पाञ्चजन्य - राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक पत्रिका | Panchjanya - National Hindi weekly magazine
Google Play पर पाएं
Google Play पर पाएं

विश्व

विदेश: इराक के पीएम का बड़ा बयान-'आईएसआईएस से लड़ने के लिए अब अमेरिकी सेना की नहीं जरूरत'

WebdeskJul 26, 2021, 05:10 PM IST

विदेश: इराक के पीएम का बड़ा बयान-'आईएसआईएस से लड़ने के लिए अब अमेरिकी सेना की नहीं जरूरत'

प्रधानमंत्री अल-कादिमी
अफगानिस्तान के बाद बहुत संभव है इराक से भी अमेरिकी सेनाओं के वापसी हो जाए। आइएस द्वारा इराक के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करने के बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2014 में इराक में अमेरिकी सेना भेजने का निर्णय लिया था

इराक से खबर है कि अमेरिका के दौरे पर गए प्रधानमंत्री मुस्तफा अल-कादिमी ने कहा है कि अब इराक को आईएसआईएस से लड़ने के लिए अमेरिकी सेना की कोई जरूरत नहीं है। पर वे यह जरूर कहते हैं कि उन्हें अमेरिका की प्रशिक्षण सेवाओं की जरूरत पड़ेगी।

अल-कादिमी ने आगे कहा कि उनके देश में अमेरिकी सेना की आवश्यकता तो नहीं है, पर उनके फिर से तैनाती के लिए समय सीमा इस हफ्ते अमेरिकी प्रशासन के साथ वार्ता के नतीजे पर निर्भर होगी। प्रधानमंत्री अल-कादिमी का कहना है कि इराक को अमेरिका की प्रशिक्षण और सैन्य गुप्तचरी सेवाओं की जरूरत पड़ेगी।

अल कादमी बाइडेन से रणनीतिक वार्ता के चौथे चरण की बातचीत करने वाले हैं। उससे पूर्व अल-कादिमी का यह बयान बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘इराक की जमीन पर किसी विदेशी सेना की जरूरत नहीं है।’ हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं बताया कि अमेरिकी सेना की वापसी कब तक होगी। इस बारे में उनका कहना था कि इराकी सुरक्षाबल तथा सेना, अमेरिका की अगुआई वाली सहयोगी देशों की सेनाओं के बिना देश की हिफाजत कर सकती हैं। 

अपने वाशिंगटन दौरे में अल कादमी ने एक साक्षात्कार में यह बात कही। वे बाइडेन से रणनीतिक वार्ता के चौथे चरण की बातचीत करने वाले हैं। इससे पूर्व अल-कादिमी का यह बयान बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘इराक की जमीन पर किसी विदेशी सेना की जरूरत नहीं है।’ हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं बताया कि अमेरिकी सेना की वापसी कब तक होगी। इस बारे में उनका कहना था कि इराकी सुरक्षाबल तथा सेना, अमेरिका की अगुआई वाली सहयोगी देशों की सेनाओं के बिना देश की हिफाजत कर सकती हैं। अल-कादिमी ने कहा कि सेना की वापसी इराकी बलों की आवश्यकता के हिसाब से होगी। उन्होंने कहा, ‘इस्लामिक स्टेट के विरुद्ध युद्ध और हमारी सेना की तैयारी को वक्त के हिसाब से चलने की जरूरत है जिसको बाइडेन के साथ होने वाली वार्ता में तय किया जाएगा।  

विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल के आखिर तक अमेरिकी सेना की इराक से वापसी हो सकती है। फिलहाल इराक में अमेरिका के ढाई हजार सैनिक हैं। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2014 में इराक में सेना भेजने का फैसला किया था और यह तब हुआ था जब इस्लामिक स्टेट ने पश्चिमी और उत्तरी इराक के एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया था।

Follow Us on Telegram
 

Comments

Also read: अमेरिकी संसद में 'ओम जय जगदीश हरे' की गूंज, भारतवंशी सांसदों के साथ बाइडेन प्रशासन ने ..

Osmanabad Maharashtra- आक्रांता औरंगजेब पर फेसबुक पोस्ट से क्यों भड़के कट्टरपंथी

#Osmanabad
#Maharashtra
#Aurangzeb
आक्रांता औरंगजेब पर फेसबुक पोस्ट से क्यों भड़के कट्टरपंथी

Also read: फेसबुक का एक और काला सच उजागर, रिपोर्ट का दावा-भारत में हिंसा पर खुशी, फर्जी जानकारी ..

जीत के जश्न में पगलाए पाकिस्तानी, नेताओं के उन्मादी बयानों के बाद कराची में हवाई फायरिंग में अनेक घायल
शैकत और रबीउल ने माना, फेसबुक पोस्ट से भड़काई हिंदू विरोधी हिंसा

वाशिंगटन में उबला कश्मीरी पंडितों का गुस्सा, घाटी में हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग

पंडित समुदाय की ओर से कहा गया कि घाटी में आतंकवाद को पाकिस्तान से खाद-पानी दिया जा रहा है। कश्मीर के युवाओं को पाकिस्तान उकसाने का काम करता है अमेरिका में अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में वहां के कश्मीरी पंडित समुदाय ने एक कार्यक्रम करके पिछले दिनों घाटी में हुई हिन्दुओं की हत्याओं पर अपना आक्रोश जाहिर किया। उन्होंने इस्लामी आतंकवादियों द्वारा चिन्हित करके की गईं आम लोगों की हत्याओं की कड़ी निंदा की। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार से मांग की कि घाटी में अल्पसंख्यकों यानी हिन्दुओं की पु ...

वाशिंगटन में उबला कश्मीरी पंडितों का गुस्सा, घाटी में हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग