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आंदोलन नहीं आ रहा रास, अब चुनाव लड़ेंगे किसान नेता

WebdeskJul 09, 2021, 02:54 PM IST

आंदोलन नहीं आ रहा रास, अब चुनाव लड़ेंगे किसान नेता

किसान आंदोलन का सियासी चरित्र एक बार फिर उजागर हो गया है। हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं को 'मिशन पंजाब' का सुझाव दिया है। मिशन पंजाब के जरिए पंजाब के किसान नेताओं को राजनीतिक कदम उठाने, विधानसभा चुनाव लड़ने और सरकार बनाने के लिए तैयारी करने को कहा गया है।

किसान आंदोलन का सियासी चरित्र एक बार फिर उजागर हो गया है। हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं को 'मिशन पंजाब' का सुझाव दिया है। मिशन पंजाब के जरिए पंजाब के किसान नेताओं को राजनीतिक कदम उठाने, विधानसभा चुनाव लड़ने और सरकार बनाने के लिए तैयारी करने को कहा गया है। गुरनाम सिंह चढ़ूनी की तरह ही संयुक्त किसान मोर्चा के नेता दर्शन पाल ने भी अपनी सियासी हसरतों को जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि हमारा एकमात्र एजेंडा जहां भी चुनाव होने हैं, वहां भाजपा की हार सुनिश्चित करना है। इससे पहले पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में किसान आंदोलन से जुड़े कथित नेता चुनाव प्रचार करते नजर आए थे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राजनीति से प्रेरित होकर कथित किसान आंदोलन चलाया जा रहा है। इस आंदोलन में किसानों की समस्याओं को लेकर उनका कोई सरोकार नहीं है। किसान तो नए कृषि क़ानूनों का अच्छा मानता है।

 



बातचीत से ही निकलेगा हल : तोमर

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से बातचीत के लिए आगे आने को कहा है। गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग के बाद उन्होंने कहा कि बातचीत से हर मुद्दे का समाधान निकाला जा सकता है। हालांकि उन्होंने फिर दोहराया है कि कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे।

राकेश टिकैत का बेतुका बयान

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने केंद्रीय कृषि मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार शर्त के साथ किसानों के साथ बात ना करे। जो वे कहेंगे किसान उस पर चलें ऐसा नहीं है। राकेश टिकैत ने यहां तक सरकार से कह दिया कि 'बातचीत या गोलियों से आंदोलन खत्म करो।'

केंद्रीय कैबिनेट ने किसानों को दी कई सौगात

एक तरफ कथित किसान आंदोलन से जुड़े नेता अपने सियासी एजेंडे पर आगे बढ़ रहे हैं। वहीं मोदी सरकार ने गुरुवार को किसानों के हित में कई बड़े फैसले लिए हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने एक लाख करोड़ रुपए के किसान इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के उपयोग के लिए एपीएमसी को इजाजत दे दी है। इसी के साथ कृषि मंडियों को सरकार द्वारा और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन दिए जाएंगे। इसके साथ ही कैबिनेट ने 23,123 करोड़ रुपए के इमरजेंसी हेल्थ पैकेज का भी ऐलान किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने नारियल की खेती करने वाले किसानों के लिए कोकोनट डेवलपमेंट बोर्ड में CEO की नियुक्ति को भी मंजूरी प्रदान की है।

अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा किसान आंदोलन

पिछले कई महीनों से जारी कथित किसान आंदोलन देश की अर्थव्यवस्था के सामने बड़ा संकट पैदा कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले आठ माह से पंजाब और हरियाणा के 50 से अधिक टोल प्लाजा बंद हैं। इस वजह से अर्थव्यवस्था को 4 जुलाई 2021 तक 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। किसान आंदोलन की वजह से देश में इतने लंबे समय तक टोल प्लाजा बंद होने की पहली घटना है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स, कन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स, एसोचैम ने दिसंबर 2020 में अलग-अलग रिपोर्ट जारी कर कथित किसान आंदोलन से अर्थव्यवस्था को हो रहे नुकसान पर चिंता जाहिर की थी। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के मुताबिक दिसंबर में समाप्त तिमाही में 70 हजार करोड़ रुपये का नुकसान कथित किसान आंदोलन की वजह से हो चुका है। यह मांग और आपूर्ति के बीच खाई पैदा कर रहा है। एसोचैम ने दिसंबर 2020 में एक रिपोर्ट के जरिए बताया था कि कथित किसान आंदोलन की वजह से हर दिन अर्थव्यवस्था को 3 हजार 500 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। आंदोलन की वजह से दिल्ली से सटे राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश की सीमा से आने वाले वाहनों की आवाजाही पर असर पड़ रहा है, इससे दैनिक जरुरत की वस्तुएं समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं, जिसका नतीजा महंगाई के रूप में भी सामने आ रहा है।

 

Comments
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श्याम आर्य
on Jul 11 2021 23:36:06

हज़ारों करोड़ की हानि होने के बाद भी सरकार शांत क्यों है ? क्यों न कठोर कदम उठाती ?

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सतीश कुमार तिवारी शिक्षक
on Jul 10 2021 20:43:11

मोदी नपुंसक हो गया क्या ?लात के देवता बात से नहीं मानते ।

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