल जोरावर सिंह सभागार में प्रबुद्धजनों की गोष्ठी को संबोधित किया। समारोह में विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन को सुख देने वाला धर्म हमारे पास है। हमारा धर्म संपूर्ण विश्व के लिए, आत्मीय दृष्टि रखने और सुख देने वाला है। समाज वास्तव में केवल भीड़ नहीं, समूह नहीं, अपितु वह सब मनुष्य हैं जो सम व अज से तब बनते हैं, जब उनके सामने एक उद्देश्य होता है। उनका अपना जीवन एक उद्देश्य के लिए चलता है.

उन्होंने कहा कि विश्व की नजरें भारत पर लगी हैं. उसकी वजह है कि भारत में विविधता में एकता है. समाजवाद और वामपंथ के बाद कोई तीसरा रास्ता होना चाहिए, ऐसा विचार आज चल रहा है. इंग्लैंड का आधार भाषा है, अतः जब तक अंग्रेजी है यूके है. यूएसए का आधार आर्थिक विषय हैं. अरब जैसे देशों का आधार इस्लाम है. उन्होंने इस संदर्भ में भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में पहले से ही विविधताएं हैं, लेकिन जोड़ने वाले तत्व हमारे पास होने के कारण हम एक हैं.

श्री भागवत ने कहा कि भारत में व्यक्ति समाज के विकास में बाधा नहीं बनते और न ही समाज व्यक्ति के विकास में बाधा बनता है. हमारे पूर्वजों ने हमें यह सिखाया है. यही हमारी संस्कृति है जो सनातन काल से चल रही है. भारत में अनेक राज्य, व्यवस्थाएं और विविधताएं हैं. लेकिन, इससे हमारी एकता नहीं बदलती. इसलिए यह आवश्यक है कि निःस्वार्थ भाव के साथ सभी यह समझें कि देश से बढ़कर कुछ नंहीं है. हमारा देश जब सुरक्षित, प्रतिष्ठित, समर्थ बनेगा तब हम सुरक्षित, प्रतिष्ठित, समर्थ बनेंगे.

उन्होंने कहा कि व्यवस्था बदलती है और इसके अंतर्गत ही अनुच्छेद 370 हटा, मतलब व्यवस्था में परिवर्तन हुआ. मन की आस पूरी हुई. इसके लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी और प्रजा परिषद ने आंदोलन किया था.

इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, उत्तर क्षेत्र के संघचालक प्रो. सीता राम व्यास और जम्मू—कश्मीर प्रांत के सह संघचालक डॉ. गौतम मैंगी भी उपस्थित रहे। 

Follow Us on Telegram
 

Comments
user profile image
Jaipat Jangu
on Nov 09 2021 19:25:38

सही कहा

user profile image
संस्कार श्रीवास्तव
on Oct 06 2021 10:49:55

प्रेरणा देने वाला लेख

Also read:दीन के दयाल का ‘दर्शन’ ..

मा. कृष्णगोपाल जी का उद्बोधन

मा. कृष्णगोपाल जी का उद्बोधन

Also read:गूढ़ प्रश्नों के सरल उत्तर देती थी गुरुजी की लेखनी ..

राष्ट्रभाव की गूंज
राष्ट्रीय अस्मिता का ‘धर्मयुद्ध’

इस मुकाम से अतीत का स्मरण

स्वाधीनता के बाद उस पत्रकारिता की आवश्यकता अधिक बढ़ गई थी जिससे राष्ट्रीयता की धारा को अविरल बनाया जा सके। जब देश और संस्थाएं दोराहे पर थीं तब भारत के सामने प्रश्न था कि अपना रास्ता क्या है? उसकी खोज के लिए नहीं, उसे पहचानने के लिए एक आवाज के रूप में पाञ्चजन्य निकला। इसका अर्थ सीधा है। वह यह कि राह तो थी। उसे खोजना नहीं था। उसे जानना था। उसका उद्घोष करना था। यही कार्य पत्रकारिता का है। रामबहादुर राय इस प्रसंग से पाञ्चजन्य की पत्रकारिता को समझना सरल हो सकता है। बहुत साल पहले की यह बात है। ...

इस मुकाम से अतीत का स्मरण