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जन-जन से जुड़ता योग

WebdeskJun 21, 2021, 07:12 PM IST

जन-जन से जुड़ता योग

अश्विनी कुमार चौबे 
 
कोरोना के चलते योग दिवस भले वृहद रूप में न मनाया जा रहा हो, लेकिन आज दुनिया योग की गंभीरता को महसूस कर रही है. योग हमारी इम्युनिटी से जुड़ा है. यदि इम्युनिटी मजबूत रही तो हम इस बीमारी से न सिर्फ लड़ सकते हैं बल्कि जीत भी सकते हैं
 
 
सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का क्षण है. संपूर्ण विश्व योग कर रहा है, योग दिवस मना रहा है. दरअसल योग दिवस मात्र एक शारीरिक क्रिया भर कर लेने का नहीं बल्कि यह शरीर मन और आत्मा को उर्जावान रखने का मूल मंत्र है. यह विश्व बंधुत्व के सन्देश के साथ मानवता की एकता का दिन है. आज जब वैश्विक रूप से योग दिवस की चर्चा होती है तब भारत का जिक्र और भारत की कद्र, दोनों में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है. निश्चित ही यह गौरव भारतीय होने के नाते हम सभी को प्राप्त है. आज दुनिया के अधिकाधिक देश में योग दिवस मनाया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र में योग दिवस के प्रस्ताव को स्वीकार करने के पीछे निसंदेह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल सांस्कृतिक कूटनीति का ही परिणाम है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष के सबसे लंबे दिन 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में रखा. 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्य देशों द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई. 90 दिन में किसी दिवस का प्रस्ताव पास होने का यह पहला मामला था. इसके बाद 21 जून 2015 को पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया. भारत समेत 190 देशों में करोड़ों लोगों ने एक साथ योग किया था. योग की महत्ता हमारे देश में आदिकाल से सुनी और सुनाई जा रही है. यह हमारी संस्कृति का, हमारी दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहा है. पिछले साल कोरोना अपने चरम पर था तब भी और इस बार जब कोरोना की दूसरी लहर ढलान पर है तब भी, हम देखते हैं कि योग दिवस का उत्साह अपने चरम पर है. दुनिया भर में योग के प्रशंसक हैं. जब हम कोरोना के संक्रमण के कारण आर्थिक रूप से कमजोर, सुदूर गांव में रहने वाले आदिवासियों की समस्याओं पर बात करते हैं तब मुझे 2 साल पहले रांची में योग दिवस के मौके पर ही किए गए प्रधानमंत्री के संबोधन का एक अंश याद आता है.  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा था आधुनिक योग की यात्रा को शहरों से गांवों की तरफ और गरीब तथा आदिवासियों की ओर लेकर जाना है. मुझे योग को गरीब और आदिवासी के जीवन का हिस्सा बनाना है क्योंकि ये गरीब ही है जो बीमारी की वजह से सबसे ज्यादा कष्ट पाता है. ये बीमारी ही है जो गरीब को और गरीब बना देती है. ऐसे में हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि हम योग को एक ऐसे माध्यम के रूप में विकसित करें जिससे ऐसे लोग आर्थिक विपन्नता से उबार रहे हों. उनके जीवन में योग की स्थापना का अर्थ है कि उन्हें बीमारी और गरीबी के चंगुल से मुक्त कराना. इसमें कोई संशय नहीं कि बीते कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सद्प्रयासों के चलते योग स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा है. आज योग स्वास्थ्य के देखभाल के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके पीछे मोदी सरकार की सक्रिय भूमिका स्पष्ट दिखाई पड़ती है. आज भारत में योग हेतु जागरूकता सर्वत्र देखी जा सकती है. बोर्डरूम से ड्राइंग रूम, शहरों के पार्कों से गांव के गली कूचों तक योग पहुंचा है. योग ने आयु, जाति, संप्रदाय, मत, पंथ, अमीरी, गरीबी, प्रांत, सरहद के भेद, सीमा के भेद को मिटाया है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि योग सबका है और सब योग के हैं.  हमारी सरकार योग को करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. जाहिर तौर पर इसके लिए मानवीय श्रम की आवश्यकता होगी. इसके लिए हमें योग से जुड़ना होगा. संस्थान विकसित करने होंगे. मुझे इस बात का आत्मिक संतोष भी है कि मोदी सरकार इसी दृष्टि पर लगातार कार्यरत है जिससे सुखद परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं. 
 
कोरोना के चलते योग दिवस भले वृहद रूप में न मनाया जा रहा हो, लेकिन आज दुनिया योग की गंभीरता को महसूस कर रही है. योग हमारी इम्युनिटी से जुड़ा है. यदि इम्युनिटी मजबूत रही तो हम इस बीमारी से न सिर्फ लड़ सकते हैं बल्कि जीत भी सकते हैं. आज सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे ऋषियों ने योग के लिए "समत्वम् योग उच्यते" ये परिभाषा दी थी. उन्होंने सुख-दुःख में समान रहने, संयम को एक तरह से योग का पैरामीटर बनाया था. आज इस वैश्विक त्रासदी में योग ने इसे साबित करके दिखाया है. उन्होंने कहा कि जब कोरोना के अदृश्य वायरस ने दुनिया में जब दस्तक दी थी, तब कोई भी देश, साधनों से, सामर्थ्य से और मानसिक अवस्था से, इसके लिए तैयार नहीं था. हम सभी ने देखा है कि ऐसे कठिन समय में, योग आत्मबल का एक बड़ा माध्यम बना. योग ने लोगों में ये भरोसा बढ़ाया कि हम इस बीमारी से लड़ सकते हैं. आज योग दिवस का यह दिन हमें अवसर प्रदान करता है कि हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को योग को जन-जन से जोड़ने के लिए धन्यवाद दें.
 
( लेखक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री हैं )
 
 
 
 
 
 

Comments
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Anonymous
on Jun 21 2021 21:40:18

देश के यशस्वी प्रधानसेवक जी के प्रयासों की सफलता से सिद्धि की परिणति का परिणाम है कि आज सम्पूर्ण विश्व भारतीय योग विधा को आत्मसात करके आगे बढ़ रहे है। योग में वो शक्ति है तो आत्मबल के साथ बाह्य बल में भी हमे मजबूत करती है। सनातन संस्कृति की पहचान है योग

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